दिल्ली-भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस में यात्रियों को खिलाया घटिया खाना, 31 बीमार, यात्रियों का हंगामा

दिल्ली से भुवनेश्वर की ओर जा रही ट्रेन नं. 22824 राजधानी एक्सप्रेस में उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब घटिया खाना खाने से करीब 31 रेलयात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। रेलयात्रियों की शिकायत थी, कि रात में पड़ोसे गये भोजन की गुणवत्ता सही नहीं थी। पनीर और चिकन बहुत ही घटिया किस्म का था, वेटर और मैनेजर को इसकी शिकायत करने के बावजूद भी इस खाने को बदला नहीं गया।

दिल्ली से भुवनेश्वर की ओर जा रही ट्रेन नं. 22824 राजधानी एक्सप्रेस में उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब घटिया खाना खाने से करीब 31 रेलयात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। रेलयात्रियों की शिकायत थी, कि रात में पड़ोसे गये भोजन की गुणवत्ता सही नहीं थी। पनीर और चिकन बहुत ही घटिया किस्म का था, वेटर और मैनेजर को इसकी शिकायत करने के बावजूद भी इस खाने को बदला नहीं गया।

इसी बीच जब ट्रेन गया से खुली, तब रात के दो बजे के बाद से रेलयात्रियों की तबियत बिगड़नी शुरु हुई, इसी में से एक यात्री ने तबियत खराब होने की शिकायत गार्ड से की, गार्ड ने इसकी तुरन्त सूचना कंट्रोल रुम को दी, कंट्रोल रुम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोडरमा में एक डाक्टर को भेजा। कोडरमा में उक्त यात्री की इलाज हुई, और यहां यह ट्रेन पांच मिनट ज्यादा स्टेशन पर खड़ी रही।

इसी बीच कोडरमा से जैसे ही गाड़ी आगे खुली, एक पर एक रेलयात्रियों की तबियत खराब होनी शुरु हुई, गार्ड ने फिर कंट्रोल रुम को सूचना दी, कंट्रोल रुम ने गोमो में तैनात अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. असीम कुमार और धनबाद से एक अतिरिक्त मेडिकल टीम गोमो भेजा, रेलयात्रियों के इलाज को लेकर गोमो स्टेशन पर यह ट्रेन 22 मिनट तक रुकी रही, इसके बाद एक डाक्टर की टीम के साथ ट्रेन बोकारो के लिए रवाना हुई, इसी बीच ट्रेन के अंदर बीमार रेलयात्रियों का इलाज चलता रहा। 

फिर इसके आगे जो बोकारो की मेडिकल टीम साथ गई, वह मुरी में उतर गई, फिर मुरी की मेडिकल टीम टाटानगर तक गई और फिर टाटानगर की मेडिकल टीम आगे तक गई।रेलयात्रियों ने बताया कि जब रेलयात्रियों की तबियत खराब होनी शुरु हुई, तब उनलोगों ने ट्रेन सुपरिटेंन्डेंट को खोजना प्रारंभ किया, पर वह नहीं मिला, बाद में किसी ने बताया कि वह फलां जगह सोया है, तब जाकर रेलयात्रियों ने उसकी खूब फजीहत कर उसे जगाया।

सूत्र बताते है कि इस भुवनेश्वर राजधानी के आगे एक और राजधानी जो हावड़ा के लिए जा रही थी, हीरोडीह और सरमाटाड़ के बीच रुकी थी, क्योंकि उसका इंजन फेल हो गया था, जिस कारण भुवनेश्वर राजधानी को हीरोडीह में करीब 85 मिनट तक रुकना पड़ा। एक महिलायात्री विदिशा दास ने बताया कि इस ट्रेन में बहुत ही गंदगी है, कही कोई सफाई नहीं, चूहों और तिलचट्टों ने इस ट्रेन को अपने कब्जे में कर रखा है, ऐसे में लोगों को बीमार होना लाजिमी है, पता नहीं भारत सरकार का रेल मंत्रालय इससे सीख लेगा भी या नहीं। सूत्र बताते है कि जो भोजन रेलयात्रियों को परोसा गया था, वह दिल्ली के ओखला नामक स्थल से ट्रेन में लोड किया गया था।

Krishna Bihari Mishra

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