दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मिला मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों रूपी सोरेन ने प्राप्त किया यह महत्वपूर्ण सम्मान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिबू सोरेन को, मरणोपरांत, लोक कार्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय श्री सोरेन भारत के प्रमुख आदिवासी जननेता, समाज सुधारक तथा झारखंड आंदोलन के मुख्य शिल्पकारों में से एक थे। उन्होंने आदिवासी अधिकारों, सामाजिक न्याय तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया।

उन्होंने ऐतिहासिक ‘धान कटनी आंदोलन’ का नेतृत्व किया, जो महाजनी प्रथा के विरुद्ध आदिवासी भूमि अधिकारों की पुनर्प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण जन-आंदोलन बना। उन्होंने बांधों, खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए आदिवासी समुदायों को सशक्त स्वर प्रदान किया। यह पद्मभूषण सम्मान उनके दीर्घकालिक सामाजिक, राजनीतिक और आदिवासी अधिकारों के संघर्ष को मान्यता देता है। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया।

शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन के प्रमुख वास्तुकार होने के साथ-साथ आदिवासी समाज के हक, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनके योगदान ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में वंचित समुदायों को सशक्त करने की राह दिखाई।
सम्मान ग्रहण करते हुए रूपी सोरेन भावुक दिखीं और उन्होंने इसे पूरे झारखंड एवं आदिवासी समाज के लिए गर्व का क्षण बताया। इस अवसर पर देशभर के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने दिशोम गुरु को सम्मान अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया। सम्मान समारोह में शिबू सोरेन की बहू व गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। राजनीतिक पंडितों के शब्दों में यह सम्मान शिबू सोरेन के संघर्षमय जीवन और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
