जनाधार खो चुके जलेश्वर को कांग्रेसियों ने दी संजीवनी, राहुल से मिलाकर कांग्रेसियों ने अपना पीठ थपथपाया

अगर कांग्रेस ये सोच रही है कि उसने जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो को कांग्रेस पार्टी में मिला लिया, और इससे उसकी ताकत बढ़ जायेगी तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि जलेश्वर महतो का न तो जनाधार है और न ही वे वर्तमान में स्वयं के बलबूते पर एक विधानसभा की सीट भी जीतने की ताकत रखते हैं, हां कांग्रेस की ताकत पर, आनेवाले समय में, गठबंधन के रुप में अगर वे कहीं से उम्मीदवार बन जाते हैं तो उसकी बात अलग है।

अगर कांग्रेस ये सोच रही है कि उसने जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो को कांग्रेस पार्टी में मिला लिया, और इससे उसकी ताकत बढ़ जायेगी तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि जलेश्वर महतो का न तो जनाधार है और न ही वे वर्तमान में स्वयं के बलबूते पर एक विधानसभा की सीट भी जीतने की ताकत रखते हैं, हां कांग्रेस की ताकत पर, आनेवाले समय में, गठबंधन के रुप में अगर वे कहीं से उम्मीदवार बन जाते हैं तो उसकी बात अलग है।

ऐसे भी जनता दल यू का आज के दिनों में पूरे झारखण्ड में कही भी जनाधार नहीं है, चूंकि जनता दल यू जातीयता के आधार पर झारखण्ड में राजनीति करती थी, उसके नेता कुरमी जाति से आते थे, तथा नीतीश कुमार भी कुरमी के नाम पर अपना भाग्य यहां आजमा लिया करते थे, तथा भाजपा कुरमी के नाम पर कही वोट बिदक न जाये, इसलिए जदयू से कभी-कभी समझौता के नाम पर विधानसभा की कुछ सीटें दे दिया करती थी, पर आज की स्थिति में न तो झारखण्ड की कुरमी जनता नीतीश कुमार को अपना नेता मानकर वोट कास्ट करती हैं और न ही कुछ ऐसा हैं, क्योंकि झारखण्ड में कुरमी के नाम पर कई नेता हो गये हैं, जो विभिन्न दलों में अच्छी खासी ताकत रखते हैं तथा उनका जनाधार भी हैं।

जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में जलेश्वर महतो का अपनी पार्टी पर ही पकड़ नहीं था और न ही पार्टी का कोई अस्तित्व भी है, संगठन भी शून्य ही था। ले-देकर प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर जलेश्वर महतो ही थे, वह भी जदयू के प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण, परन्तु ऐसा भी नहीं कि उनके आने या जाने से जदयू का बहुत बड़ा नुकसान हो गया। ऐसे भी बाघमारा विधानसभा से कई बार जदयू के टिकट से चुनाव जीते, जलेश्वर महतो को भाजपा के दबंग नेता व वर्तमान में यौन शोषण के आरोपी ढुलू महतो ने उनकी राजनीतिक ताकत ही खत्म कर दी।

ऐसे में उनका जदयू से पलायन सुनिश्चित था, वे भी कही ठिकाना ढुंढ रहे थे, कि कोई ठिकाना मिल जाये, पर जलेश्वर महतो के कांग्रेस में जाने से, जो पूर्व के कांग्रेस के प्रभावशाली नेता जो इस इलाके में हैं, वे कहीं दूसरे दल का दामन न थाम लें, और अगर ऐसा होता हैं तो ले-देकर नुकसान कांग्रेस को ही है, क्योंकि जिस नेता ने जलेश्वर महतो को राहुल गांधी से मिलवा दिया, तथा स्वयं को महान बनाने की कोशिश की हैं, वो आनेवाले समय में कांग्रेस का ही बंटाधार कर देगा। शायद उसे इस बात की जानकारी ही नहीं।

Krishna Bihari Mishra

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