हेमन्त सोरेन ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को लठैत और माफियाओं का संरक्षक बताया

विकास को लेकर बहस करने के लिए विपक्ष को चुनौती देनेवाले अब बहस से भाग खड़े हो रहे हैं। आज नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के उस चुनौती को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास को ललकारा, और कहा कि वे मोरहाबादी में किसी भी समय सीएम रघुवर दास से बहस करने को तैयार है, सीएम समय और तिथि मुकर्रर करें, पर विकास पर बहस करने से पहले, सीएम रघुवर दास को उन माताओं से बहस करनी चाहिए,

विकास को लेकर बहस करने के लिए विपक्ष को चुनौती देनेवाले अब बहस से भाग खड़े हो रहे हैं। आज नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के उस चुनौती को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास को ललकारा, और कहा कि वे मोरहाबादी में किसी भी समय सीएम रघुवर दास से बहस करने को तैयार है, सीएम समय और तिथि मुकर्रर करें, पर विकास पर बहस करने से पहले, सीएम रघुवर दास को उन माताओं से बहस करनी चाहिए, जिनके बच्चे सरकारी टीकाकरण से मर गये। हेमन्त सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री जी, जिनके बेटों को आपकी व्यवस्था ने मारा, पहले उन माताओं से आप विकास पर बहस कीजिये। ये सिर्फ कुछ बच्चों के मौत का मामला नहीं, यह पुरी सरकारी व्यवस्था पर से राज्य के गरीबों, दबे-कुचलों एवं असहायो के भरोसा टूटने का मामला है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले उन विधवाओं से विकास पर बहस करना चाहिए, जिनके किसान पतियों ने कर्ज के बोझ से आत्महत्या कर लिया। पहले उन माता-पिता से बहस करना चाहिए, जिनके बच्चे भूख से मर गये, और सरकार की व्यवस्था उनसे आधार कार्ड मांगती रह गई। आप उन अनाथ बच्चों और विधवाओं से पहले विकास पर बहस कीजिये, जिनके पतियों की हत्या राजधानी के सड़कों पर दिन-दहाड़े कर दी गई। पिछले एक माह में 17 लोगों की हत्या राजधानी में हुई है। क्या यहीं विकास है?

हेमन्त ने कहा कि भ्रष्टाचार में भी आपने नये-नये कीर्तिमान बनाये है। गांव के गरीब महिलाओं के नाम पर 18 करोड़ रुपये का कंबल घोटाला, इस सरकार के विकास का पैमाना है। महालेखाकार ने साफ-साफ, अपने रिपोर्ट में लिखा है कि राज्य में टेंडर घोटाला हुआ है। सभी नियमों को तोड़कर मनचाहे लोगों को बड़ी-बड़ी योजनाओं के टेंडर दिये गये हैं और बढ़ी राशि की उगाही की गई। जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ और फ्लाइओवर के लिए वर्क आर्डर भी दे दिया गया, आखिर किस लाभ के लिए? प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों की झोपड़ियां तोड़ दी गई और नये घर के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है। जो थोड़ा बहुत पैसा दिया गया, उसे दलालों ने हड़प लिया और अब पैसा वसूली के लिए उन गरीबों पर मुकदमा किया गया, जिन्होंने कोई राशि ली ही नहीं। खनन लूट पर क्या कहना है आपका? ये विभाग भी मुख्यमंत्री के जिम्मे है, शराब के विषय पर भी क्या कहा जाय, इस विभाग के मालिक भी मुख्यमंत्री है।

