पिता अस्पताल में, फिर भी दुसरे की सहायता करने में सबसे आगे हैं कुणाल, जनता का विश्वास जीतने में कुणाल के आगे रघुवर व सरयू भी फेल

मैं कभी भी भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला हूं, और न ही मिलने की चाहत है, पर कुणाल षाड़ंगी जैसे लोग मानवीय मूल्यों को लेकर जीते हैं, तो हमें बेहद खुशी होती है, क्योंकि ऐसे ही लोग इतिहास गढ़ते हैं, समाज को नई दिशा देते हैं। जरा देखिये न, जमशेदपुर में तो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी रहते हैं, रहने को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को धूल चटानेवाले सरयू राय भी रहते हैं,

मैं कभी भी भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला हूं, और न ही मिलने की चाहत है, पर कुणाल षाड़ंगी जैसे लोग मानवीय मूल्यों को लेकर जीते हैं, तो हमें बेहद खुशी होती है, क्योंकि ऐसे ही लोग इतिहास गढ़ते हैं, समाज को नई दिशा देते हैं।

जरा देखिये न, जमशेदपुर में तो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास भी रहते हैं, रहने को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को धूल चटानेवाले सरयू राय भी रहते हैं, और रहने को वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी रहते हैं, पर लोगों की आकांक्षा किससे पुरी हो रही हैं, जाहिर है कुणाल षाड़ंगी से और जब कुणाल षाड़ंगी या ऐसे किसी भी व्यक्ति की चर्चा होगी, जो मानवीय मूल्यों के लिए निकला हैं तो विद्रोही24 का भी फर्ज बनता है कि उसके इस कार्य को जनता के बीच रखें।

इधर लगातार मैं तीन दिनों से कुणाल षाड़ंगी के क्रियाकलापों की जानकारी अपने माध्यम से दे ही रहा था तो किसी ने हमें व्हाटसएप पर ये कहा कि क्या बात है – कुणाल षाड़ंगी पर आजकल आप कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। उसकी ये बाते और उसके बोलने का भाव हमें समझ आ गया, पर फिर भी क्या मैं कुणाल षाड़ंगी के बारे में इसलिए लिखना छोड़ दूं कि लोग मुझे गलत तमगा देने से नहीं चूकेंगे तो फिर मैं तो इस हालत में पत्रकारिता के साथ ही गलत कर दूंगा, लोगों को जो भी बोलना हैं बोले, आज मैं फिर बताउंगा कि कुणाल षाड़ंगी ने क्या किया है?

कमाल देखिये, झारखण्ड में सरकार महागठबंधन की। प्रशासन किसका महागठबंधन का और ये प्रशासन भी कुणाल षाड़ंगी के द्वारा किये गये ट्विटों पर ध्यान ही नहीं देता, बल्कि उसे पूरी करने में जी-जान लगा देता हैं, वह भी क्यों, क्योंकि उसे भी मालूम है कि संबंधित व्यक्ति अपने लिए नहीं, बल्कि उनके लिए ट्विट कर रहा हैं, जिनके बारे में कोई बोलना नहीं चाहता।

अब जरा देखिये, बहरागोड़ा के मास्रां गांव में जो कोरोना पीड़ित परिवार के साथ अमानवीय घटना घट रही थी, और उस अमानवीय घटना से उस पीड़ित परिवार को कुणाल के एक ट्विट की वजह से न्याय मिल गया तो क्या गलत है? अगर आजाद नगर के बारह मुस्लिम संगठनों कों आइसोलेशन सेंटर बनाने में प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल रही थी और उसे कुणाल षाड़ंगी द्वारा ये सब कुछ प्राप्त हो गया तो क्या गलत है?

