लीजिये अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कार्यांजलि भी देख लीजिये…

झूठ बोलना, नये-नये शब्दों को ईजाद कर जनता को बेवकूफ बनाने की कला किसी को सीखनी है, तो बस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भाषणों और उनके द्वारा लिखे आलेखों को पढ़ लीजिये, आपको बेवकूफ बनने-बनाने के लिए कहीं और जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। नये – नये शब्दों और वाक्यांशों को ईजाद कर जनता को बरगलाने के बाद उसे जुमला कहकर पल्ला झाड़ लेने की कला में अमित शाह को महारत हासिल है।

झूठ बोलना, बात बनाना, नये-नये शब्दों को ईजाद कर अपने कार्यकर्ताओं को बरगलाना और जनता को बेवकूफ बनाने की कला किसी को सीखनी है, तो बस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भाषणों और उनके द्वारा लिखे आलेखों को पढ़ लीजिये, आपको बेवकूफ बनने-बनाने के लिए कहीं और जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। नये – नये शब्दों और वाक्यांशों को ईजाद कर जनता को बरगलाने के बाद उन शब्दों को, उन वाक्याशों को बाद में जुमला कहकर पल्ला झाड़ लेने की कला में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को महारत हासिल है।

फिलहाल उन्होंने एक नये शब्द को ईजाद किया है। वह शब्द है – कार्यांजलि। ये कार्यांजलि क्या होता है भाई? पुष्पांजलि, श्रद्धांजलि, भावांजलि, अश्रुपूरित श्रद्धांजलि आदि शब्द तो मैंने सुना था और अब कार्यांजलि शब्द सुन रहा हूं।

इधर, जनाब अमित शाह ने बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू को याद किया है। उन्होंने उलिहातू के याद के क्रम में अपने प्रिय मुख्यमंत्री रघुवर दास की जमकर तारीफ की हैं, भला ये तारीफ करें भी क्यों नहीं? ये सीएम रघुवर दास ही तो है, जिन्होंने रांची में उनका शाही स्वागत किया। करोड़ों रुपये केवल स्वागत में फूंक दिये। नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अखबारों-चैनलों के मालिकों व संपादकों की उनके सामने परेड करा दी और सभी अमित शाह के साथ सेल्फी लेने के लिए नाक रगड़ते नजर आये, तो वे ऐसे में सीएम रघुवर दास की तारीफ क्यों न करें?

जनाब अमित शाह ने अपने ब्लॉग मे लिखा है कि झारखण्ड सरकार ने शहीदों की जन्मभूमि रही उलिहातू जैसे 19 गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए शहीद ग्राम विकास योजना बनायी है। इसके अतिरिक्त इन गांवों को बिजली, पानी, सड़क पक्का आवास, स्वास्थ्य केन्द्र इत्यादि जैसे मूलभूत आवश्यकताओं को आदर्श रुप से विकसित किया जायेगा। मेरा मानना है कि झारखण्ड सरकार ने पूर्व में पारंपरिक रुप से शहीदों को दी जानेवाली पुष्पांजलि को विकास का रंग देकर इसे कार्यांजलि में बदल दिया है।

भाई नेता, नेता होता है, वह क्या बोलता है? क्या करता है? इस पर आज से ही नहीं, जब से देश स्वतंत्र हुआ है,  कुछ चरित्रवान नेताओं को छोड़कर, सभी को जनता, उनकी हरकतों के कारण, संदेह की नजरों से देखा करती रही है, क्योंकि वह जो बोलता है, वह करता नहीं है और जो नहीं बोलता है, वही करता रहता है तथा अपने परिवार तथा इष्टमित्रों के लिए आम जनता को भी दांव पर लगा देता है।

जरा उदाहरण देखिये, जिस उलिहातू का संदर्भ देकर कार्यांजलि शब्द का प्रयोग भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कर रहे हैं और सीएम रघुवर दास की तारीफ के पुल बांध रहे हैं। ठीक उसी जगह आज से ठीक एक साल पहले 13 अगस्त 2016 को केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे थे। जहां मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि इस गांव के सभी 71 मकान पक्के करा दिये जायेंगे। जरा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बताये कि क्या वे सभी 71 मकान को पक्का कर दिया गया?  अगर नहीं किया गया तो फिर ये कैसी कार्यांजलि हैं भाई?  ये कैसी कार्यांजलि हैं, जो बोलकर भी नहीं पूरा किया जाता।

आदर्श ग्राम का मतलब क्या होता है?  केवल बयानबाजी? केवल लफ्फाजी? मजाक बना कर रख दिया, भाजपा नेताओं ने। अगर यहीं स्थिति रहीं तो भाजपा के नेता अमित शाह जान लें, कि 2019 के चुनाव में, खासकर झारखण्ड में भाजपा का नाम लेनेवाला कोई नहीं होगा। जो खेल झारखण्ड में सीएम रघुवर दास कर रहे हैं, उनके इस खेल से न तो भाजपा के कार्यकर्ता खुश हैं और न ही यहां की जनता। ऐसे में आप किस घमंड में, नये-नये शब्दों का ईजाद कर रहे हैं, हमें नहीं मालूम। अभी भी वक्त है, सत्य को स्वीकार करिये और लोगों को नये-नये शब्दों से उल्लू बनाने का काम बंद करिये।

Krishna Bihari Mishra

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