अपनी बात

पहले गलती करेंगे, बाद में उसी गलती पर पर्दा डालने के लिए बयान देंगे और जब कोई उन्हें आइना दिखायेगा, तो वे विशेषाधिकार हनन की नोटिस थमायेंगे

पहले खुद गलती करेंगे।  बाद में उसी गलती पर पर्दा डालने के लिए बयान देंगे और जब कोई उन्हें आइना दिखायेगा, तो वे झूठी शान में विशेषाधिकार हनन की नोटिस थमायेंगे, तो झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो भी जान लें कि विद्रोही24, उनकी इस विशेषाधिकार नोटिस से डरनेवाला नहीं, उनकी इस विशेषाधिकार नोटिस का सही समय पर जिस प्रकार वे चाहेंगे, उसका जवाब देगा/भेजेगा और अब चूंकि लोकतंत्र है, जनता को यह जानना चाहिए कि मामला क्या है? आज ही झारखण्ड विधानसभा सचिवालय से उपसचिव कमलेश कुमार दीक्षित का एक पत्र विद्रोही24 को प्राप्त हुआ है। यह पत्र विशेषाधिकार हनन से संबंधित है, पत्र आपके समक्ष है-

पत्र में लिखा है कि निदेशानुसार सूचित करना है कि विद्रोही24 न्यूज पोर्टल पर दिनांक 1 सितम्बर 2020 को शीर्षक “न न्याय मांगने, न विधि-विशेषज्ञों, न ही सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन पर ध्यान ही दिया और फैसला सुना दिया, झारखण्ड के स्पीकर रवीन्द्र नाथ ने”, से प्रकाशित आलेख जो आपके द्वारा लिखा गया है, उसका दिनांक 21 सितम्बर 20 को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा विचारण किया गया एवं समिति द्वारा प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि आपके आलेख में न केवल सभा सचिवालय द्वारा एक महत्वपूर्ण विषय पर लिये गये निर्णय की गलत व्याख्या, बिना सभा सचिवालय का पक्ष जाने की गई है, बल्कि आपके आलेख के माध्यम से माननीय अध्यक्ष, झारखण्ड विधानसभा आपत्तिजनक व्यक्तिगत टिप्पणी भी की गई है।

अतः प्रथम दृष्टया समिति में यह भारत के संविधान द्वारा विधायिका को प्रदत्त विशेषाधिकार के हनन का मामला पाया है। अतएव दिनांक 7 अक्टूबर 20 के 12 बजे मध्याह्न से पूर्व झारखण्ड विधानसभा के विशेषाधिकार समिति के कार्यालय में अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करें, कि क्यों नहीं, आपके विरुद्ध इस अमर्यादित टिप्पणी के लिए विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई प्रारम्भ की जाये, अन्यथा यह समझा जायेगा कि इस विषय पर आपको कुछ नहीं कहना है।

और अब झारखण्ड विधानसभा के उप सचिव कमलेश कुमार दीक्षित का वह पत्र देखिये – जिसमें वह खुद झारखण्ड विधानसभा के उपसचिव सह जनसूचना अधिकारी हरेन्द्र कुमार साह को लिख रहा है- लीजिये यह पत्र आप सभी देखिये-

जिसमें साफ लिखा है कि जिस मामले की चर्चा की जा रही है, उस मामले में विधिक, विधि विभाग,  झारखण्ड सरकार से प्राप्त नहीं की गई है, और विजय कुमार झा के दाखिल आवेदन को अमान्य करार दे दिया गया है और यही सवाल विद्रोही24 ने उठाया कि जब आपने विधिक से इस मामले में चर्चा ही नहीं की और बिना उनके सलाह के आपने फैसले भी ले लिये तथा जिसने आवेदन दिया, आपने उसके आवेदन को अमान्य भी कर दिया, वह भी बिना उसकी राय जाने, साथ ही इसकी जानकारी भी आपने आवेदक को दे दी,यह कहकर कि आपके आवेदन को अमान्य कर दिया गया, लीजिये उसका भी सबूत सामने हैं –

तो फिर कोई पत्रकार, अब क्या आपसे आपका विचार लेगा, आपने तो सब कुछ कर ही दिया है और जब विद्रोही24 ने तार्किक ढंग से 1 सितम्बर को जनता के बीच में खोलकर लिख दिया तो झारखण्ड विधानसभा के लोग उबल गये, विद्रोही24 को वहां के सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी ने फोन कर सूचना दी कि इस मामले में आपके विरुद्ध संज्ञान ली जा रही हैं, मैंने उसी वक्त जवाब दिया –हम इसका स्वागत करते हैं, पत्रकारिता कर रहा हूं तो ये सब झेलना ही पड़ेगा, नहीं तो हमें राजनीतिज्ञों के पांवों के नीचे अपना सर रखकर सो जाना चाहिए।

और लीजिये ये आज विधानसभा से विशेषाधिकार हनन का नोटिस आ गया। मैं इसका स्वागत करता हूं और आज भी कहता हूं कि झारखण्ड विधानसभा सचिवालय यहां गलत है, झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष गलत है, उन्हें खुद विचार करना चाहिए, झूठी शान से अच्छा है कि खुद मंथन करें और लगे हाथों जब वे कुछ दिन पहले धनबाद गये थे तो अखबारों व चैनलों से उन्होंने क्या कहा था, वो भी जरा पढ़ ले,नीचे दे दिया हूं –

और कहेंगे तो विडियो भी उपलब्ध हैं, वह भी उन्हें भेज दूंगा, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि ढूलु का मामला विचाराधीन है, तो सवाल फिर भी है कि जब विचाराधीन हैं तो आपने विजय झा के आवेदन को अमान्य कैसे कर दिया? और जब मामला विचाराधीन है, तो फिर ये सब क्या है? ये विशेषाधिकार हम भी जानते है कि भारत के संविधान ने किसलिए दिये हैं? ये आपकी रक्षा के लिए नहीं दिये, आपके द्वारा किये जा रहे गलत कार्यों की रक्षा के लिए नहीं दिये गये हैं।

भारतीय संविधान एवं उनके मूल्यों की रक्षा के लिए दिये गये हैं, जिसके लिए आप जैसे राजनीतिज्ञ भारतीय संविधान में प्रदत्त शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं, जैसा कि इस मामले में आपने किया है। अंत में झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो यह भी जान लें कि जिस विधानसभा में अभी वे अध्यक्ष हैं, उस विधानसभा के प्रेस एडवाइजरी कमेटी का एक नहीं कई सालों तक एक सम्मानित सदस्य भी रहा हूं, ज्यादा जानकारी के लिए अपने पूर्व के विधानसभाध्यक्षों से सम्पर्क कर सकते हैं, मुझे भी विधानसभा के बारे में थोड़ा-बहुत जानकारी है, ऐसा नहीं कि हमें ज्ञान का अभाव है।

3 thoughts on “पहले गलती करेंगे, बाद में उसी गलती पर पर्दा डालने के लिए बयान देंगे और जब कोई उन्हें आइना दिखायेगा, तो वे विशेषाधिकार हनन की नोटिस थमायेंगे

  • चलिए.महतो जी को भी विशेषाधिकार का विशेष ज्ञान अब हो जाएगा..
    बिद्रोही ..स्वर को
    साधुवाद

  • RP Shahi

    हर साख पर उल्लू बैठा है, अंजीमें गुलिस्ताँ क्सा होगा !

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