ईमानदार एमवी राव को डीजीपी पद से हटाने के लिए कोयला माफियाओं से लेकर भ्रष्ट नेताओं, अधिकारियों व पत्रकारों ने मिलकर लगाया जोर

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जब से झारखण्ड में हेमन्त सोरेन की सरकार बनी है, तब से लेकर आज तक जितने भी फैसले राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने लिए हैं, उन फैसलों को चुनौती देने के लिए भ्रष्ट एवं चरित्रहीन लोगों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत काम करना शुरु कर दिया है, हालांकि इन्हें सफलता नहीं मिलने जा रही, पर पेट में दर्द उनका इतना बढ़ गया हैं, कि ये अपने दर्द के निवारण  के लिए जो भी कुछ मिल रहा हैं, उसे करने में लग जा रहे हैं।

अब देखिये न, एक नया मामला आ गया है, राज्य के डीजीपी एमवी राव के खिलाफ कोयला माफियाओं से लेकर भ्रष्ट नेताओं, अधिकारियों व तथाकथित चिरकूट पत्रकारों ने एक गुट बना लिया है और एक सुनियोजित साजिश के तहत उन्हें हटाने में लग गये, क्या इन्हें इसमें सफलता मिलेगी, हमें तो नहीं लगता, क्योंकि इसके कारण भी स्पष्ट है।

अगर आम जनता से डीजीपी एमवी राव के बारे में पूछिये, तो सामान्य जनता यही कहेगी, ये बहुत ही अच्छे आदमी है, और वर्तमान में जिस प्रकार से राज्य में कोविड 19 फैलने पर सांप्रदायिक तत्वों व एक राजनीतिक दल के नेताओं ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी। सोशल साइट के माध्यम से आग लगाने की कोशिश की थी, इस शख्स ने ऐसी व्यवस्था कर दी कि सारे सांप्रदायिक तत्वों के होश उड़ गये और सभी ने एक स्वर से माफी भी मांगी।

जिसमें राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का प्रेस सलाहकार भी शामिल था, तथा शामिल थे एक राजनीतिक दल के समर्थक वे लोग जिन्होंने कभी राज्य में सामाजिक-सांप्रदायिक सद्भाव बहाल करने की कोशिश ही नहीं की, अब चूंकि एमवी राव ने राज्य के पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाकर एक सुंदर वातावरण झारखण्ड में तैयार कर दी, तो उक्त राजनीतिक दल के समर्थकों को पेट में दर्द होना स्वाभाविक है।

सुना तो यह भी जा रहा है कि उक्त राजनीतिक दल के एक बड़े नेता ने अपने खासमखास को बॉडीगार्ड दिलाने के लिए एमवी राव से पैरवी कर दी, बेचारे एमवी राव कहा फालतू के पैरवी सुननेवाले हैं, उन्होंने तुरन्त उस पैरवी को खारिज कर दी, ऐसे में उक्त राजनीतिक दल का नेता भला एमवी राव को क्यों पसंद करेगा, वो तो चाहेगा कि एमवी राव जितना जल्द हो सकें, पद से हट जाये, पर आम जनता को उक्त राजनीतिक दल के चाहनेवालों को बॉडीगार्ड मिले या नहीं मिले, इससे क्या मतलब।

इन दिनों सभी अखबारों व चैनलों तथा कौड़ी के तीन हो चुके पोर्टलों में डीजीपी एमवी राव के खिलाफ लिखनेवाले चिरकूटों की बाढ़ आ गई है, ये बाढ़ ऐसे ही नहीं आई है, एमवी राव के खिलाफ माहौल बनाने की तैयारी चल रही है, ताकि राज्य सरकार आनन-फानन में एमवी राव को उनके पद से हटा दें, पर इन मूर्खों को ये नहीं मालूम कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, हाथी उड़ानेवाले मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि बकोरिया कांड के साजिशकर्ताओं को उलटा लटका कर, उन्हें जेल पहुंचाने का इरादा रखनेवाले मुख्यमंत्री हैं और ये तभी होगा, जब एक एमवी राव जैसा ईमानदार व्यक्ति राज्य के डीजीपी पद पर होगा।

