राजनीति

हाहाहाहाहा… हाथी उड़ानेवाला, अब बांगलादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालेगा…

हाथी को उड़ाने का दंभ भरनेवाला आज विकास को छोड़कर बांगलादेशी घुसपैठियों में अपनी जीत का स्वाद ढुंढने निकला है, वह जान चुका है कि उसका उड़ता हाथी, जमीन पर कब का धड़ाम से गिरकर अपना प्राण गंवा चुका है, झारखण्ड की जनता को उसकी विकास की असलियत मालुम हो चुकी है, इसलिए वह जातिवाद का बीज बोने के बाद, अब धर्मांधता और घुसपैठ को इस चुनाव में मुद्दा बनाने की योजना तैयार कर रहा हैं, इसके लिए उसे अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से जन्मघूंटी भी पिला दी गई है, इसीलिये तो कल रांची में आयोजित प्रदेशस्तरीय कमेटी की बैठक में दिल खोलकर बांगलादेशी घुसपैठियों को झारखण्ड से बाहर करने की बात को उसने सुनियोजित ढंग से बाहर निकाला।

सच्चाई उसे भी पता है कि आज चुनाव हो जाये तो लोकसभा की सभी सीटों पर भाजपा की हार तय हैं, कुछ सीटों पर तो जमानत भी भाजपा बचा लें तो गनीमत हैं, विधानसभा चुनाव में तो डबल डिजिट में आना भी संभव नहीं दिख रहा, क्योंकि आदिवासी, अल्पसंख्यक और सवर्णों का समूह कब का भाजपा से नाता तोड़ चुका है और भाजपा को सबक सिखाने के लिए चुनाव आयोग का मुंह ताक रहा है कि वह कब लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित करें और कब झारखण्ड की जनता भाजपाइयों को सबक सिखायें।

भाजपा कार्यकर्ताओं की बात करें, तो भाजपा कार्यकर्ता तो साफ कहते है कि वे लोकसभा में नरेन्द्र मोदी के लिए वोट करेंगे, पर विधानसभा में रघुवर दास के लिए जनता से वोट मांगने का काम, वे हरगिज नहीं करेंगे, हां अगर मुख्यमंत्री के तौर पर किसी अन्य को जनता के सामने पेश किया जाये, तो कुछ वे सोच भी सकते हैं, नहीं तो रघुवर दास के लिए, भाजपा के लिए वोट मांगना, उनसे इस जन्म में संभव नहीं, क्योंकि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए, इस जातिवादी मुख्यमंत्री के दिलों में तनिक स्थान ही नहीं, ऐसे में भाजपा कार्यकर्ता किसी के गुलाम थोड़े ही हैं।

उधर जनता इतनी नाराज है कि वह सीएम का नाम सुनते ही बिदकती है, बिदकने का मूल कारण, सीएनटी-एसपीटी एक्ट पर सरकार की हठधर्मिता, गोड्डा में पावर प्लांट के नाम पर अडानी को दिया जा रहा मदद, भूमि अधिग्रहण विधेयक पर जनता व प्रतिपक्ष के आवाज को दबा देना, विकास के नाम पर मोमेंटम झारखण्ड के द्वारा सरकारी खजाने की खुली लूट, राज्य में बिजली, सड़क, पानी यानी आधारभूत संरचना का ठप पड़ जाना, स्कूलों को बंद करने की योजना को अमल में लाकर आदिवासियों के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का प्लान, स्वच्छता-सफाई के नाम पर चल रही योजनाओं में भी फिसड्डी होना, कौशल विकास के नाम पर बेरोजगार युवकों को ठगने का काम तथा बड़ी-बड़ी कंपनियों को कौशल विकास के नाम पर करोड़ों थमाने का कार्य, तथा एलइडी के माध्यम से अपना चेहरा चमकाने एवं अखबारों व चैनलों पर अपनी आरती उतारने के लिए करोड़ों का बंदरबांट हैं।

स्थिति ऐसी है कि अगर विपक्ष घर में ही बैठा रह जाये और वह इनके खिलाफ सड़कों पर नहीं भी उतरें, तब भी भाजपा की करारी हार, झारखण्ड में सुनिश्चित है, क्योंकि भाजपा ने सर्वाधिक नुकसान उन लोगों का किया, जिन्होंने भाजपा को दिलोजां से चाहा, स्थिति यह है कि सीएमओ में बैठे कुछ कनफूंकवों का समूह सुनियोजित तरीके से उन लोगों पर अपना निशाना साध रहा है, जो कभी सीएम रघुवर दास के खास रहे थे या जिनके साथ उनका मधुर संबंध रहा था, वे ऐसे लोगों को टारगेट कर, उन्हें झूठे मामले में फंसाकर, केस भी करवा रहे हैं तथा उन केसों को अपने ढंग से अखबारों में छपवा भी रहे हैं, और अखबारों में काम करनेवाले लोग, ऐसे-ऐसे झूठे समाचारों को तीन-पांच कर अपने अखबारों में जगह भी दे रहे हैं। जिसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ रहा हैं, पर भाजपाइयों को इसकी जानकारी ही नहीं।

आश्चर्य यह भी है कि इन दिनों असामाजिक तत्वों का कुछ गिरोह भी भाजपा के साथ जुड़कर अपना उल्लू सीधा कर रहा हैं तथा भाजपाइयो को ही ठिकाने लगाने में लगा है, जिसका असर आनेवाले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में पड़ना तय है, राजनीतिक पंडितों के अनुसार, भाजपा कुछ भी पापड़ बेल ले, पर इस बार लोकसभा और विधानसभा दोनों में अगर किसी को नुकसान उठाना पड़ेगा तो वह सिर्फ और सिर्फ भाजपा है, और उसके कारण हैं – एकमात्र राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास। उन्हें लग रहा है कि बांगलादेशी घुसपैठियों के नये नारों के साथ चुनाव जीत लेंगे तो वे समझ ले कि जनता इतनी मूर्ख नहीं हैं, क्योंकि जनता को पता है, जैसे उनके नेता काला धन ले आये, ठीक उसी प्रकार उनके नेता कितने बांगलादेशी घुसपैठियों को बाहर निकाल पायेंगे, उन्हे पता हैं।