अरे वहीं तो भाजपा और पहले भी भाजपा में रह चुके दिग्गजों रघुवर दास और सरयू राय का डेरा-डंडा हैं, वहां से वे फायदे भी उठा रहे हैं, वे लोग कर क्या रहे हैं, आखिर जनता चाहे जमशेदपुर की हो या बाहर की, वो कुणाल को ही क्यों ढूंढती हैं, जरा सोचियेगा, तो आपको सब पता लग जायेगा, क्योंकि शरीर के अंदर बैठा सच्चा मन कभी किसी को झूठ की ओर आकर्षित नहीं करता।

कल की ही बात हैं, हमें पता चला कि कुणाल षाड़ंगी ने गजब कर डाला है, वह भी तब जब उनके पिताजी की हालत खराब है, वह भी तब जब उनके पिता जी का हार्ट ब्लौकेज हैं, जिसके आपरेशन के लिए टीएमएच के डाक्टरों ने उन्हें कोलकाता के किसी बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी है, इस हालत में भी वह दूसरे को सहयोग करने में नहीं चूकता। जमशेदपुर की वरिष्ठ महिला पत्रकार अन्नी अमृता ठीक ही कहती है कि कीचड़ से भरी राजनीति में अगर कोई कमल है तो उसका समर्थन करने में कोई गुरेज नहीं और यहां तो सब समर्थन करते हैं क्योंकि जीतनेवाले जनप्रतिनिधि गायब हैं और जो हारा वह अनवरत सेवा में जुटा है सिर्फ सोशल मीडिया के माध्यम से नहीं बल्कि सशरीर उपस्थित होकर।

अब नया मामला देखिये और सोचिये…

असम प्रदेश में लागू प्रभावी लॉकडाउन के कारण वहाँ नौकरी कर रहे लोग अपने गृह राज्य की ओर पलायन कर रहे हैं। इसी क्रम में ईटानगर के यूनिवर्सिटी ऑफ़ जोलांग में पेशे से प्रोफेसर घनश्याम सिंह फंस गये थें। मंगलवार को राँची वापसी के लिए डिब्रूगढ़ से उनकी फ्लाइट तय थी। असम में लागू प्रभावी लॉकडाउन के कारण ठप यातायात व्यवस्था ने उनकी चिन्ताएं बढ़ा दी थी। एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए कैब सुविधा तक अनुपलब्ध थी।

ऐसे में प्रोफेसर घनश्याम सिंह के भाई रणवीर सिंह ने सोमवार रात उक्त समस्या से पूर्व विधायक और झारखंड प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी को अवगत कराया। कुणाल षाड़ंगी ने सम्बंधित मामले में त्वरित हस्तक्षेप किया और अपने ट्वीटर हैंडल के जरिये असम प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत बिस्वा शर्मा सहित असम पुलिस एवं असम की चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता देबश्री बोरा से मदद सुनिश्चित करने का निवेदन किया।

ट्विटर निवेदन पर संज्ञान लेकर देबश्री बोरा ने उक्त मामले में असम पुलिस के एडीजीपी हरदी सिंह से मदद पहुंचाने का निवेदन किया। एडीजीपी के स्तर से मिले त्वरित निर्देश के बाद डिब्रूगढ़ एसपी ने मामले में संज्ञान लिया और स्थानीय थाना की मदद से प्रोफेसर घनश्याम सिंह से संपर्क स्थापित हुआ जिसके बाद जरूरी सहयोग सुनिश्चित कर दी गई। मंगलवार सुबह लगभग दस बजे डिब्रूगढ़ पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से असम एडीजीपी एवं कुणाल षाड़ंगी को सूचित किया कि प्रोफेसर घनश्याम सिंह से समन्वय स्थापित करते हुए उन्हें वांछनीय सहयोग मुहैया करा दी गई है।

सुबह ही वे डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट के लिए रवाना हो चुके हैं। मदद मिलने के बाद प्रोफेसर के भाई रणवीर सिंह ने भी ट्विटर कर इसका पुष्टि किया। उन्होंने पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी को उल्लेखनीय सहयोग के लिए आभार जताया है। वहीं ससमय मदद पहुंचाने के लिए कुणाल षाड़ंगी ने भी असम पुलिस के एडीजीपी हरदी सिंह, डिब्रूगढ़ एसपी और चर्चित समाजसेवी देबश्री बोरा के प्रति कृतज्ञता प्रकट किया है।

Krishna Bihari Mishra

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