राजनीति

कॉमन मैन का नाटक

काहे का कॉमन मैन…

बोलने से अच्छा है, कॉमन मैन बनकर दिखाइये…

जो नेता होता है, वह बयानबीर होता है, वह आम जनता को निरा बेवकूफ समझता है, वह समझता है कि वह जनता को बेवकूफ बनाने और उसे दिमाग से पैदल करने के लिए बना है, पर वह भूल जाता है कि जनता तो जनता है, उसे जो अच्छा लगता है, वह समय आने पर निर्णय सुना देता है…

एक बार फिर रघुवर दास ने बयान बदला है, वहीं बयान बदला है, जहां उन्होंने कभी कहा था कि वे रघुवर दास यानी रघुवर के दास, हनुमान है, वे हनुमान की तरह जनता की सेवा करने के लिए राजनीतिक जीवन में आये है…

कल उसी जमशेदपुर में, उन्होंने यह कह दिया कि सीएम मतलब क़ॉमन मैन, मैं कॉमन मैन हूं। ठीक उसी तरह जैसे अरविन्द केजरीवाल स्वयं को आम आदमी बताते है, पर वो कितने आम आदमी है, वह दिल्ली की जनता समझ रही है, शायद दिल्ली नगर निगम के चुनाव में दिल्ली की जनता ने बता दिया कि उनके द्वारा आम आदमी का शिगूफा छोड़ने का मतलब, वहा की जनता खूब समझ चुकी है…

अब जरा झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को देखिये…

कनफूंकवों के सहारे राज्य चला रहे है और स्वयं को कभी हनुमान तो कभी कॉमन मैन बताते है, स्थिति यह है कि कनफूंकवों ने इन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है…

पिछले छह महीनों से तो राज्य को कबाड़ा बना दिया गया है…

कनफूंकवें अपने हिस्से का माल बटोरने में लग चुके है, और कॉमन मैन को पता ही नहीं है…

एक लाख रुपये की कंपनी और 14 करोड़ रुपये की ब्रांडिग का कारोबार, उक्त कंपनी को दे दिया जा रहा है और स्वयं को कॉमन मैन बताते है…

लॉ एंड आर्डर की स्थिति इतनी खराब है कि लड़कियां और महिलाएं सुरक्षित नहीं, बलात्कार और बलात्कार के बाद उनकी हत्या कर देना, यहां आम बात हो गयी है, स्वयं मुख्यमंत्री से जब न्याय मांगने के लिए पीड़ित पिता पहुंचता है तो वे उसे सरेआम बेइज्जत कर देते है, और कहते है कि वे आम आदमी है…

लूटेरों और चोरों की मस्ती है, रांची की सड़कों पर वे दिन-दहाड़े डकैती को अंजाम देते है और कहते है कि वे आम आदमी है…

जिस काम के लिए वे एमओयू करते-कराते है, उस एमओयू की सरेआम धज्जियां उड़ा दी जाती है और कहते है कि वे आम आदमी है, जरा पूछिये, मुख्यमंत्री से कि, मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चलाने के लिए जिस संस्थान से एमओयू कराया गया है, वह संस्थान उस एमओयू का पालन कर रहा है, और अगर वह एमओयू का पालन नहीं कर रहा है, तो फिर उसे ही टेंडर देने के लिए वे क्यों बेकरार है?  क्या राज्य की जनता इतनी बेवकूफ है?

मोमेंटम झारखण्ड के नाम पर करोड़ों की लूट मचाई गयी और सच्चाई यह है कि आकाश में उसी दौरान बेवजह उड़नखटोलों को उड़ाया गया, पर एक भी निवेशक इस मोमेंटम झारखण्ड में नहीं आया, अगर इसकी सही-सही जांच हो जाय तो समझ लीजिये, ये निवेशक घोटाला के रुप में सामने आयेगा। इसी दौरान कई विभागीय अधिकारियों ने अपने चहेतों को जमकर दोनों हाथों से रुपये लूटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। स्थिति यह रही कि कई अधिकारियों ने अपने बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों को इसमें झोंक दिया, तथा आर्थिक लाभ उठाये।

मिलावटखोरों ने राज्य की आम जनता के स्वास्थ्य को तबाह कर दिया और आज तक इन मिलावटखोरों के खिलाफ प्राथमिकी तक दर्ज नही की गयी, यहीं नहीं पूरा राज्य सांप्रदायिक ताकतों की आग में झूलस रहा है, पर सरकार के अधिकारी इस पर काबू पाने में असफल रहे है, स्थिति ऐसी है कि सांप्रदायिक ताकतों के हौसले इतने बुलंद है कि वे अब बारात को अपना निशाना बनाते है, महिलाओं को शौच जाने पर, उन्हें निशाना बनाते है, बस यात्रियों को निशाना बना रहे है और ऐसी घटियास्तर की सोच रखनेवालों पर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती।

राज्य में कई जगहों पर हालात ऐसे है कि कुछ ताकते बच्चा-चोरी के नाम पर अफवाह फैलाकर निर्दोषों के जान ले, ले रही है, पर सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

ऐसे कई प्रमाण है, जिससे पता चलता है, स्वयं को राज्य के कॉमन मैन के रुप में प्रस्तुत करनेवाले के बारे में, पर उन्हें नहीं मालूम कि राज्य की जनता का क्या कानसेप्ट है? यहां की जनता तो सिर्फ मौके के, इंतजार में है, जिस दिन मौका मिला, ये कॉमन मैन भी, उन नेताओं की लिस्ट में शामिल होंगे, जिन्हें जनता ने डेबार लिस्ट में डाल दिया है।