गैर कानूनी ढंग से छपवा रहे झारखण्ड के सीएम रघुवर दास “झारखण्ड बढ़ते कदम…”

पिछले कई सालों से अवैध रुप से प्रकाशित हो रहा है, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, झारखण्ड की ओर से मासिक पत्रिका – झारखण्ड बढ़ते कदम। आश्चर्य इस बात की है कि यही काम अगर कोई दूसरा करे, तो उसे आरएनआई के नियमों को तोड़ने तथा अवैध रुप से प्रकाशन करने के जूर्म में उसे कानूनी रुप से दंडित भी किया जा सकता है, कितने लोग अवैध प्रकाशन के जूर्म में जेल भी जा चुके हैं, पर दाद देनी होगी, झारखण्ड के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को, जो पिछले कई सालों से इस पत्रिका का प्रकाशन कर रखा है, वह भी बिना आरएनआई नंबर प्राप्त किये, पर किसी को दंडित नहीं किया गया, जबकि यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री रघुवर दास संभाल रहे हैं।

जरा देखिये, ताजा अंक आपके सामने है। इस पत्रिका के संरक्षक स्वयं मुख्यमंत्री रघुवर दास है, जबकि प्रधान सम्पादक सुनील कुमार बर्णवाल है। इस पत्रिका के संपादक राम लखन प्रसाद गुप्ता है, जो सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक है। यह पत्रिका सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, हर माह प्रकाशित करती है, जिसमें वामपंथियों की जमात के लेख छपे होते हैं, जो सड़कों तथा अपने सोशल साइट पर नरेन्द्र मोदी सरकार की धूआं छुड़ा रही होती है, और इस पत्रिका में रघुवर दास की आरती उतार रही होती है, क्योंकि इसके बदले में इन्हें आर्थिक मदद मिलती रहती है, जिससे इनका कारोबार चल रहा होता है।

ये इतने चालाक लोग है कि वे अपनी महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए ब्राह्मणवाद के नाम पर ब्राह्मणों को भला-बुरा कहते तथा सीएम रघुवर दास द्वारा किये जा रहे गलत कार्यों की खुलकर जय-जय करते रहते हैं, और दूसरी ओर वामपथियों या भाजपा के विरोधी दलों को खुलकर मदद भी करते हैं, यानी एक ही काम का दोहरा लाभ किसी को सीखना है, तो इनसे सीखे, वह भी जातिवाद के नाम पर।

इन दिनों, ऐसे लोगों की खुब निकल पड़ी हैं, चूंकि फिलहाल झारखण्ड में एक जाति का वर्चस्व खुलकर चल पड़ा हैं, तो उसका असर इस पत्रिका पर भी दिखाई पड़ रहा है।

अब सवाल उठता है कि क्या आरएनआई के रजिस्ट्रार, अवैध रुप से झारखण्ड बढ़ते कदम पत्रिका के संरक्षक झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास, प्रधान संपादक सुनील कुमार बर्णवाल जो मुख्यमंत्री के प्रभारी प्रधान सचिव भी है, तथा निदेशक व संपादक राम लखन प्रसाद गुप्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी, या लोग ऐसे ही अवैध रुप से इस पत्रिका का प्रकाशन होता देखते रहेंगे।