गंदगियों से बजबजाती, बिना किसी मेंटेनेंस, सीलन भरे दीवारों से पटे, एसी कमरे का मात्र 500 रुपये में लाभ उठाने के लिए झारखण्ड विधानसभा द्वारा चलाये जा रहे अतिथि निवास का लाभ लेना न भूलें…
जी हां मित्रों, अगर आप झारखण्ड की राजधानी रांची आ रहे हैं। आप की राजनीतिक दलों के नेताओं या मंत्रियों या विधायकों या झारखण्ड विधानसभा के अधिकारियों या झारखण्ड के धुआंधार पत्रकारों से तगड़ी बनती हैं। तो ऐसे में आपके लिए मेरा बड़ा ही सुंदर सुझाव है। आप गंदगियों से बजबजाती, बिना किसी रखरखाव, सीलन भरे दीवारों से पटे, एसी कमरे का मात्र पांच सौ रुपये में लाभ उठाने के लिए झारखण्ड विधानसभा द्वारा संचालित अतिथि निवास का लाभ लेना न भूलें।

यह अतिथि निवास रांची जंक्शन या हटिया रेलवे स्टेशन या रांची एयरपोर्ट से बड़ा ही नजदीक है। जो पुराने झारखण्ड विधानसभा परिसर में बड़े ही शान से चल रहा है। बस आपको करना सिर्फ इतना है कि आपको पैरवी तगड़ी होनी चाहिए। कमरा बहुत ही आसानी से मिल जायेगा। फिर आप बजबजाती गंदगियों के बीच रहिये।

सीलन से भरे दीवारों का सुगंध लीजिये। सीलन से भरे दीवारों के बीच ठंडे या गरम जल से स्नान भी करिये और जब वहां से निकलिये तो धूल भरे सोफे जो रंग-बिरंगे कंडीशन में जैसे-तैसे पड़े मिलेंगे, उस पर जाकर बैठिये। अगर मन नहीं करे बैठने का, तो कोई बात नहीं आपके लिए जो बेड हैं। उसी पर सोये रहिये और मन में यह भाव रखिये कि आप बैठे हुए हैं। इससे आपको दो फायदे मिलेंगे – पहला सोने और बैठने का दोनों फायदा साथ-साथ। ऐसा मौका आपको घर पर नहीं मिलेगा।

आपको जो रूम मिलेगा, उसमें आपको आलमारी भी दिखेगा। परन्तु उस आलमारी में आप अपना सामान या कपड़े नहीं रख सकते, क्योंकि ये आलमारी इतना मेन्टेन है कि उसके मेन्टेनेंस से आप प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे और आप अपने कपड़े जो बैग या अटैची में रखे हैं। उसी में रखे रहने को बाध्य होंगे।

अगर आप किसी को यहां मिलने के लिए बुलायेंगे तो आपका सम्मान इतना बढ़ जायेगा कि आपके मित्र या संबंधी जो आपसे मिलने आये हैं, जैसे ही आपके रूम का बाथरूम इस्तेमाल करेंगे, आपका स्टैंडर्ड जानकर, आपकी मैंटिलिटी अपने मन में बढ़िया से उतार लेंगे और फिर कभी कही मिलेंगे तो आपके लिए ऐसी ही व्यवस्था करेंगे। जहां गंदगी से बजबजाती और सीलन से भरे दीवार, बेढंगे सोफे मौजूद हो, क्योंकि आपको तो ऐसे में ही रहने की आदत है।
झारखण्ड विधानसभा द्वारा संचालित यह अतिथि निवास कैसा है। वो तो लिख ही दिया हूं। उसके दृश्य भी हमने यहां यथा संभव दे दिया है। आप खुद ही आकलन करें कि जो इसमें लिखा है, वो वैसा ही दिख रहा है, या कुछ और। हालांकि जिनसे हम कल यहां मिलने गये थे। उनसे जब पूछा कि आप यहां कैसे इस गंदगी में ठहरे हैं, तो उनका कहना था कि क्या करें, मजबूरी है, तीन दिन रहना है और जो काम है, वो यहीं आस-पास में हैं, इसलिए रहना पड़ रहा है, नहीं तो यह रहने लायक तो हैं नहीं और यह कहकर मुस्कुरा दिये।
अब जरा सोचिये कि दूसरे राज्यों से जब कोई अतिथि रांची आयेंगे और जब वे यहां के झारखण्ड विधानसभा द्वारा संचालित अतिथि निवास देखेंगे/ठहरेंगे, तो क्या मनोभाव लेकर जायेंगे, सबसे बड़ा सवाल तो यही है। क्या, ऐसे में झारखण्ड की इज्जत बचेगी या जायेगी? इस सवाल का जवाब कौन देगा?
