चतरा के पत्थलगड़ा से दैनिक ‘आज’ के संवाददाता चन्दन तिवारी की हत्या

चतरा के पत्थलगड़ा से दैनिक ‘आज’ के संवाददाता चन्दन तिवारी की अज्ञात अपराधियों ने हत्या कर दी। बताया जाता है कि चंदन अंतिम बार बीती रात लगभग 8 बजे, पत्थलगड़ा चौक पर देखे गये थे। उसके बाद पुलिस को सूचना मिली कि उनका अपहरण कर लिया गया है, जिन्हें घायलावस्था में जंगल से बरामद किया गया, जहां सिमरिया अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। चंदन के शरीर पर मार-पीट के घाव के निशान भी पाये गये।

चतरा के पत्थलगड़ा से दैनिक आज के संवाददाता चन्दन तिवारी की अज्ञात अपराधियों ने हत्या कर दी। बताया जाता है कि चंदन अंतिम बार बीती रात लगभग 8 बजे, पत्थलगड़ा चौक पर देखे गये थे। उसके बाद पुलिस को सूचना मिली कि उनका अपहरण कर लिया गया है, जिन्हें घायलावस्था में जंगल से बरामद किया गया, जहां सिमरिया अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। चंदन के शरीर पर मार-पीट के घाव के निशान भी पाये गये।

सूत्र बताते है कि चंदन तिवारी ने पत्थलगड़ा थाना प्रभारी को इसकी लिखित सूचना दी थी, जिसमें इस बात का जिक्र था कि उनके साथ कोई अनिष्ट हो सकता है, तथा स्थानीय पुलिस से अपने लिए सुरक्षा की मांग भी की गई थी, पर स्थानीय पुलिस ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

चंदन तिवारी ने स्थानीय पुलिस को कुछ महीने पहले बताया था कि उन्होंने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर स्थानीय मुखिया, मो. सेराजुल, एवं देवकी दांगी के द्वारा प्रधानमंत्री आवास, बकरी शेड में किये गये गबन के बारे में लिखा था, उसके पश्चात् मुखिया के पति महेश दांगी, द्वारा फोन पर उनके साथ मार-पीट की बात कही गई थी। इसलिए उनकी ओर से सनहा दर्ज किया जाय, यदि उनके साथ कुछ भी होता है, जैसे सड़क हादसा, मार-पीट, झूठा मुकदमा या हत्या तो इसकी सारी जवाबदेही महेश दांगी, मो. सेराजुल एवं देवकी दांगी पर होगी।

Krishna Bihari Mishra

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जिस CM को, किससे कैसे पेश आना चाहिए, पता ही नहीं हो, उससे आप क्या उम्मीद लगा सकते हैं?

Tue Oct 30 , 2018
जिस राज्य में झारखण्ड हाइकोर्ट के निर्माण कार्य की लागत मात्र दो साल में ही 265 करोड़ से बढ़कर 699 करोड़ हो जाती है (ज्ञातव्य है कि जब 2016 में रामकृपाल कन्सट्रक्शन प्रा. लि. को टेंडर मिला था, उस समय इस योजना का प्राक्कलन राशि 265 करोड़ रुपये था), जिस राज्य में बिना किसी तरह की स्वीकृति लिये, ठेकेदार को बिना टेंडर के ही काम दे दिया जाता हो, जिस राज्य में, जिस योजना की तकनीकी अनुमोदन ही नहीं मिलना चाहिए

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