राजनीति

दीपांकर ने झारखण्ड के राज्यपाल की भाषा को लेकर उठाए सवाल, CPIML राष्ट्रपति से वर्तमान राज्यपाल को वापस बुलाने की करेगी मांग

‘राज्यपाल रमेश बैस जिस भाषा में बात कर रहे हैं, यह झारखंड और झारखंड की चुनी हुई सरकार के साथ खिलवाड़ हैं। हम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू से वर्तमान राज्यपाल को झारखंड से वापस बुलाने की मांग करेंगे।’  इस वक्तव्य के साथ भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि स्थापना दिवस मनाने की ओर बढ़ रहे झारखंड में केंद्र की सत्ता की शह पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश लोकतंत्र के हित में नहीं है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की कार्रवाई के सवाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाकपा माले महासचिव ने कहा कि कानून अपना काम करे, लेकिन दलीय भेदभाव के साथ यह नहीं होना चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा नेताओं पर कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल करते हुए कहा कि झारखंड, मध्यप्रदेश या गुजरात में भ्रष्टाचार में स्पष्ट संलिप्तता के बावजूद भाजपा नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

भूमि बैंक के लिए आदिवासी बहुल इलाकों में चलाए जा रहे भूमि सत्यापन की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की बात करते हुए भाकपा माले महासचिव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें कारपोरेट बिचौलिया के रूप में काम नहीं करें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आदिवासियों की निजी, सामुदायिक एवं वन भूमि की बेदखली के खिलाफ है और हर स्तर पर भूमि आंदोलन का समर्थन करती है। दीपंकर भट्टाचार्य ने मनरेगा न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भुखमरी से पीड़ित झारखंड में मनरेगा को भ्रष्टाचार से मुक्त कर भूख और बेरोज़गारी लगाम लगाने की कोशिश होनी चाहिए।

भाकपा माले महासचिव ने रामगढ़ में 6 नवंबर को आयोजित झारखंड ग्रामीण मजदूर सभा (झामस) के केंद्रीय सम्मेलन के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि झामस के केंद्रीय सम्मेलन में झारखंड के गरीबों को संगठित कर जल, जंगल जमीन के मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का आह्वान किया जाएगा। प्रेस वार्ता में भाकपा माले राज्य सचिव मनोज भक्त भी उपस्थित थे।