जीते जी अपने नाम का स्मारक या बस्ती बनाने की कला किसी को सीखनी है तो रघुवर से सीखे – सुबोध

वाह रे रघुवर जी, आम तौर पर लोग मरणोपरांत किसी का स्मारक या मृत व्यक्ति के सम्मान में नगर बसाते हैं, आप ने तो जीते जी अपने नाम का स्मारक बनवा दिया, जमशेदपुर में अपने नाम का नगर बसवा दिया, ये कमाल तो आपके ही दिवंगत नेता जैसे दीन दयाल उपाध्याय, डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी या जीवित लाल कृष्ण आडवाणी ने भी नहीं किया होगा, सचमुच आप महान है, आप तो अपने ही पार्टी के शीर्षस्थ नेताओं से कही ऊंचे हो गये, सचमुच आप प्रशंसनीय है, इतनी ऊंची सोच आपको ही मुबारक। ये बाते कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने आज संवाददाता सम्मेलन में व्यंग्यात्मक लहजे में कही।

ज्ञातव्य है कि जमशेदपुर में मुख्यमंत्री रघुवर दास के नाम पर एक रघुवर नगर ही बस गया है, जो पहले कभी दूसरे नाम से जानी जाती थी, लोग बताते है कि यह नामकरण रघुवर दास के सीएम बनने के बाद किया गया, पर रघुवर दास ने इसका प्रतिकार नहीं किया, शायद उन्हें लगता था कि यह गर्व का विषय है, सुबोध कांत सहाय की इस कड़ी टिप्पणी पर भी इनकी नींद टूटेगी, इसकी संभावना नहीं दिख रही, क्योंकि नींद उसकी टूटती है, जिनमें थोड़ा सा गैरत होता है, पर हमारे सीएम रघुवर दास इन सबसे उपर है।

सुबोध कांत सहाय ने कहा कि तीन साल पहले सीएम रघुवर दास का बयान आया था कि राज्य में 24 घंटे वे बिजली नहीं दे सकें तो वोट मांगने नहीं आयेंगे, पर देखिये इन्हें, आज भी वोट मांगने जा रहे है, अब इसे क्या कहा जाये। इनके प्रधानमंत्री मोदी ताल ठोककर कहते है कि उनके शासनकाल में देश के सभी हिस्सों/गांवों में बिजली पहुंच गई, पर सच्चाई यह है कि आज भी राजधानी रांची के कई मुहल्ले ऐसे हैं, जहां बिजली के खम्भे तक नहीं हैं, वहां बांस-बल्लियों का लोग सहारा ले रहे हैं, गढ़वा का कई गांव ऐसा है कि आज तक बिजली नहीं पहुंची हैं, पता नहीं किस माइक्रोस्कोप का सहारा लेकर, क्या देखकर पूरे झारखण्ड में बिजली पहुंच गई, इसकी घोषणा कर दी गई।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों तो पलामू में घटी नक्सली घटना ने देश के गृह मंत्री अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास, इन दोनों की पोल खोलकर रख दी, जो ये डंके की चोट पर कह रहे थे कि राज्य में नक्सलवाद खत्म हो गया, अब ये घटित घटनाएं बता देती है कि इनकी सरकार कितनी अक्लमंद हैं, दरअसल इन दोनों ने अपनी विश्वसनीयता जनता के सामने खो दी है, इन्हें किसी भी विषय पर बोलने का कोई हक ही नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इसी देश में प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अपने शासनकाल में नई दिल्ली में 1982 में नवम् एशियाई खेल करवाया, जिसका शुभंकर अप्पू हाथी था, पर उसे उड़ता हुआ नहीं दिखाया गया था, लेकिन जरा इस राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को देखिये, वह हाथी ही उड़ा देता है, और खुद कहता है कि वो भी उड़ रहा हैं, उसके साथ झारखण्ड भी उड़ रहा हैं, मतलब ये व्यक्ति क्या कहता हैं, उसे खुद भी नहीं पता।

उन्होंने कहा कि हर बात में ये कहनेवाले भाजपाई कि कांग्रेस ने 67 साल में क्या किया? उसका सही जवाब यहीं है कि कांग्रेस ने निजी संस्थाओं जैसे बैंकों, कोयला खानों आदि का सरकारीकरण किया, देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया और आप उन सारी संस्थाओं को बेच रहे हो, यानी हमने अपनाया और आपने पूंजीपतियों को थमाया, ये बुनियादी अंतर है कांग्रेस और भाजपा में, पर इन्हें शर्म नहीं आती।

आज बेरोजगारों के हालत पस्त है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। व्यवसायियों का व्यवसाय ठप है। खूंटी में पत्थलगड़ी के नाम पर हजारों युवाओं को झूठे केस में फंसा दिया गया है, संतोषी भात-भात कहकर चिल्लाते हुए दम तोड़ देती है, एक बलात्कार की शिकार बेटी का पिता सीएम से न्याय मांगने जाता है और उसके सम्मान से सीएम खेल जाते हैं, किससे कैसे बात करनी है? उसकी तमीज नहीं, सारा झारखण्ड को जिस व्यक्ति ने तमाशा बना दिया और वो कह रहा है कि हमें दुबारा सत्ता चाहिए, जनता इस बार सबक सिखायेंगी। ये कोई न भूलें।

उन्होंने महाराष्ट्र प्रकरण पर कहा कि जिस प्रकार महाराष्ट्र में संवैधानिक मूल्यों को ताक पर रखने का प्रयास किया गया, लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश की गई, वो बताता है कि आनेवाले समय में जितने दिन भाजपा केन्द्र में रहेगी, लोकतंत्र खतरे में रहेगा, इसलिए कांग्रेस पार्टी समय-समय पर जनता के बीच जाकर रचनात्मक विपक्ष की भूमिका अदा करेगी तथा जनता को गोलबंद करेगी, ताकि ये अंह में डूबी भाजपा सरकार को अंकुश लगाया जा सकें।