अपनी बात

वाह रे, झारखण्ड का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग

वाह रे अधिकारी,

वाह रे झारखण्ड का आइपीआरडी,

वाह रे मुख्यमंत्री का विभाग,

वाह रे विज्ञापन बनानेवाले

और

वाह रे विज्ञापन प्रकाशित करनेवाले नमूने…

झारखण्ड सरकार ने विगत 13 जून को कैबिनेट से पास कर दिया कि मात्र एक रुपये में 50 लाख तक की संपत्ति की रजिस्ट्री राज्य की महिलाएं अपने नाम करा सकती है, इस दस्तावेज पर निबंधन शुल्क भी देय नहीं होगा। संपत्ति का मूल्य 50 लाख से अधिक होने पर उपरोक्त राशि पर मुद्रांक व निबंधन शुल्क लगेगा। महिला-पुरुष के संयुक्त क्रेता होने पर छूट मान्य नहीं होगी। एक बार की खरीद पर ही यह छूट महिलाओं को प्राप्त होगी।

सूत्र बताते है, कि यह कार्य प्रारंभ भी हो चुका है, राज्य की महिलाओं ने इसका लाभ भी लेना शुरु कर दिया है, और इसके लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास की जमकर प्रशंसा भी की है, साथ ही इसे महिला सशक्तिकरण के लिए उठाया गया सशक्त कदम भी बताया। जिसकी खबर भी कई समाचार पत्रों ने प्रकाशित कर दी, पर आश्चर्य इस बात की है कि राज्य के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को इसकी जानकारी ही नहीं है, जानकारी होगी भी कैसे, भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे इस विभाग के अधिकारियों को मुख्यमंत्री रघुवर दास के इमेज चमकाने से मतलब थोड़े ही है, ये तो कनफूंकवे के इशारे पर काम करते है, और वे सारे काम करते है, जो उन्हें नहीं करना चाहिए, जिसका परिणाम आज का अखबार देखिये।

जो काम प्रारंभ है, उसे भविष्य में होनेवाला बता दिया

सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने एक विज्ञापन छापा है, जो राज्य के सभी अखबारों में आज छपा है, उस विज्ञापन को आप देखेंगे तो साफ पता चलेगा कि अभी एक रुपये में महिलाओं के नाम होनेवाली रजिस्ट्री का काम शुरु नहीं हुआ, बल्कि आनेवाले भविष्य में होगा। यहीं नहीं इसमें क्या-क्या लाभ सम्मिलित है, उस मिलनेवाले लाभ को भी भविष्य में होनेवाला लाभ बताया गया है, यानी जो काम प्रारम्भ है, उसे भविष्य में मिलनेवाली महिलाओं की सुविधा, स्वयं राज्य का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग बता रहा है, ये वह विभाग है, जिसके मंत्री भी स्वयं मुख्यमंत्री रघुवर दास है, अब समझ लीजिये, यहां काम कैसे हो रहा है?

रघुवर दास के कार्यों को बंटाधार करने में लगा आइपीआरडी

चूंकि मूर्खों की जमात, मुख्यमंत्री की ब्रांडिंग करने के लिए यहां के एक कनफूंकवां अधिकारी द्वारा बुलाया गया है, ये लोग हमेशा निदेशक के चैंबर में बैठकर, वो सारे कार्य करते है, जो नहीं करना चाहिए, और जहां इनका ध्यान होना चाहिए, वहां ध्यान न देकर ये मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यों का ही बंटाधार कर बैठते है, आज का विज्ञापन उसका  सबसे बड़ा प्रमाण है।

अब जरा सोचिये, जब मुख्यमंत्री के विभाग का यह हाल है, तो अन्य मंत्रियों के विभागों का क्या हाल होगा? समझते रहिये।