राज्य में हाथियों के हमले से हो रही मौत पर विधायकों ने जताई चिंता, सरकार बनाएगी एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर : सुदीव्य कुमार
झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र का चौथा दिन भी आज विलम्ब से ही शुरु हुआ। स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो आज साढ़े सात मिनट विलम्ब से सदन में पहुंचे। उसके बाद सदन में कई विधायकों ने अल्पसूचित प्रश्नकाल के दौरान राज्य में हाथियों से हो रही मौत पर चिंता जताई। इसमामले को लोहरदगा से कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव और जगरनाथपुर से विधायक सोनाराम सिंकू ने उठाया। रामेश्वर उरांव ने एक के बाद एक पांच पूरक सवाल पूछे।
पहला सवाल यह था कि हाथियों की मौत पर सरकार को एक नीति बनानी चाहिए। दूसरा यह कि क्या सरकार हाथियों से होने वाली मौत पर परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि में बढोत्तरी करेगी? उन्होंने कहा कि उड़ीसा में दस लाख मुआवजा मिलता है। फिर उन्होंने पूछा कि क्या सरकार हाथियों के लिए एलिफैंट रेस्क्यू सेंटर बनायेगी?
रामेश्वर उरांव ने जानना चाहा था कि क्या ऐसी मौत पर सरकार क्यूआरटी यानी क्विक रेस्क्यू टीम बनाने की इच्छा रखती है। साथ ही रामेश्वर उरांव ने घायल हाथियों के लिए मोबाईल वेटनरी क्लिनिक बनाना चाहती है या नहीं यह भी जानना चाहा। विधायक रामेश्वर उरांव और सोनाराम सिंकू के सवाल पर प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि राज्य सरकार जल्द एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर बनाएगी।
साइबर अपराध, अफीम खेती और जेल सुरक्षा पर सदस्यों ने सरकार को घेरा
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक हेमलाल मुर्मू ने राज्य में बढ़ते साइबर अपराध, अवैध अफीम की खेती और जेल से कैदियों के फरार होने जैसे गंभीर मुद्दों को सदन में उठाया। उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सरकार से जवाब तलब करते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े किए।
हेमलाल मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2024 में राज्य में साइबर अपराध के 1458 मामले दर्ज हुए, जिनमें 919 गिरफ्तारियां की गई। हालिंकि, इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बावजूद एक भी मामले में दोष सिद्ध नहीं हो सका, जबकि तीन आरोपी दोषमुक्त हो गए। वहीं वर्ष 2025 में 1413 मामले दर्ज हुए और 1268 गिरफ्तारियां की गईं। इनमें से 36 आरोपी दोषी पाए गए, जबकि 38 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हो रही हैं तो दोष सिद्धि दर इतनी कम क्यों है?
क्या तकनीकी खामियां हैं, साक्ष्य संग्रहण में कमी है या अभियोजन पक्ष की तैयारी कमजोर है? श्री मुर्मू ने कहा कि साइबर अपराध तकनीकी रूप से जटिल होते हैं, ऐसे में पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल फॉरेंसिक लैब और विशेषज्ञों की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि कितने मामलों में डिजिटल साक्ष्य समय पर एकत्र किए गए?, कितने पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध की विशेष ट्रेनिंग दी गई?, राज्य में कितनी साइबर थाने और फॉरेंसिक सुविधाएं कार्यरत हैं?
