सिल्ली-गोमिया की जनता ने CM रघुवर और निर्लज्ज पत्रकारों को धूल चटाया, हेमन्त बने महानायक

सिल्ली और गोमिया विधानसभा क्षेत्र की जनता ने अपना फैसला सुना दिया हैं। अपने फैसले में गोमिया की जनता ने झामुमो प्रत्याशी बबीता देवी को और सिल्ली की जनता ने झामुमो प्रत्याशी सीमा महतो को अपना जनप्रतिनिधि चुन लिया है, यानी सिल्ली और गोमिया की जनता ने मुख्यमंत्री रघुवर दास, आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो और घटियास्तर के संपादकों-पत्रकारों को बता दिया कि आप चुनाव जीतने-जीतवाने के लिए, जितने भी हथकंडे अपना लो,

सिल्ली और गोमिया विधानसभा क्षेत्र की जनता ने अपना फैसला सुना दिया हैं। अपने फैसले में गोमिया की जनता ने झामुमो प्रत्याशी बबीता देवी को और सिल्ली की जनता ने झामुमो प्रत्याशी सीमा महतो को अपना जनप्रतिनिधि चुन लिया है, यानी सिल्ली और गोमिया की जनता ने मुख्यमंत्री रघुवर दास, आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो और घटियास्तर के संपादकों-पत्रकारों को बता दिया कि आप चुनाव जीतने-जीतवाने के लिए, जितने भी हथकंडे अपना लो, अगर जनता ने निर्णय ले लिया कि आपको धूल चटाना है तो वह धूल चटा कर रहेगी।

सिल्ली से झामुमो प्रत्याशी सीमा महतो ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को 13,500 मतों से करारी शिकस्त दी, वहीं गोमिया विधानसभा से झामुमो प्रत्याशी बबीता महतो ने भाजपा प्रत्याशी माधव लाल सिंह को 1344 मतों से हराया। सिल्ली और गोमिया की जनता ने भाजपा-आजसू गठबंधन को धूल चटाकर यानी हार का स्वाद चखाकर बता दिया कि उन्हें कनफूंकवों की सरकार पर विश्वास नहीं, सीएम रघुवर दास के विकास रुपी खोखले नारे पर विश्वास नहीं, उसके द्वारा किये जा रहे किसी भी वायदे पर विश्वास नहीं, अगर विश्वास है तो सिर्फ और सिर्फ विपक्ष के महागठबंधन पर, उसके नेता हेमन्त सोरेन पर, जिन्होंने जनता के हृदय में यह विश्वास बंधाया है कि उनकी पार्टी राज्य में बेहतर माहौल बनायेगी और राज्य को एक नई दिशा देगी।

याद करिये, राज्य के कुछ अखबारों व चैनलों के संपादकों-पत्रकारों का समूह, सिल्ली में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की जीत की बिरदावली गाने में व्यस्त था, एक संपादक ने तो यहां तक लिख दिया था कि सुदेश के साथ दौड़ने लगी सिल्ली, एक चैनल के पत्रकार ने तो सिल्ली और गोमिया की दोनों सीटों पर सुदेश महतो की पार्टी की जीत का ऐलान कर दिया था, यानी सुदेश और रघुवर के नाम का मंगलसूत्र धारण कर रांची के कुछ पत्रकारों ने पत्रकारिता की धज्जियां उड़ा दी और जनता की भावनाओं को नजरंदाज कर दिया।

कुछ पत्रकारों ने तो गोमिया में भाजपा की जीत की पहले से ही भविष्यवाणी कर दी थी, ये पत्रकार रघुवर दास के विकास की नारा के आगे लोट-पोट हो रहे थे, मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा के संगठन मंत्री ने तो अपनी टीम के साथ गोमिया सीट जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, पूरे प्रशासन को भाजपा को जीत दिलाने के लिए झोंक दिया था, उधर आजसू ने भी यहां जीत दर्ज करने के लिए खूब पैसे बहाएं, पर हुआ वहीं जो गोमिया की जनता ने चाहा, जनता ने सीएम रघुवर दास एवं उनकी पूरी टीम को हराकर बता दिया कि आनेवाले 2019 में भाजपा झारखण्ड से जाने के लिए,अभी से ही बोरिया-बिस्तर बांधने की तैयारी कर लें।

कहने का तात्पर्य है कि जनता के निर्णयों को भी पूरी तरह से उलटने की तैयारी इन अखबारों व चैनलों के संपादकों-पत्रकारों ने कर ली थी, कुछ चैनलों के पत्रकार तो आज जनता का फैसला आने के बावजुद सिल्ली में सुदेश को जीताने के लिए, लाइभ में रोये जा रहे थे, यानी सुदेश भक्ति और रघुवर भक्ति में डूबे ये संपादकों व पत्रकारो का समूह किस प्रकार जनता के साथ गद्दारी कर रहा है, वह सभी के सामने था।