जरा देखिये न, जब से एमवी राव आये हैं, कोयला माफियाओं की फट गई है, वे मंदिर से लेकर न्यायालय तक की दौड़ लगा रहे हैं, कि कैसे एमवी राव को उनके पद से हटाया जाय ताकि उनकी गुंडागर्दी फिर से पटरी पर दौड़ सकें। ज्ञातव्य है कि कोयला माफिया, भ्रष्ट अधिकारी, भ्रष्ट राजनीतिज्ञ और भ्रष्ट पत्रकार की यहां गलबहियां कैसे चलती हैं, सभी जानते हैं।

कल अखबार में यह भी पढ़ने को मिला कि कुछ लोग सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने गये है, डीजीपी एमवी राव को हटाकर, फिर से कमल नयन चौबे को उक्त पद पर बिठाना चाहते हैं, उक्त अखबार में यह भी पढ़ने को मिला, जिसमें लिखा था चौबे बेहतर काम कर रहे थे, जबकि राज्य की जनता अच्छी तरह जानती है कि चौबे के कार्यकाल में यहां क्या हो रहा था। भाई अपनी-अपनी ढपली हैं और अपनी-अपनी राग।

अब जरा यह भी सोचिये, एमवी राव को उनके पद से हटाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय कौन जायेगा, वहीं जायेगा न, जिसको इसमें फायदा हो, आम जनता को इससे क्या मतलब, उसे तो झारखण्ड मेंं अमन चैन व शांति चाहिए, न कि पूर्व सीएम रघुवर के इशारे पर धनबाद को ढुलू के आगे पेश कर देने वाला डीजीपी, जिस ढुलू पर 40 मुकदमें चल रहे हैं। ढुलू जानते हैं न, बाघमारा का दबंग भाजपा विधायक, जिसने सभी के नाक में दम कर रखा था, आज डीजीपी एमवी राव के कार्यकाल में जेल में बंद है।

जनता तो जानना चाहती है कि बकोरिया कांड में लिप्त अपराधकर्मियों (चाहे उस कांड में शामिल बहुत बड़ा अपराधी पुलिस ही क्यों न हो), जिस कांड को दबाने में पूर्व की सरकार ने एड़ी चोटी एक कर दी थी, उसे अंजाम तक पहुंचाने का काम कोई पांडे या चौबे नहीं कर सकते, सिर्फ और सिर्फ राव जैसे लोग ही कर सकते है।

झारखण्ड के एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ सरयू राय ने जो मुद्दे उठाए है कि कैसे एक पुलिस अधिकारी, सत्तारुढ़ दल के इशारे पर किन-किन लोगों की फोन टैपिंग करता था, और इस फोन टैपिंग में कौन-कौन शामिल थे, उन अपराधियों को कोई पांडे या चौबे सजा नहीं दिला सकते, उसके लिए एक एमवी राव जैसे शख्स की जरुरत है, इसलिए हमारे पास एक नहीं कई प्रमाण है, जो बताते है कि एमवी राव झारखण्ड को क्यों चाहिए।

रांची के हिन्दपीढ़ी में थूक कांड करवाकर सांप्रदायिक विद्वेष को जन्म देनेवाले समझ ले कि एमवी राव के आगे उनकी एक नहीं चलनेवाली, साथ ही पत्रकार व राजनीतिज्ञ भी समझ लें, राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पर उनके माहौल बनाने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि एमवी राव जैसे ईमानदार डीजीपी झारखण्ड की जरुरत है, और हेमन्त सोरेन कोई अखबारों/चैनलों की कृपा से राज्य के मुख्यमंत्री नहीं बने हैं। जनता ने ताल ठोककर, उन्हें राज्य सौंपा है।  

1 Comment
  1. राजू सिंह says

    बहुत सुंदर तरीके से आपने अपनी कलम से सजाया है जिसके लिए धन्यवाद

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