मेलबॉर्न से “जोहार”: दीपोत्सव 2026 में छाया झारखंड का आदिवासी नृत्य, आठ कलाकारों ने बिखेरी झारखंडी संस्कृति की छटा, विक्टोरिया के सांसद डेविड साउथविक ने मंच पर टीम के साथ तस्वीरें खिंचवाईं
ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न शहर स्थित ग्लेन आयरा टाउन हॉल में शनिवार को झारखंडी संस्कृति की झलक दिखी। बिहार-झारखंड सभा मेलबॉर्न-विक्टोरिया (बीजेएसएम-वीआइसी) द्वारा आयोजित दीपावली उत्सव “दीपोत्सव 2026” में आठ कलाकारों के दल ने झारखंडी आदिवासी लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।
नृत्य में रोहित कुमार, अनामिका कुमार, प्रिया, संदीप चटर्जी, अबीरा बनर्जी, रमेश प्रसाद, माधुरी और सुधांशु शेखर ने भाग लिया। एक ताल, एक लय में थिरकते कदमों ने सामूहिकता, प्रकृति और एकता का वह संदेश दिया जो झारखंड की आदिवासी परंपरा की आत्मा है। पूरा हॉल “जोहार” के स्वर और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
प्रस्तुति के बाद विक्टोरिया संसद में कॉलफ़ील्ड के सांसद और विपक्ष के उपनेता डेविड साउथविक ने मंच पर आकर कलाकारों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। यह प्रस्तुति 15 नवंबर को आने वाले झारखंड स्थापना दिवस से ठीक पहले हुई। गौरतलब है कि इस वर्ष झारखंड राज्य के गठन के 26 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
दीपोत्सव 2026 की थीम थी “घर से घर तक”। कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना से हुई, जिसके बाद तीन घंटे तक बिहार-झारखंड के समुदाय के कलाकारों ने 21 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इनमें गणेश वंदना, रामायण नृत्य नाटिका, राम दरबार झांकी, बच्चों द्वारा छठ गीत, कजरी और समदाउन सहित मिथिला के लोकगीत, भोजपुरी नृत्य और कथक के साथ भव्य समापन शामिल रहे।
इस अवसर पर बीजेएसएम -विक्टोरिया के अध्यक्ष राजीव लाल ने कहा, “हमारे समुदाय में बिहार और झारखंड के हर कोने से परिवार जुड़े हैं। यह ज़रूरी था कि मंच पर झारखंड को भी उसका अपना खास पल मिले, और दर्शकों की प्रतिक्रिया ने दिखाया कि यह सबके लिए कितना खास था।” नृत्य दल के सदस्य रमेश प्रसाद ने कहा, “अपने घर से हज़ारों किलोमीटर दूर, अपने समुदाय के साथियों के साथ झारखंड का नृत्य प्रस्तुत करना गर्व का पल था। हम चाहते हैं कि यहां की नई पीढ़ी भी झारखंड की संस्कृति से जुड़ाव महसूस करे।”
बीजेएसएम विक्टोरिया के बारे में: बिहार झारखंड सभा मेलबर्न (BJSM VIC Inc.) मेलबर्न और पूरे विक्टोरिया में बसे बिहार और झारखंड के लोगों को एक साथ जोड़ने वाली सामुदायिक संस्था है। सभा दीपावली और छठ समेत दोनों राज्यों के पर्व, भाषाएं और परंपराएं मनाती है, नए आए परिवारों को ऑस्ट्रेलिया में बसने और जुड़ने में मदद करती है और बच्चों व युवाओं में अपनी विरासत के प्रति गर्व जगाती है।