अब सवाल झामुमो के जीत और भाजपा आजसू के हार के कारण –

  • भाजपा और आजसू दोनों ने जनता का विश्वास खो दिया हैं।
  • भाजपा और आजसू द्वारा विकास के नाम पर किये जा रहे वायदे पर जनता को विश्वास नहीं।
  • विकास के नाम पर राज्य की जनता को लग रहा है कि केवल हाथी उड़ाया जा रहा है।
  • राज्य की जनता के प्रति जिम्मेदार न होकर, केवल झूठे विज्ञापनों के सहारे व उपहार देकर संपादकों-पत्रकारों को अपने आगे नतमस्तक कराने की प्रवृत्ति और ऐसे संपादकों-पत्रकारों का इन नेताओं के प्रति समर्पण का बढ़ना।
  • राज्य में लूट, अपहरण, बलात्कार का बढ़ना, रोजगार पर संकट और पलायन को होना जारी।
  • हेमन्त सोरेन द्वारा राज्य सरकार की गलत नीतियों का शानदार ढंग से विरोध करना और उन गलत नीतियों को जनता के बीच रखना।
  • हेमन्त सोरेन द्वारा विपक्ष के नेताओं को सम्मान देना तथा उनके साथ मिलकर एक नया विकल्प झारखण्ड में देने की कोशिश करना।
  • जन आकांक्षाओं के प्रति जागरुक रहना तथा जनता से सीधे संपर्क बनाए रखना।
  • अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़ाना तथा उनसे बेहतर संबंध स्थापित करना, जबकि भाजपा में ऐसी बातें देखने को नहीं मिलता, यहां तो सीएम रघुवर दास अपने कार्यकर्ताओं को ही गंदी नजरों से देखता है, जिस कारण भाजपा के ही कई समर्पित कार्यकर्ता चाहते थे कि दोनों सीटों पर झामुमो की जीत हो जाये और हुआ भी वहीं, यानी हेमन्त बने महानायक और रघुवर बन गये जीरो।

गोमिया और सिल्ली की जनता ने इस फैसले से एक निर्णय भी सुना दिया कि अगर विपक्ष एक रहा तो वह भाजपा-आजसू को पानी पिला देगा और एक नहीं रहा तो परिणाम नगर निकाय चुनाव जैसा होगा, ये बातें संपूर्ण विपक्ष को गांठ बांध लेना चाहिए यानी एकता में ही बल है। भाजपा एंड आजसू को झारखण्ड में धूल चटाना है तो एकता के स्वर के गीत गाने ही होंगे।

सिल्ली में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के लिए हमारा एक ही सुझाव होगा, कि वे जो चिरकुट पत्रकारों की टीम बनाकर जो चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे हैं और जो ये चिरकुट पत्रकार उनसे मुंहमांगी रकम लेकर, उनकी स्तुति गा रहे हैं, दरअसल ये चिरकुट पत्रकार उनकी पुरी राजनीति की इतिश्री कर देंगे, इसलिए मेरा सुझाव होगा कि वे सीधे अभी से ही जनता से जुड़े रहे, जनता से संपर्क में रहे, हो सके तो नाराज जनता से क्षमा मांग ले, कि आखिर क्या वजह रही कि उन्हें लगातार दो-दो बार हार का सामना करना पड़ा।

और रांची के चैनलों-अखबारों के निर्लज्ज संपादकों-पत्रकारों, जो आज मतगणना के दिन भी सुदेश भक्ति और रघुवर भक्ति में लगे थे, उनसे हमारा अनुरोध है कि आप इसी तरह अपनी पत्रकारिता को लगाये रखे, आपको इस प्रकार की पत्रकारिता करने का ईश्वर बहुत अच्छा परिणाम देगा, क्योंकि जो आप कर रहे हैं, उसे ईश्वर देख रहा है, और अंत में उन पत्रकारों को मेरा हृदय से प्रणाम, जो आज भी अपनी जमीर नहीं बेचे, सच्ची पत्रकारिता की, अंततः हेमन्त सोरेन और संपूर्ण विपक्ष को दिल से बधाई, आपने अच्छी मेहनत की, और परिणाम आपके सामने है।

Krishna Bihari Mishra

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Thu May 31 , 2018
सिल्ली व गोमिया में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने शानदार जीत हासिल की है। सिल्ली में जहां उन्होंने आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को मात दी, वहीं गोमिया में रघुवर दास के चक्रव्यूह को तोड़ा ही नहीं, बल्कि उनके प्रत्याशी को तीसरे नंबर पर धकेलवा दिया। इस उपचुनाव में महानायक के रुप में उभरे नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने एक तरह से दिखला दिया कि कोई नहीं है, उनके टक्कर में, क्यों पड़े हो चक्कर में।

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