राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के खिलाफ झारखण्ड के पत्रकारों का फूटा गुस्सा, कई जगहों पर पत्रकार सड़क पर उतरें तो कई प्रेस क्लबों पर मंत्री के खिलाफ हुए प्रदर्शन
झारखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के खिलाफ राज्य के पत्रकारों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। राज्य के विभिन्न जिलों में पत्रकारों का समूह सड़कों पर उतरा और अपनी नाराजगी व्यक्त की। राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित प्रेस क्लबों में भी पत्रकारों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया और मंत्री के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किये।
बताया जा रहा है कि चतरा, खूंटी, हजारीबाग, डालटनगंज आदि इलाकों में पत्रकार सड़कों पर उतरें और मंत्री इरफान अंसारी के खिलाफ नारे लगाये। ज्ञातव्य है कि हजारीबाग में मंत्री इरफान अंसारी से जब एक पत्रकार ने कुछ सवाल पूछे तो उनके सामने ही उनके समर्थकों ने उक्त पत्रकार की मॉब लिंचिंग कर दी थी। लेकिन उक्त पत्रकार को बचाने के लिए इरफान ने कुछ भी नहीं किया।
उलटे जब कुछ पत्रकारों ने हजारीबाग से अन्यत्र स्थान पर इस संबंध में उनकी राय लेनी चाही तो मंत्री ने पत्रकारों का गुस्सा यह कहकर और भड़का दिया कि पत्रकारों की दुकानदारी उनके ही कारण चलती है। उनके चैनल की टीआरपी उन्हीं से हैं। हालांकि देखने में आ रहा है कि मंत्री के कुछ समर्थक मंत्री के पक्ष में खुब पत्रकारों की पोस्ट पर अनाप-शनाप लिख रहे हैं। जिससे पत्रकारों का गुस्सा और भड़क रहा है।
इधर राजधानी रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर पत्रकारों से जुड़ी एक संस्था ने मंत्री इरफान अंसारी के खिलाफ प्रदर्शन किया। रांची प्रेस क्लब में मात्र 40-50 की संख्या में आये पत्रकारों ने प्रदर्शन किया, जो रांची प्रेस क्लब की दयनीय दशा को प्रतिबिंबित कर रही थी। यहीं नहीं, रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष ने कल यानी मंगलवार को इरफान का ब्लैक कलर में फोटो लगा कर इरफान अंसारी माफी मांगो, मीडिया पर हमला बर्दाश्त नहीं नामक प्रोफाइल सभी पत्रकारों से लगाने की अपील की।
लेकिन गिने-चुने पत्रकारों के सोशल साइट पर ही वे प्रोफाइल दिखे। आश्चर्य यह भी है कि जिस रांची प्रेस क्लब में सदस्यों की संख्या 1100 के करीब है। उनमें भी इस आंदोलन व उक्त प्रोफाइल को लगाने की कूबत नहीं दिखी। जो पत्रकार रांची प्रेस क्लब में धरना दे रहे थे। जिसमें एक प्रभात खबर के संपादक भी थे। उनके सोशल साइट पर भी यह प्रोफाइल विद्रोही24 को देखने को नहीं मिली। कई लोगों का यह भी कहना था कि इरफान अंसारी के यहां रांची का कौन पत्रकार परिक्रमा नहीं लगाता और ये परिक्रमा लगानेवाले पत्रकार आंदोलन करें या धरना प्रदर्शन करें। उसे क्या फर्क पड़ता है?
इसी बीच युवा पत्रकार संजय रंजन ने सोशल साइट पर यह बात लिखकर आक्रोश व्यक्त किया कि राहुल गांधी संविधान की बात करते हैं, न्याय की बात करते हैं. लेकिन इसके उलट, उनका गुंडा मिज़ाज मंत्री अपने समर्थकों से अन्याय कराता है। मंत्री की गुंडई से भी ज्यादा शर्मनाक कांग्रेस पार्टी की चुप्पी है। पत्रकार की पिटाई हुए 24 घंटे से अधिक समय बीत चुका है। राज्यभर के पत्रकार मंत्री की गुंडागर्दी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। रांची प्रेस क्लब ने भी इस घटना के खिलाफ आवाज़ उठाई है, लेकिन कांग्रेस पार्टी को जैसे लकवा मार गया है। कांग्रेस पार्टी में किसी की रीढ़ इतनी भी सीधी नहीं है कि सामने आकर अपने बिगड़ैल मंत्री पर लगाम लगाने की कोशिश करे और ये संविधान बचाएंगे। शर्मनाक।
