न्यूज18 के कार्यक्रम ‘शूरवीर’ से CM रघुवर और DGP ने खुद को अलग किया, कार्यक्रम पर लगा प्रश्नचिह्न

कल यानी 29 अक्टूबर को रांची के होटल रेडिशन ब्लू में न्यूज 18 की ओर से कार्यक्रम ‘शूरवीर’ होना था। जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास और पुलिस महानिदेशक कमल नयन चौबे को शामिल होना था। लेकिन ऐन मौके पर दोनों महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया, फिर क्या था? पूरे कार्यक्रम को ही स्थगित कर देना पड़ा और पूरे कार्यक्रम की किरकिरी हो गई, जो इस कार्यक्रम के लिए तैयारियां की गई थी,

कल यानी 29 अक्टूबर को रांची के होटल रेडिशन ब्लू में न्यूज 18 की ओर से कार्यक्रम ‘शूरवीर’ होना था। जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास और पुलिस महानिदेशक कमल नयन चौबे को शामिल होना था। लेकिन ऐन मौके पर दोनों महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया, फिर क्या था? पूरे कार्यक्रम को ही स्थगित कर देना पड़ा और पूरे कार्यक्रम की किरकिरी हो गई, जो इस कार्यक्रम के लिए तैयारियां की गई थी, उस पर भी पूरी तरह से पानी फिर गया।

यह पहला मौका है कि किसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चैनल द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम से सीएम रघुवर दास और राज्य के पुलिस महानिदेशक ने खुद को अलग किया, जिससे पूरे कार्यक्रम की ही हवा निकल गई। जिसको लेकर रांची से लेकर हैदराबाद तक इस कार्यक्रम के स्थगित होने की तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, लोग आश्चर्य इस बात पर कर रहे हैं कि आम तौर पर मीडिया के साथ गलबहियां कर चलनेवाले सीएम रघुवर दास और डीजीपी ने ऐन मौके पर इस कार्यक्रम से खुद को क्यों अलग किया?

इसका मतलब हैं कि मामला बहुत ही गंभीर है, साथ ही न्यूज 18 जैसे चैनल के लिए एक बहुत बड़ा झटका भी, कुछ लोग तो यह भी कह रहे है कि पहली बार राज्य के सीएम रघुवर दास और पुलिस महानिदेशक ने किसी को झटका दिया हैं, ऐसे में अगर यह परम्परा बन गई तो बहुत सारे राष्ट्रीय चैनल व क्षेत्रीय चैनल झटका खाने को तैयार भी रहे। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि सीएम रघुवर दास और पुलिस महानिदेशक ने इस प्रकार के कार्यक्रम से खुद को अलग कर एक बहुत ही अच्छा संदेश दिया हैं, जिसको सबक लेना होगा, वे सबक सीखेंगे और जिनका सबक नहीं सीखना हैं, वे दुबारा ऐसे ही झटका खाने को तैयार रहे।

सूत्र बता रहे हैं कि इस कार्यक्रम में जिन पुलिस पदाधिकारियों को ‘शूरवीर’ के नाम से सम्मानित होना था, उसकी सूची पुलिस मुख्यालय से किसी ने संबंधित चैनल को उपलब्ध करा दी थी, ये वो लोग थे, जो किसी न किसी प्रकार से वरीय पुलिस पदाधिकारियों के चहेते थे, जिस पर राज्य के पुलिस एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी, तथा इस प्रकार के कार्यक्रम से मुख्यमंत्री रघुवर दास को अलग रहने को कहा था।

पुलिस एसोसिएशन के इस आपत्ति को मुख्यमंत्री के साथ चलनेवाले एवं उनके आगे-पीछे करनेवालों ने गंभीरता से लिया तथा सीएम रघुवर को स्पष्ट संदेश दिया कि ऐसे कार्यक्रम से फिलहाल दूर रहने में ही भलाई हैं, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं, अगर पुलिस एसोसिएशन ने भौंहे कड़ी कर दी, तो चुनाव में दिक्कत आ सकती है, और इस प्रकार से सीएम रघुवर ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर दिया।

जैसे ही इस बात की जानकारी पुलिस महानिदेशक को मिली, पुलिस महानिदेशक ने भी कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया, पुलिस महानिदेशक के इनकार के बाद जिन्हें शूरवीर का पुरस्कार पाना था, वे स्वतः ही अलग हो गये, ऐसे में न्यूज 18 के इस कार्यक्रम को स्थगित करने के सिवा दुसरा कोई विकल्प ही नहीं रह गया था, अतः आनन-फानन में सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई। लोग बताते है कि इसी प्रकार का कार्यक्रम बिहार तथा अन्य जगहों पर हुआ था, इसलिए झारखण्ड में भी इस कार्यक्रम को रखने पर न्यूज 18 वालों ने विचार किया था।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो वे कहते है कि इस प्रकार के कार्यक्रम से ये न्यूज चैनल वाले बताना क्या चाहते हैं, समझ नहीं आ रहा। एक ओर ये कोई ऐसा दिन नहीं होता, जिस दिन ये झारखण्ड पुलिस के खिलाफ बयानबाजी नहीं करते और अचानक इन्हें इन पुलिस में से शूरवीर कैसे नजर आने लगे? अरे ये सीधा ये क्यों नहीं कहते कि ये इस प्रकार के कार्यक्रम कर, वे पुलिस के उच्चाधिकारियों से ये अपना पी-आर बनाना चाहते हैं।

राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना है कि अगर ये चैनल वाले शूरवीर का पुरस्कार दे भी दें, तो इनके द्वारा दिये गये पुरस्कारों से क्या लाभ? कोई बताएं कि इन चैनलवालों द्वारा दिये गये पुरस्कार से कोई विशेष लाभ मिलता हो, और जब विशेष लाभ मिलता ही नहीं, तो इस प्रकार के आयोजन से कौन किसे मूर्ख बना रहा हैं, क्या राज्य के पुलिस इतने मूर्ख हैं कि इन्हें अब चैनलवाले शूरवीर का पुरस्कार देंगे तो शूरवीर कहलायेंगे?

इससे तो अच्छा रहेगा कि वे अपनी अंतरात्मा से पूछे कि वे सचमुच के शूरवीर हैं या कागजी, पता चल जायेगा। राजनीतिक पंडितों ने कहा कि जो होता हैं, अच्छा ही होता हैं, यह कार्यक्रम स्थगित हो गया, ठीक ही हुआ। देर से ही सही अगर मुख्यमंत्री रघुवर दास या पुलिस महानिदेशक को सद्बुद्धि आई तो इसकी प्रशंसा करनी ही होगी।

Krishna Bihari Mishra

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