रांची के उपायुक्त से स्कूल की शिकायत करना छात्रा सिद्धि सिंह को इतना महंगा पड़ गया कि विवेकानन्द विद्या मंदिर ने उसे अपने यहां पढ़ने पर ही रोक लगा दी? क्या रांची DC को नहीं चाहिए …
विवेकानन्द विद्या मंदिर सेक्टर टू धुर्वा रांची की छात्रा सिद्धि सिंह सभी से गुहार लगा रही है कि उसका नामांकन विवेकानन्द विद्या मंदिर में ले लिया जाय, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। लेकिन कोई उसकी सुन नहीं रहा। सिद्धि सिंह का कसूर क्या है? उसके पिता गलत का विरोध करते हैं। यही गलत का विरोध सिद्धि सिंह के लिए भारी पड़ गया। हुआ ऐसा कि विवेकानन्द विद्या मंदिर द्वारा स्कूल की फीस बढ़ाई जा रही थी तथा वहां के सिलेबस का विरोध सिद्धि सिंह के पिता ने कर दिया।
साथ ही इसकी शिकायत सिद्धि सिंह के पिता ने रांची के उपायुक्त और स्कूल प्रबंधन से कर दिया। जो स्कूल को नागवार गुजरा। स्कूल ने नाराज होकर सिद्धि सिंह और उसके पिता को सबक सिखानी चाही और उसने सबक सिखा भी दिया। सिद्धि सिंह का नामांकन करने से ही इनकार कर दिया। चार महीने बीत गये। सिद्धि सिंह रांची के उपायुक्त, रांची के सीबीएसई के अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई। लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।
अब वो स्कूल नहीं जा रही, घर में ही बैठी रहती है। आखिर सिद्धि सिंह के पढ़ाई पर कुंडली मारकर किसने बैठने की कोशिश की। क्या अब बच्चे की पढ़ाई इस प्रकार से रोकी जायेगी। सवाल यह है। क्या रांची के उपायुक्त और स्कूल में बैठे उच्चाधिकारियों को नहीं चाहिए कि सिद्धि सिंह को पढ़ाई में बाधा न पहुंचे, इसका विकल्प तलाशा जाये। सिद्धि सिंह एक वीडियो बनाकर सभी से गुहार लगा रही है। यह वीडियो विद्रोही24 तक पहुंची है। आशा है, सिद्धि सिंह को न्याय मिलेगा। सिद्धि सिंह ने अपने वीडियो में निम्नलिखित बाते कहीं हैं…
“मैं सिद्धि सिंह, विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर 2 धुर्वा रांची की छात्रा हूं। मेरा कसूर मात्र इतना है कि स्कूल के द्वारा जबरन बढ़ाई जा रही फीस और सिलेबस का विरोध मेरे पिता के द्वारा किया गया, और इसकी शिकायत उपायुक्त रांची और स्कूल से किया गया। बदले में आज चार महीना बीत जाने के बाद भी स्कूल ने मेरा एडमिशन नहीं लिया। जबकि मेरे द्वारा लगातार 2 – 3 महीने तक बकाया फीस अकाउंट में जमा करने के लिए स्कूल दौड़ लगाया गया।
लेकिन मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा कोई निष्कर्ष नहीं निकला, इसकी शिकायत DC रांची, CBSE और अन्य सभी जगहों पर किया। लेकिन किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया, जबकि मेरे द्वारा DC रांची, DSE रांची, CBSE रांची के ही आदेशों का पालन किया जा रहा था। अब मैं स्कूल नहीं जाती, घर में ही रहती हूं, सिस्टम में बैठे लोगों ने मिलकर मेरा भविष्य खराब कर दिया। माननीय उच्च न्यायालय झारखंड से अनुरोध है कि मुझे इंसाफ दिलाया जाए।
सिद्धि सिंह
छात्रा, विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर 2 धुर्वा रांची।”