विधायक ने राज्य के विभिन्न इलाकों में अफीम की अवैध खेती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा समय-समय पर फसल नष्ट करने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसके बावजूद यह धंधा बदस्तूर जारी है। उन्होंने मांग की कि केवल फसल नष्ट करने के बजाय इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क और तस्करों पर कठोर कार्रवाई की जाय।
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
जेल से कैदियों के फरार होने की घटनाओं पर उन्होंने पूछा किफरार कैदियों की पुनः गिरफ्तारी के लिए क्या कदम उठाए गए? जेलों में सुरक्षा ऑडिट कब हुआ था? सीसीटीवी, सुरक्षाकर्मी और निगरानी व्यवस्था की वर्तमान स्थिति क्या है? उन्होंने सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।
हेमलाल मुर्मू ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिर्फ आंकड़े पेश करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोष सिद्धि दर बढ़ाने, जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने तथा जेल और मादक पदार्थ नियंत्रण तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से इन मामलों पर विस्तृत श्वेत पत्र लाने और सदन को स्थिति की वास्तविक जानकारी देने की मांग की।
जेपीएससी की कट ऑफ उम्र सीमा 2026 के बदले अगस्त 2022 की जायेगी
झारखंड लोक सेवा आयोग की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2025 में उम्र सीमा में छूट को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की है कि 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के लिए कट-ऑफ डेट वर्ष 2022 निर्धारित की जाएगी।
राज्य सरकार के इस निर्णय से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो पूर्व निर्धारित कट-ऑफ डेट के कारण अधिकतम आयु सीमा पार करने की स्थिति में परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे थे। लंबे समय से अभ्यर्थी आयु सीमा में छूट और कट-ऑफ डेट संशोधन की मांग कर रहे थे।
संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2025 के लिए निर्धारित कट-ऑफ डेट को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष था। उनका कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और पूर्व वर्षों में परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण कई अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर गए। इसको लेकर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन भी किया और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां कुछ अभ्यर्थियों को राहत भी मिली थी। हालांकि अंतिम समाधान के रूप में सरकार के स्तर से कट-ऑफ डेट में संशोधन की घोषणा की गई, जिससे व्यापक स्तर पर उम्मीदवारों को लाभ मिलेगा। कट-ऑफ डेट वर्ष 2022 किए जाने से हजारों अभ्यर्थी अब परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रतियोगी छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे युवाओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
अब अभ्यर्थियों की नजर जेपीएससी की आधिकारिक अधिसूचना पर है, जिसमें संशोधित कट ऑफ डेट और अन्य शर्तों को स्पष्ट किया जाएगा। आयोग द्वारा जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। सरकार के इस निर्णय को राज्य के युवाओं के लिए सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद काफी हद तक समाप्त होने की उम्मीद है।
एसएफसी की अनुशंसा पर पहली बार पंचायतों को मिलेगा 605 करोड़
झारखंड विधानसभा में प्रस्तुत 6,450 करोड़ के तृतीय अनुपूरक बजट को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य के ग्रामीण इतिहास में एक निर्णायक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वित्तीय प्रावधान नहीं, बल्कि झारखंड के गाँवों की तकदीर और तस्वीर बदलने का सशक्त संकल्प है।
मंत्री ने कहा, यह झारखंड के स्वर्णिम ग्रामीण विकास की आचारशिला है। विकास अब कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचेगा और धरातल पर दिखाई देगा। तृतीय अनुपूरक बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण राशि स्वीकृत की गई है- ग्रामीण कार्य विभाग को 1,717.58 करोड़ की ऐतिहासिक राशि प्रदान की गई है। इससे ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी।
दूरस्थ एवं पिछड़े इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे। पंचायती राज विभाग के लिए 658 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे पंचायतों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी तथा ग्राम सभाओं की भूमिका और प्रभावशीलता बढ़ेगी। ग्रामीण विकास विभाग को 594.88 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इससे ग्रामीण आजीविका मिशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों को गति मिलेगी।
मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि राज्य में पहली बार स्टेट फाइनेंस कमीशन की अनुशंसा पर पंचायतों के लिए 605 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने इसे ग्राम स्वशासन को वास्तविक अर्थों में सशक्त करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया। इस पहल के लिए मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व और दूर दृष्टि की सराहना की तथा वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
मंत्री ने कहा कि राज्य के शीर्ष विभागों में ग्रामीण कार्य, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को प्रमुख स्थान मिलना इस बात का संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुँचाना है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह तृतीय अनुपूरक बजट झारखंड के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। पंचायतें परिवर्तन की धुरी बनेंगी और सशक्त ग्रामीण समाज राज्य के उज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा।
राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आउटसोर्सिंग कर्मियों के मानदेय से जुड़ा मुद्दा जोरदार तरीके से सदन में उठा। विभिन्न दलों के विधायकों ने इस विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को उनका पूरा मानदेय नहीं मिल पा रहा है।
चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि कई मामलों में एजेंसियों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक कमीशन काट लिया जाता है, जिसके कारण कर्मचारियों को वास्तविक भुगतान का लाभ नहीं मिल पाता। मंत्री ने कहा कि सरकार इस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम उठाने जा रही है।
सरकार ने घोषणा की है कि अब आउटसोर्सिंग एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। निर्धारित कमीशन की सीमा तय की जाएगी और शेष पूरी राशि सीधे कर्मचारियों के खाते में हस्तांतरित करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके लिए एक सशक्त निगरानी तंत्र भी विकसित किया जाएगा ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली सभी नियुक्तियों में राज्य की आरक्षण नीति का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय और समान अवसर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर आरक्षण प्रावधानों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार की इस घोषणा के बाद आउटसोर्सिंग कर्मियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। लंबे समय से मानदेय में कटौती और अनियमितताओं को लेकर शिकायतें उठती रही हैं। यदि घोषित नियम प्रभावी ढंग से लागू होते हैं तो हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिल सकता है।
