झामुमो ने कहा – राज्य की जनता को गुमराह करने का ठेका ले रखा है, बाबू लाल मरांडी ने

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राज्य की जनता को गुमराह करने का ठेका ले रखे हैं, नये-नये भाजपा नेता बने बाबू लाल मरांडी। ये आरोप है, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य का। सुप्रियो भट्टाचार्य ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि हेमन्त सोरेन के नेतृत्ववाली कैबिनेट द्वारा गत 18 अगस्त को सात लौह अयस्क खदान को सरकारी उपक्रम झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड के लिए आरक्षित किये जाने के ऐतिहासिक फैसले पर आपत्ति दर्ज करानेवाले बाबू लाल मरांडी को यह बताना चाहिए कि लगभग साल भर पहले जब वे झारखण्ड विकास मोर्चा के अध्यक्ष हुआ करते थे, उस वक्त इन्हीं सात लौह अयस्क खदान के अनुज्ञप्तिधारियों के खिलाफ किस भाषा का प्रयोग करते थे, एवं रघुवर राज में इनको पहुंचाये गये फायदे के खिलाफ क्यों बोलते रहे?

सुप्रियो भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के उपक्रम पीटीएस को पिछले रघुवर सरकार ने भारत सरकार के उपक्रम एनटीपीसी को हस्तातंरित करने का काम किया, तब उन्होंने रघुवर दास के इस निर्णय के विरोध में क्या-क्या कहा था? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार तथा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के सरकार के संयुक्त प्रयास से जब अडानी पावर लिमिटेड को गोड्डा में जमीन, कोयला खदान एवं जल संसाधन मुहैया कराकर उत्पादित संपूर्ण बिजली को अडानी समूह को प्रत्यक्ष तौर पर फायदा पहुंचाकर बांगलादेश को बेचने का जो निर्णय लिया गया एवं राज्य को इसमें एक यूनिट बिजली भी प्राप्त नहीं होने का निर्णय लिया गया, तब बाबू लाल मरांडी ने क्या कहा था?

झामुमो नेता ने कहा कि उपरोक्त तीन तथ्यों के आधार पर पूर्व की भांति बाबू लाल मरांडी बताएं कि ऐसा कौन सा अजूबा हुआ या परिस्थितियों का निर्माण हुआ, जब उनको लगने लगा कि राज्य सरकार के उपक्रम सक्षम नहीं है और इससे राज्य की आत्मनिर्भरता पर संदेह है? ऐसा क्या हुआ, जिन लौह अयस्क समूह के खिलाफ बाबू लाल गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाते रहे थे, वहीं अब अप्रत्यक्ष तौर पर उनकी पैरवी करने लगे?

क्या राज्य सरकार के उपक्रम को संसाधनों से परिपूर्ण करना राज्य सरकार का दायित्व नहीं बनता है? इससे प्रत्यक्ष तौर पर झारखण्ड के मूलवासी-आदिवासी लोगों को रोजगार मिलेगा एवं राज्य का खजाना राज्य में ही सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि बाबू लाल मरांडी को चाहिए कि वे अपने नये दल भाजपा के नेतृत्व को यह समझाए कि सरकारी उपक्रम की मजबूती से राष्ट्र की आर्थिक शक्ति मजबूत होती है एवं राष्ट्र का स्वाभिमान भी जागृत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे नौ सौ चूहे खाकर, बिल्ली चली हज को, वाली कहावत को यहां चरितार्थ न करें।

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