इससे अच्छा होता कि एनडी ग्रोवर को श्रद्धांजलि ही नहीं दी जाती, डीएवी समूह को इस पर ध्यान देना चाहिए

आज एन डी ग्रोवर से संबंधित एक फोटो व्हाट्सएप्प के माध्यम से जबर्दस्त रुप से वायरल हो रही है, जिसे देख उनके चाहनेवालों में काफी आक्रोश है। यह फोटो किस विद्यालय से संबंधित हैं और कहां का हैं? फोटो को देखने से पता नहीं चल रहा है। फोटो में एन डी ग्रोवर की तस्वीर को एक ईट के माध्यम से प्लास्टिक की कुर्सी पर ऐसे ही रख दिया गया है और बच्चे तथा कुछ लोग जो प्रथम दृष्टया शिक्षक-शिक्षिका मालूम पड़ रहे हैं, एनडी ग्रोवर को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि यह फोटो किसी डीएवी संस्थान का ही है। फोटो आज का है या पुराना पता नहीं चल पा रहा, पर ज्यादातर लोगों का कहना है कि यह फोटो आज का ही हैं, क्योंकि आज एनडी ग्रोवर की पुण्य तिथि है। लोगों की आपत्ति इस बात को लेकर हैं, कि जिन कर्मयोगी एनडी ग्रोवर ने अपने लगन व परिश्रम से पूरे पूर्वोतर भारत में डीएवी स्कूलों की लंबी लाइन खींच दी, स्वामी दयानन्द और वैदिक पद्धति को जन-जन तक सुलभ किया, उन महात्मा एनडी ग्रोवर को श्रद्धांजलि देने का जो तरीका लोगों ने अपनाया, वो बेहद ही शर्मनाक था।

आम तौर पर लोग जब अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देते हैं, तो वहां भी कम से कम एक चादर रख, दिवंगत व्यक्ति की तस्वीर को सम्मानपूर्वक रखते हैं, तब श्रद्धांजलि देते हैं पर यहां तो उन एनडी ग्रोवर को श्रद्धांजलि दी जा रही हैं, जिन्होंने पूर्वोत्तर भारत में 200 से भी अधिक डीएवी संस्थानों की नींव रखी, और वैदिक सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।

लेकिन आज उनकी पुण्य तिथि के अवसर पर उनकी तस्वीर को एक चादर भी मयस्सर नहीं हुई, उलटे उनके तस्वीर को एक ईट के सहारे रख दिया और फिर श्रद्धांजलि देने का काम शुरु हो गया, अब सवाल उठता है कि क्या अपने दिवंगतों तथा देश के लिए काम करनेवालों, शिक्षा का अलख जगानेवालों, भारतीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प करनेवालों की पुण्य तिथि इस प्रकार मनाई जाती है, ये तो डीएवी संस्थानों से जुड़े महान आत्माओं के समूह ही बेहतर बता सकते हैं, क्योंकि जो एनडी ग्रोवर को मरणोपरांत सम्मान नहीं दे सका, वो और किसी का क्या सम्मान करेगा?