धर्म

आपकी अवस्था क्या है, ये मायने नहीं रखता, आप भगवान का नाम जपते हैं या नहीं, जप-यज्ञ को जीवन में अपनाया या नहीं, ये सर्वाधिक महत्व रखता है – ब्रह्मचारी सच्चिदानन्द

आखिर हम योगदा सत्संग मठ में ईश्वर की खोज के लिए ही तो आते हैं। ऐसे में हमें यह तो मालूम होना ही चाहिए कि हम ईश्वर की खोज के लिए, उसे पाने के लिए हमारी साधना कैसी होनी चाहिए? उक्त बातें आज योगदा सत्संग मठ में आयोजित रविवारीय सत्संग को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारी सच्चिदानन्द ने कही। उन्होंने इस दौरान स्वामी भक्तानन्द से जुड़ी कई दृष्टान्त योगदा भक्तों के सामने प्रस्तुत किये और बताया कि साधना किसी के लिए भी कितना आवश्यक है।

ज्ञातव्य है कि स्वामी भक्तानन्द परमहंस योगानन्द जी के सम्पर्क में 1939 में आए थे। उन्होंने एक आदर्श संन्यासी की तरह जीवन व्यतीत किया। जिनके वक्तव्य और दृष्टांत से आज भी योगदा के संन्यासियों और भक्तों का समूह लाभान्वित होता रहा है। ब्रह्मचारी सच्चिदानन्द ने आज स्वामी भक्तानन्द के जीवन से संबंधित कई वक्तव्यों से योगदा भक्तों को यह समझाने की कोशिश की, कि मनुष्य के जीवन में जप का क्या महत्व है?

ब्रह्मचारी सच्चिदानन्द ने कहा कि संन्यासी वहीं हैं, जो सदैव ईश्वर का चिन्तन करता है। अगर कोई गृहस्थ भी सदैव ईश्वर का चिन्तन करता है। ईश्वर का नाम जपता रहता है तो उसका भी जीवन किसी संन्यासी से कम नहीं हैं। उन्होंने इस दौरान नारद और किसान की कथा सुनाई, कि कैसे किसान गृहस्थ होने के बावजूद हरिस्मरण को नहीं भूला, पर नारद को भगवान विष्णु ने एक काम दिया तो वे उस काम के कारण हरिस्मरण ही भूल गये।

ब्रह्मचारी सच्चिदानन्द ने कहा कि योगदा की गुरु परम्परा में तो कई ऐसे भी गुरु है, जिन्होंने गृहस्थ में कदम ही नहीं रखा, पर लाहिड़ी महाशय जैसे गुरु भी है जो गृहस्थ में रहते हुए भी ईश्वर का चिन्तन करना नहीं भूले और ईश्वर को पा भी लिया। उन्होंने कहा कि आपकी अवस्था क्या है? आप बच्चे हैं, युवा है, बुढ़े हैं। ये मायने नहीं रखता। मायने ये रखता है कि आपने ईश्वर के चिन्तन में, ईश्वर को स्मरण करने में कितना समय दिया। उन्होंने महान संत तुकाराम का स्मरण दिलाया और कहा कि आप संत तुकाराम के जीवन से सीखिये कि भगवान का नाम जप जीवन में कितना बड़ा स्थान रखता है?

उन्होंने कहा कि जप योग, ईश्वर की उपलब्धि का अभ्यास कराने का सर्वोत्तम माध्यम है। भक्तानन्द बराबर कहा करते थे कि जो गहराई से ध्यान करते हैं, उन्हें ईश्वर जल्द मिलते हैं, पर यह भी सच्चाई है कि जो निरन्तर भगवान नाम का जप करते हैं, उन्हें भी ईश्वर शीघ्रता से प्राप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि पतंजलि कहा करते थे – योगश्चितवृति निरोधः। दरअसल मन, बुद्धि और अहंकार ही तो चित्त हैं, जिस पर अंकुश लगाने की बात कही जाती है और इस पर अंकुश लगाने का सबसे अच्छा तरीका है। प्रभु नाम का बारम्बार स्मरण।

उन्होंने कहा कि जप योग ईश्वर को पाने का सर्वोत्तम अभ्यास है। जप करने से शरीर हल्का होता है। स्वास्थ्य ठीक रहता है। आप जप करिये तो, आप स्वयं पायेंगे कि आपका आभामंडल बदल गया। उन्होने कहा कि भक्तानन्दजी बराबर कहा करते थे कि गुरुजी कभी नहीं ये कहते कि ऐसा करने से ऐसा हो जायेगा, वे तो सिर्फ ये कहते थे कि तुम्हें यह करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप 24 घंटे प्रभु का नाम तो जपे, देखे आपको फायदा मिलता है या नहीं।

उन्होंने कहा कि प्रभु के नाम जप का तो तीन दिनों में परिणाम ही मिल जाता है। जब तीन दिनों में परिणाम मिल जाये तो तीन वर्षों तक प्रभुनाम का जप तो अवश्य करें। जप करने के साथ-साथ, जिनका आप नाम जप कर रहे हैं, उनका ध्यान भी करें। हालांकि आपको शुरुआत में नामजप करने से विरक्ति सा महसूस होगा, आप ड्राई महसूस करेंगे। लेकिन जान लीजिये कि आखिरकार प्रभु के पास जाने का या उन्हें पाने का रास्ता यहीं से होकर निकलता है, इसका कोई दुसरा विकल्प नहीं है।

उन्होंने महाराष्ट्र के कई संतों का नाम लिया तथा मराठी भक्तों और वहां के लोगों के बारे में बताया कि वे आज भी भगवान का नाम जप में ज्यादा विश्वास करते हैं। वहां के लोग खुब भगवान का नाम जपते हैं। वहां के कई संतों ने भगवान का नाम लेने का सभी से आह्वान भी किया है। आप ये नहीं देखें कि भगवान का नाम लेने में रस मिल रहा है या नहीं, अथवा परिणाम मिल रहा है या नहीं, बस आप केवल नाम जप करते चले जाइये, उनका ध्यान करते चले जाइये। आप स्वयं को धन्य होता पायेंगे।

उन्होंने कहा कि आप इसे स्वीकार करें कि जप भी एक यज्ञ है। जो भी प्रभु का नाम आपको अच्छा लगे। जिन्हें आप चाहते हो। उनके नाम का जप करें। गुरु जी तो जीवन्त है। वे आपकी इसमें सहायता करेंगे, क्योंकि भक्तानन्द जी कहा करते थे कि गुरुजी यानी परमहंस योगानन्द जी जीवन्त शास्त्र थे। उन्होंने जो भी बताया शास्त्र के अनुकूल ही बताया। इसलिए गुरुजी सर्वव्यापी है। वे हमेशा अपने शिष्यों के साथ रहते हैं। वे हमेशा मदद को तैयार रहते हैं। आप बस जप करते रहिये।