मान लीजिये कि हम अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में भाग ले रहे हैं…

रांची के हरमू रोड स्थित दिगम्बर जैन भवन में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन चल रहा है। कहा जा रहा है कि यह पहला अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन है, जो रांची में आयोजित है। आयोजकों के अनुसार, देश-विदेश के बड़े-बड़े ज्योतिष रांची आये हुए है,

रांची के हरमू रोड स्थित दिगम्बर जैन भवन में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन चल रहा है। कहा जा रहा है कि यह पहला अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन है, जो रांची में आयोजित है। आयोजकों के अनुसार, देश-विदेश के बड़े-बड़े ज्योतिष रांची आये हुए है, और यहां ज्योतिषीय ज्ञान पर मंथन चल रहा है, पर मेरी आंखों ने एक भी विदेशी चेहरे नहीं देखे। हां देश के अंदर खद्योत समान यत्र-तत्र बिखरा ज्योतिषियों का समूह अवश्य दिखा। कहने को तो यहां जगदगुरु शंकराचार्य भी पहुंच गये थे, आप कहेंगे कि कहां के शंकराचार्य? आम तौर पर सारे देश के लोग चार ही शंकराचार्य को जानते है, वे है – कांची, पुरी, द्वारका और बदरीनाथ, पर इस कार्यक्रम में वाराणसी से आये एक व्यक्ति विशेष  को उन चारों शंकराचार्यों की तरह प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में कई पत्रकारों और समाज सेवा से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया गया, ये सम्मान पाकर, कुछ सम्मान पानेवाले ठीक उसी प्रकार प्रसन्न हुए, जैसे कोई राष्ट्रपति से भारत रत्न का सम्मान पाकर प्रसन्न होता है।

इस ज्योतिष सम्मेलन से क्या लाभ

इस अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में कौन किससे कितना फायदा उठाया? हम नहीं कह सकते, पर इतना जरुर कह सकते है, कि जैसा दावा किया गया था, उस दावे में ये अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन कहीं खड़ा नहीं उतरा। दावा किया गया था कि भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री, राज्य के कई मंत्री व रांची के कई प्रबुद्ध नागरिक इसमें शामिल होंगे, पर उनकी उपस्थिति कहीं दिखी नही, ले-देकर पहले दिन सिल्ली विधायक अमित महतो, तो दूसरे दिन राजमहल विधायक अनन्त ओझा तथा पूर्व सांसद यदुनाथ पांडेय ही दिखाई पड़े।

ज्योतिष सम्मेलन और एकरुपता नहीं

इस ज्योतिष सम्मेलन में आये ज्योतिषियों की बातें करें, तो किसी की बातों में एकरुपता नजर नहीं आयी, ऐसा लगा कि मानो ये किसी वनभोज कार्यक्रम में शामिल हुए हो, रांची में ही रह रहे कई प्रतिष्ठित ज्योतिषियों और विद्वानों ने स्वयं को इस कार्यक्रम से दूर रखा, इस कार्यक्रम में वहीं ज्योतिष ज्यादा सक्रिय दीखे, जो विभिन्न अखबारों और चैनलों में विज्ञापन देकर, स्वयं को इस ज्योतिषीय रोजगार से जोड़ रखे है, इसका इन्हें लाभ भी मिला। विभिन्न अखबारों और चैनलों ने विज्ञापन धर्म का निर्वहण करते हुए, अपने-अपने अखबारों और चैनलों में इसे खुब स्थान दिया।

कितनी सफल होगी भविष्यवाणी

इस कार्यक्रम में गुजरात से आये डा. अश्विन ने कहा कि भारत 2019 में देश महाशक्तिशाली बन जायेगा। चलिए, अब मात्र दो साल ही शेष है 2019 आने में देखते है कि, इनकी ज्योतिषीय भविष्यवाणी सफल होती है या असफल, हालांकि हम बता दें कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजक ने ही कुछ दिन पहले भविष्यवाणी की थी कि चैम्पियंस ट्राफी पर भारत का कब्जा होगा, पर चैम्पियंस ट्राफी पर भारत का कब्जा हुआ या नहीं, ये तो सारे भारत के लोग जानते है, यानी भविष्यवाणी सफल हो गया तो तीर और नहीं हुआ तो तुक्का।

ज्योतिष यानी हो गया तो तीर, नहीं तो तुक्का

हमारा मानना है कि इसमें कोई दो मत नहीं कि ज्योतिष एक विज्ञान है, इसकी पढ़ाई जरुरी है, बिना इसे जाने, आप अगर जोड़-तोड़ कर के भविष्यवाणी करते है, तो हो सकता है कि कुछ दिन में आप बहुत ही पापुलर हो जाये, पर जिस दिन तीर-तुक्के की बात जनता की समझ में आ गयी तो क्या होगा? सभी जानते है। ऐसे मैं रांचीवासियों को कहुंगा कि आज रांची में पहला अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन का अंतिम दिन है, जाइये पर गंभीर होकर नहीं, बस सिर्फ आनन्द लेने के लिए, ज्योतिषियों से मिलिये, उनके विचार सुनिये और घर जाकर आराम से आनन्द लेते हुए उनकी बातों पर मुस्कुराते हुए, सो जाइये, नहीं तो जहां गंभीर हुए तो लीजिये, उन ज्योतिषियों को तो नहीं, पर आपको दिक्कत अवश्य हो जायेगी।

Krishna Bihari Mishra

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