भक्त हो तो सुदामा और मित्र हो तो भगवान श्रीकृष्ण जैसा, जो अपने मित्रों पर सारा ऐश्वर्य लुटा दे

रांची के चुटिया अयोध्यापुरी स्थित वृंदावनधाम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन महाराष्ट्र से पधारे भागवताचार्य संत श्रीमणीषभाई जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक भगवान के भक्त को सुदामा की तरह बनना चाहिए, और प्रत्येक मित्र को भगवान श्रीकृष्ण जैसा होना चाहिए, जो अपने मित्र पर सारा ऐश्वर्य लुटा दें। पूरे संसार में आज तक भगवानश्रीकृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता कही देखने को नहीं मिलती।

रांची के चुटिया अयोध्यापुरी स्थित वृंदावनधाम में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन महाराष्ट्र से पधारे भागवताचार्य संत श्रीमणीषभाई जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक भगवान के भक्त को सुदामा की तरह बनना चाहिए, और प्रत्येक मित्र को भगवान श्रीकृष्ण जैसा होना चाहिए, जो अपने मित्र पर सारा ऐश्वर्य लुटा दें। पूरे संसार में आज तक भगवानश्रीकृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता कही देखने को नहीं मिलती। जरा सोचिये, अगर भगवान कन्हैया ही आपका मित्र सदा के लिए बन जाये तो कैसा रहेगा? आवश्यकता है कि हम अपने भगवान श्रीकृष्ण को ही अपना सच्चा मित्र बना ले ताकि हम भगवान में एकाकार होकर, अपने जीवन को मोक्ष प्रदान कर दें, जैसा कि महाराज परीक्षित ने शुकदेव जी महाराज से भागवतकथा श्रवण कर अपने जीवन को मोक्ष प्रदान कर दिया।

उन्होंने आज नरकासुर वध तथा सोलह हजार नारियों के उद्धार, सुदामा की द्वारका यात्रा, द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मित्र सुदामा का भव्य स्वागत, सुदामा को अपने सिंहासन पर बैठाना तथा पूरे परिवार के साथ मिलकर सुदामा को आतिथ्य प्रदान करना और फिर सुदामा को जीवन का सारा सुख-ऐश्वर्य प्रदान करने की कथा इतने भावपूर्ण ढंग से सुनाई, कि भगवान श्रीकृष्ण की कथा में रमे, श्रद्धालुओं के आंखों में आंसू आ गये। मणीषभाई जी महाराज ने कहा कि भागवत स्पष्ट रुप से कहता है कि जो भी जीवात्मा, परब्रह्म को पाना चाहता है, उसे सुदामा जैसी भक्ति भी दिखानी होगी, जिसके लिए भगवान श्रीकृष्ण ने वह किया, जो किसी के लिए संभव नहीं था।

इसके पूर्व उन्होंने भगवानश्रीकृष्ण की रासलीला, कंस-चानूर मर्दन, भगवानश्रीकृष्ण के रणछोड़ बनने, द्वारका बसाने की बड़ी सुंदर कथा सुनाई। मणीषभाई महाराज ने कहा कि भगवानश्रीकृष्ण के अधरों पर जो वंशी है, उस वंशी के बारे में भगवानश्रीकृष्ण कहते है कि उसमें उनकी आत्मा बसती है। वंशी से जो नाद निकल रहा है, वह भगवान की चेतना है, इसी से कृष्ण के प्रति प्रेम जगता है, और जब प्रेम जगा तो प्रभु मिलन से कौन रोक पायेगा। उन्होंने कहा बाह्य सौंदर्य पर ध्यान मत दीजिये, शारीरिक सुंदरता पर ध्यान मत दीजिये, ये कभी भी आपको धोखा दे सकता है, पर आंतरिक सौंदर्य पर जब ध्यान देंगे, जब आप भगवान के सौंदर्य पर ध्यान देंगे, भगवान की सेवा में लग जायेंगे तो फिर यही सेवा आपको परम आनन्द की ओर ले जायेगा। इसे स्वीकार कर लीजिये।

