लगता है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू पार्टी को ले डूबेंगे, इन्हें तो अपने ही नेता अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक भाषण के बारे में सही-सही पता नहीं हैं
भाई, जिस व्यक्ति को अपने ही नेता अर्थात् भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक भाषण का ठीक से अता-पता नहीं, उसे इस प्रदेश का अध्यक्ष किसने बना दिया? आखिर, वे प्रेस कांफ्रेस में इतनी आसानी से उटपुटांग बातें कैसे कर देते हैं? और उनके आस-पास बैठे भाजपा के अन्य नेता कैसे झेल लेते हैं? चलो उनका झेलना तो समझ में आता है, वहां बैठे प्रेस कांफ्रेस में संवाददाता कैसे थे? जिन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को टोका नहीं और उनसे उनके द्वारा दिये गये गलत संदेश पर सवाल नहीं किया?
और अब आइये बताते है विस्तार में, कि आखिर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने अपने प्रेस कांफ्रेस में आज क्या कहा? आदित्य साहू ने कहा कि ‘जिस दिन एक वोट से सरकार गिर रही थी तो उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था 40 वर्षों से सदन का सदस्य हूं, सदस्यों ने मेरा व्यवहार देखा है, सत्ता के लिए जोड़-तोड़ करने की बात आयेगी, तो ऐसी सत्ता को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करुंगा।’
जबकि सच्चाई क्या है? आदित्य साहू जिस समय के अटलजी की संवाद की बातें कर रहे हैं। वो समय था, 13 दिन चली अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार का। अटल जी ने तो उस वक्त किसी को वोट देने का मौका ही नहीं दिया था। तो ऐसे में एक वोट से सरकार गिरने की बात कहां से आ गई? उनका तो अंतिम वाक्यांश था, जो बता देता है कि वे क्या करने जा रहे हैं। आदित्य साहू को स्वयं देखना/पढ़ना चाहिये। मैं यहां उसे प्रस्तुत कर रहा हूं। अटलजी के उस समय सदन में अंतिम वाक्य इस प्रकार थे –
‘हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। हम अपने देश के सेवा कार्य में जुटे रहेंगे। हम संख्या बल के आगे सर झुकाते हैं और आपको विश्वास दिलाते हैं कि जो कार्य हमने अपने हाथ में लिया है, वो जब तक राष्ट्र उद्देश्य पूरा नही कर लेंगे, तब तक विश्राम से नहीं बैठेंगे, आराम से नहीं बैठेंगे। अध्यक्ष महोदय मैं अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को देने जा रहा हूं।’
यह कहकर, अटलजी सदन से निकल पड़े थे और उसी दिन शायद भारतवासियों ने संकल्प कर लिया कि अगली बार भारत के प्रधानमंत्री के पद पर अटल बिहारी वाजपेयी को बैठाकर रहेंगे। यह ऐतिहासिक भाषण था। ऐसा ऐतिहासिक भाषण जिसने राजनीति में शुचिता, स्वच्छता व निष्ठा को एक ऐसा पहचान दे गया। जिसकी चर्चा जब तक राजनीति रहेगी। चलती रहेगी। लोग कहेंगे कि कोई ऐसा व्यक्ति था, जिसने अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिए वोटिंग नहीं कराई, वो सत्ता को ठोकर मारकर, सदन से उठकर चल दिया।
खुद, आज के प्रेस कांफ्रेस में आदित्य साहू ने कहा कि वे अटल बिहारी वाजपेयी के पुत्रवत् समान है तो आदित्य साहू खुद बताएं कि उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के इस ऐतिहासिक वक्तव्य को प्रेस कांफ्रेस में कहने पर इतनी भारी गलती कैसे हो गई? आखिर जिसने उन्हें यह नोट बनाकर दिया। उसने उक्त वक्तव्य के बारे में सही बातें उनके सामने क्यों नहीं प्रस्तुत की। सच्चाई यही है कि अटल बिहारी वाजपेयी की दूसरी बार जब सरकार बनी थी, तब इनकी सरकार एक वोट से गिरी थी। लेकिन उस वक्त इस संवाद की चर्चा अटल बिहारी वाजपेयी ने नहीं की थी।
