अपनी बात

बड़े पैमाने पर पदों के रिक्त होने के बावजूद, कार्मिक विभाग में पिछले एक साल से पदस्थापन के इंतजार में बैठे हैं 60-65 प्रशासनिक अधिकारी, सरकार इन्हें बैठे-बैठाये दे रही लाखों के वेतन, कोई काम नहीं ले रही

झारखण्ड के कार्मिक विभाग में डीडीसी, एसडीओ, एडीएम स्तर के 60-65 प्रशासनिक अधिकारियों का समूह प्रतिदिन कार्मिक विभाग के मुख्यालय में आते हैं, बैठते हैं और चले जाते हैं। इनका प्रतिदिन का काम यही है। ये कोई काम नहीं करते और न सरकार ही इनसे कोई काम लेना चाहती है। ये सारे के सारे अधिकारी पदस्थापन की प्रतीक्षा में आस लगाये बैठे हैं कि कब उन पर सरकार की नजर जायेगी और वे जिस कार्य के लिए नियुक्त हुए हैं। उस कार्य में अपनी सेवा देना शुरु करेंगे।

सूत्र बताते हैं कि इनमें से कई अधिकारी पिछले पांच-छह महीने से पदस्थापन के इंतजार में हैं, जबकि कई इनमें से पिछले 12-13 महीने से इंतजार में हैं। लेकिन कोई इन पर ध्यान नहीं दे रहा। जबकि सच्चाई यह है कि पूरे राज्य में इनके लायक कई ऐसे पद हैं, जो बड़ी संख्या में रिक्त हैं। लेकिन उन पदों पर इनकी नियुक्ति क्यों नहीं हो रही। इस प्रश्न का जवाब किसी के पास नहीं हैं।

सूत्र यह भी बताते हैं कि राज्य के वित्त विभाग का सर्कुलर कहता है कि जिस दिन इन अधिकारियों को कार्मिक विभाग में योगदान करने को कहा जाता है। उसके ठीक पन्द्रह दिनों के अंदर पदस्थापन की प्रक्रिया प्रारम्भ कर देनी चाहिए, लेकिन इन लोगों के साथ ऐसा हो ही नहीं रहा। आखिर इनकी पदस्थापन की प्रक्रिया कब प्रारंभ होगी? इस सवाल का जवाब कौन देगा?

ज्ञातव्य हैं कि इन अधिकारियों का वेतन डेढ़ लाख से लेकर दो लाख रुपये तक है और सरकार बिना काम के ही वेतन इन्हें थमाए जा रही है। पहले तो इनको एटेडेंस भी बनाना पड़ता था। लेकिन अब इन्हें एटेंडेंस बनाने की आवश्यकता भी नहीं होती। ये रांची मुख्यालय में भटक रहे हैं कि कब उनके लिए कोई सूचना प्राप्त हो जाये और वे योगदान दें।

दूसरी ओर, राज्य में कई ऐसे विभाग भी हैं, जिन विभागों में कोई अधिकारी ही नहीं हैं और उनका काम दूसरे अधिकारियों पर थोप दिया गया है, जिससे काम की गुणवत्ता तो प्रभावित हो ही रही हैं, साथ ही जो काम एक दिन में होने को हैं, उस काम को होने में महीनों तक लग जा रहे हैं।

कई लोग तो इन पर चुटकी भी लेते हैं कि भाई अच्छा ही तो हैं, कि सरकार इनसे काम नहीं ले रही। बैठे-बैठाए, वेतन दे रही है। अच्छा है कि ये मासिक वेतन उठाते रहे और जहां मन करें, घूमते रहे, जब इनको मोबाइल पर सूचना मिलेगी तो काम करने आ जायेंगे। इससे बढ़िया काम और क्या हो सकता है, नहीं तो जब सेवा इनसे लिया जायेगा तो फिर इन्हें अपने घर-परिवार के लिए भी छुट्टी नहीं मिलेगी। तो सरकारी सेवा का इससे बढ़िया-फायदा और क्या हो सकता है, इन्हें मजे लेने को कहिये।

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