उन्होंने कहा कि भागवत कथा में या भगवन्ननाम संकीर्तन में शंका नहीं, सिर्फ और सिर्फ श्रद्धा व प्रेम रखे, क्योंकि जहां शंका आपके मन में आई, आप भक्ति योग से अलग हो गये, और जब भक्तियोग से अलग हुए तो लीजिये आपका जीवन ही आनन्द से दूर हो जायेगा, आप भगवान के अद्भुत प्रेम को नहीं जान पायेंगे। उन्होंने कहा कि यह आप जान ले, ईश्वर के लिए कोई पराया नहीं, जो भी उनके पास जाता है, वे उनके हो जाते है, इसमें किन्तु परन्तु नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आपने सांप-सीढ़ी का खेल बचपन में जरुर खेला होगा, आप समझ लीजिये, ठीक इसी प्रकार का खेल प्रत्येक जीवात्मा और ईश्वर के बीच अनन्तकाल से इस जगत में चल रहा है, जो इस खेल को समझ लेता है, वह ईश्वर में एकाकार होने के लिए गोपियों की तरह छटपटाने लगता है, और जब उसकी छटपटाहट अत्यधिक बढ़ जाती है तब भगवानश्रीकृष्ण को नाना प्रकार की लीलाएं करनी पड़ती है और गोपियों को समझाने के लिए महारास का आयोजन करना पड़ जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीवात्मा के लिए जीवन एक यात्रा है, प्रवास है। यह आना-जाना निरर्थक न रह जाये, इसके लिए आप इस यात्रा को सार्थक बनाने का प्रयास करें और ये यात्रा तभी सार्थक होगी, जब आप भगवान को अपने हृदय में, केन्द्र मे रखेंगे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के रास को नित्य योग, नित्य प्रेम और नित्य भक्ति बताया। उन्होंने कथा सुन रहे श्रद्धालुओं को बताया कि  जो जगत में दुर्लभ है, वो यहां के लोगों को सुगम हैं। अगर सद्गुरु भगवानश्रीकृष्ण जैसे दिव्य गुरुओं से लगन हो गया तो समझ लीजिये कि आपका जीवन धन्य को प्राप्त हो गया, पर इसके लिए भगवान का नित्य भजन करना होगा, और ये भजन तब तक करना होगा, जब तक कन्हैया ये न कह दें कि तू मेरा हो गया। आश्चर्य यहां यह देखा जा रहा है कि करीब चार-चार घंटे भागवत की कथा सुनाई जा रही है, पर पंडाल से जाने का कोई नाम नहीं ले रहा। सभी हरिभक्ति में इस प्रकार लीन है, कि यह दृश्य देखकर सभी आश्चर्यचकित है और इसकी चर्चा पूरे रांची में हो रही है।

रांची में इस कथा को सुन रही माया मिश्रा कहती है कि ऐसे हमने कई बार भागवत की कथा सुनी पर मणीषभाई के मुख से भागवत कथा सुनने का जो आनन्द मिला, वह आज तक नहीं मिला, कब कथा प्रारंभ हुई और कब चार घंटे बीत गये, समझ नहीं आ रहा, ऐसी भक्ति की अविरल धारा, सचमुच सबको मोक्ष प्रदान करने के लिए जो यहां बहाई जा रही है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है। श्रीमद्भागवत की कथा सुन रहे शत्रुघ्न केशरी गदगद है, वह बताते है कि रांची के चुटिया में संभवतः इस प्रकार का पहला आयोजन है, जो भव्य है, जिसमें भक्ति की गंगा बह रही है, आयोजन समिति को इसके लिए मैं धन्यवाद देना चाहुंगा, साथ ही वे चाहेंगे कि भागवताचार्य संत श्रीमणीष भाई का आगमन रांची में बराबर होता रहे और लोग इनकी कथा सुन सर्वदा भगवद्भक्ति में लीन रहे।

इस कथा को सफलतापूर्वक संचालित करने में भागवत सेवा समिति अयोध्यापुरी चुटिया के राजीव कुमार सिंह, मुकेश कुमार मधुकर, चंद्रकांत शास्त्री, प्रकाश चौधरी, छत्रधारी महतो, संजीव सिंह, लक्ष्मी सिंह, राम लखन महतो, अजित सिंह, सुरेन्द्र सिंह, मुन्ना ठाकुर, विमल कुमार झा, अमित गुप्ता, मनोज महतो, परमानन्द यादव, अनिल सिंह, गोपाल प्रसाद, राम प्रसाद महतो, मदन केसरी, ओम प्रकाश अग्रवाल, अनिल महतो, विजय पांडेय, प्रमोद गोप, सुमित मिश्रा एवं अलका चौधरी की भूमिका प्रशंसनीय रही।

Krishna Bihari Mishra

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