झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की “नीतीश प्रतिज्ञा”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पलटी क्या मारी, अपने झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके फैन हो गये। उन्होंने कल गढ़वा में “नीतीश प्रतिज्ञा” की है।  नीतीश प्रतिज्ञा समझते है कि नहीं, अगर नहीं समझते हैं तो हम आपको समझाते है, कभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एक प्रतिज्ञा की थी, कि अगर वे बिहार के सभी गांवों में बिजली नहीं पहुंचाया तो आनेवाले विधानसभा चुनाव में बिहारवासियों के आगे वोट मांगने नहीं आयेंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पलटी क्या मारी, अपने झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके फैन हो गये। उन्होंने कल गढ़वा में “नीतीश प्रतिज्ञा” की है।  नीतीश प्रतिज्ञा समझते है कि नहीं, अगर नहीं समझते हैं तो हम आपको समझाते है, कभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एक प्रतिज्ञा की थी, कि अगर वे बिहार के सभी गांवों में बिजली नहीं पहुंचाया तो आनेवाले विधानसभा चुनाव में बिहारवासियों के आगे वोट मांगने नहीं आयेंगे। नीतीश कुमार ने इस प्रतिज्ञा का अक्षरशः पालन किया। आज बिहार के करीब-करीब सारे गांवों में बिजली दिखाई पड़ती है और लोग नीतीश कुमार की बातों पर विश्वास भी करते हैं।

अपने मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी कुछ ऐसा ही गढ़वा में प्रतिज्ञा किया है, ठीक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह। यहीं कारण है कि उनकी प्रतिज्ञा नीतीश प्रतिज्ञा कहलाने का हक प्राप्त कर चुकी है। राज्य सरकार द्वारा कृपा पात्र अखबारों ने रघुवर के प्रण को ही आज हेडिंग बनाया है। हेडिंग है – “2018 तक 24 घंटे बिजली नहीं दे सका, तो नहीं मागेंगे वोटः रघुवर”  जबकि राज्य की सच्चाई यह है कि इनके उर्जा विभाग के होनहार अधिकारियों ने राज्य की ऐसी स्थिति कर दी है कि राजधानी रांची में लोग बिजली के लिए तरसते है, बिजली जाने का तो समय तय है, ये बिजली कब आयेगी, कहां नहीं जा सकता। यहीं हाल कोयलांचल धनबाद और जमशेदपुर का है। पलामू-गढ़वा की तो बात करना ही बेमानी है। अन्य शहरों की अगर बात करें, तो वहां बिजली का दर्शन ही नहीं होता। गांवों की तो स्थिति और बदतर हैं।

जिन्हें बिजली की स्थिति को ठीक करना है, वे मस्ती में है, उनको इससे कोई लेना-देना ही नहीं है। पूरा ऊर्जा विभाग मस्ती का पाठशाला बन गया है। जो कल तक एलइडी बल्ब बेचा करते थे, जनता उनको ढूंढ रही हैं, क्योंकि उनके एलइडी बल्ब फ्यूज हो चुके है, उसे बदलवाना है, पर कल तक ताल ठोककर एलइडी बल्ब बेचनेवाले गायब है, क्योंकि वे वारंटी पीरियड में फ्यूज हो चुके बल्बों को बदलने को तैयार नहीं है, आखिर क्यों तैयार नहीं है?  जनता को आपने धोखा क्यों दिया?  इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। यानी जो सरकार एक मामुली एलइडी बल्ब जनता को उपलब्ध नहीं करा सकती, वह कैसे-कैसे जनता को सब्जबाग दिखाती है, उसका एक नमूना है कल गढ़वा में मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा दिया गया भाषण।

जब मुख्यमंत्री रघुवर दास ये नीतीश कुमार टाइप डॉयलॉग बोल रहे थे, तब वहीं पर कुछ अधिकारी आपस में बात भी कर रहे थे। उनका कहना था कि बेचारा नेता है, इसका काम है बोलना और नेता बोले और वहीं कर दें तो फिर वो नेता कैसा?

कमाल है, झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास का। वे हर जगह, हर बार यहीं डायलॉग मारेंगे। 2018 तक राज्य के 32 हजार गांवों के 68 लाख घरों में सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध करा देंगे, पर कैसे करेंगे, कोई विजन है।

आपके पास जो अधिकारी है, वे निकम्मे हैं, वे बैठकर कुर्सी तोड़ते हैं, ऐसे निकम्मों से आप कैसे राज्य में वह चीज स्थापित कर सकते हैं? जिसकी आप बात कर रहे हैं, केवल नीतीश प्रतिज्ञा कर लेने से नहीं होगा, उन प्रतिज्ञाओं को अमल में लाना भी होगा, पर कनफूंकवों के पीठ पर बैठकर आप सोचते है कि आप नीतीश प्रतिज्ञा पूरी कर लेंगे, ये असंभव सा है, क्योंकि मोमेंटम झारखण्ड का हाथी तो आप उड़ा ही दिये है, अब नया पैतरा नीतीश प्रतिज्ञा आ गया। देखते है कि आप क्या करते है, हमको देखना ही है न। 2018 आने में अब कितना समय ही बचा है।

Krishna Bihari Mishra

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Wed Aug 30 , 2017
राज्य की रघुवर सरकार ने आज सभी अखबारों में एक विज्ञापन निकाला है। विज्ञापन कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से निकाली गई है। विज्ञापन में राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड द्वारा आवश्यक सूचना प्रसारित की गयी है। सूचना है “सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि गौवंशीय पशु(गाय, बछड़ा, बछिया, सांड या बैल), ऊंट आदि को काटना एवं कुर्बानी देना या इस हेतु खरीदना, बेचना, परिवहन करना, संग्रह करना आदि संज्ञेय अपराध है।

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