हेमन्त ने कहा कि राज्य सरकार को मुख्यमंत्री ने विगत सालों में 600 करोड़ का चूना लगाया है। जिन गुर्गों को इन्होंने शराब बेचने में लगाया, वो सभी मालामाल है और माल में मुखिया जी की भी हिस्सेदारी है। इन्हीं के मंत्री कहते है कि सरकार विकास का कंबल ओढ़कर भ्रष्टाचार का घी पी रही है।  जमीन घोटाला भी अरबों रुपये की है, जिसमें जमीन को औने-पौने दाम पर कंपनियों को दे दी गई। समय आने पर मंत्रियों और अधिकारियों को इसका जवाब देना पड़ेगा। आंगनवाड़ी पोषाहार घोटाले की भी तैयारी बड़ी तेजी से चल रही है। इसके लिए पहले टेंडर निकाला गया था, फिर टेंडर रद्द कर दिया गया और कहा जा रहा है कि यह काम सखी मंडल करेगी, लेकिन वास्तव में सखी मंडल की आड़ में पोषाहार का काम आंध्र प्रदेश की एक कंपनी को देने की साजिश चल रही है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि दरअसल भाजपा की राजनीतिक संस्कृति रही है कि झूठ की दौड़ में लगे रहो, लेकिन ये भूल रहे है कि जनता इन्हें सच की एक लंघी ऐसी लगायेगी कि ये चारों खाने चित्त हो जायेंगे। हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखण्ड का चौकीदार यानी मुख्यमंत्री देश के चौकीदार यानी प्रधानमंत्री को भी धोखा दे रहा है, एक साल पहले देश के चौकीदार ने साहेबगंज में एक डेयरी प्लांट का शिलान्यास किया था, वहां आज तक कुछ भी नहीं हुआ। वह एक आदिवासी विधायक का क्षेत्र  है, तो इन्होंने जगह बदलने का निर्देश दिया, कहा कि आदिवासी कहीं दूध पीता है? आदिवासियों को दूध की क्या जरुरत है? आदिवासी और दलितों के लिए तो सरकार पहले से ही शराब बेच रही है और उस योजना (डेयरी प्लांट) को हटाकर गैर आदिवासी विधायक के क्षेत्र में लगाया जा रहा है और मुख्यमंत्री चिल्ला-चिल्लाकर दुमका में आदिवासियों के विकास की बात करते है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि भाजपा पूरे देशवासियों को कभी कुत्ता, कभी बिल्ली, कभी सांप, कभी छुछुन्दर, कभी नेवला, और कभी कीड़े-मकोड़े कहती है। क्या ये लोकतंत्र की भाषा है? मुख्यमंत्री विकास पर बहस को चुनौती देते हैं। इनकी लाल-लाख आंखे, गाली-गलौज की भाषा तथा उग्र तेवर देखकर, क्या लगता है कि ये किसी विषय पर सार्थक बहस के काबिल भी है?  क्या इनमें अर्थपूर्ण बहस की काबिलियत हैं? वास्तव में ये मुख्यमंत्री  है ही नहीं, ये दिल्ली वालों के लठैत एवं माफियाओं के संरक्षक और वैसी ही इनकी सोच, समझ एवं भाषा है। ये सिर्फ गाली-गलौज की प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं और झारखण्ड के लिए निश्चित रुप से गोल्ड मेडल जीत सकते हैं। हम झारखण्डियों का यह संस्कार नहीं है।

हेमन्त सोरेन ने कहा कि आप देख रहे होंगे कि विगत तीन-चार दिनों से वर्षा और ओलावृष्टि से झारखण्ड के किसानों की फसल बर्बाद हो गई। मुख्यमंत्री से लेकर सरकार के किसी भी व्यक्ति ने एक शब्द तक नहीं कहा। किसान घरों में बैठकर रो रहे हैं और ये विकास-विकास चिल्ला रहे हैं।हेमन्त सोरेन ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री का विकास सिर्फ विज्ञापनों में दीखता है। इनका विकास संग्रहालय में रखी हुई एक प्रतिमा की तरह है, जिस पर लिखा हुआ है कि इसे छूना मना है और ये चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि मेरा विकास देखो, पर छूओ मत। इसको छूना मना है।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की विचारधारा दलित-आदिवासी विरोधी है। ये आरक्षण विरोधी है और आज के आरक्षण विरोधी बंद को इन्हीं ताकतों का समर्थन प्राप्त है, जाति और धर्म के नाम पर देश में जो आग लगाया जा रहा है, इसके गंभीर परिणाम होंगे। युवाओं को रोजगार देने के बजाय युवाओं से दंगे कराये जा रहे हैं।

Krishna Bihari Mishra

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