CM जनसंवाद कर रहा BJP IT सेल का काम, IPRD के नाक के नीचे हो रहा आचार संहिता का खूलेआम उल्लंघन

हद हो गई, पूरे राज्य में छोटी-छोटी घटनाओं पर आम लोग आचार संहिता के उल्लंघन में पिसे जा रहे हैं, पर जिन पर आचार संहिता को अक्षरशः जमीन पर उतारने का भार हैं, जिनका काम ही हैं, प्रचार-प्रसार कर चुनाव आयोग द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करना-करवाना, वे ही आचार संहिता का खूलेआम उल्लंघन करा रहे हैं, वह भी अपने नाक के नीचे।

हद हो गई, पूरे राज्य में छोटी-छोटी घटनाओं पर आम लोग आचार संहिता के उल्लंघन में पिसे जा रहे हैं, पर जिन पर आचार संहिता को अक्षरशः जमीन पर उतारने का भार हैं, जिनका काम ही हैं, प्रचार-प्रसार कर चुनाव आयोग द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करना-करवाना, वे ही आचार संहिता का खूलेआम उल्लंघन करा रहे हैं, वह भी अपने नाक के नीचे।

अब चुनाव आयोग ही बताएं कि जब राज्य का सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के अंतर्गत चल रहा मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र ही भाजपा आइटी सेल के काम में लग गया हो, वहां आदर्श आचार संहिता की क्या धज्जियां नहीं उड़ रही। क्या इसके दोषियों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, आखिर ये कौन लोग हैं, जो भाजपा के चुनाव प्रचार-प्रसार में ज्यादा और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाने में अपनी शान समझ रहे हैं।

आम तौर पर एक सामान्य व्यक्ति भी जानता है कि चाहे राज्य सरकार का अधिकारी हो या कर्मचारी या दैनिकभोगी या मानदेय पर ठेके पर रखा गया कोई कर्मचारी ही क्यों न हो, अगर वह व्यक्ति राज्य सरकार द्वारा किसी भी प्रकार से राशि प्राप्त कर रहा हैं, तो वह किसी भी दल या नेता का प्रचार-प्रसार किसी भी प्रकार से नहीं कर सकता, पर यहां तो सूचना एवं जनसम्पर्क में चल रहा मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में बहार ही बहार है, यहां काम कर रहे लोगों से जमकर भाजपा आइटी सेल का काम लिया जा रहा है।

यहां काम कर रहे युवा भी क्या करेंगे, दो रोटी की लालच में वे सब कर रहे हैं, जिस काम करने को कानून इजाजत नहीं देता, हम आपको बता दें कि विद्रोही 24.कॉम के पास पक्के सबूत आ चुके हैं, जिससे साफ पता चलता है कि यहां मार्निंग और इवनिंग शिफ्ट में भाजपा के लिए ट्विट हैंडल करवाये  गये हैं और करवाये जा रहे हैं।

यहां कार्यरत एक महिलाकर्मी तो खुद स्वीकार की है कि कुछ दिन पहले तो लगातार तीन दिनों तक यानी सुबह 9 बजे से लेकर सायं पांच बजे तक भाजपा आइटी सेल का काम यहां से लिया गया। जब उक्त महिलाकर्मी से पूछा गया कि यह सब कैसे संभव हुआ, क्या जनसंवाद केन्द्र में जो और काम होता है, उसे बंद कर दिया गया था, उक्त महिलाकर्मी ने कहा कि जनसंवाद में काम क्या होगा, तीन दिनों तक फोन का रिसीवर उठा कर रख दिया गया था, और लोग भाजपा के लिए टिवटर हैंडल करते रहे।

अब सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र से भाजपा आइटी सेल का काम कौन ले रहा है? वह कौन व्यक्ति है कि राज्य सरकार से मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चलाने का पैसा लेता है और भाजपा आइटी सेल का काम भी इससे ले रहा है? आखिर वह कौन अधिकारी है, जिसने उक्त व्यक्ति को मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र का काम न लेकर, भाजपा आइटी सेल का काम करने का अधिकार दे दिया? आखिर जिस काम के लिए ये युवा बहाल हुए हैं, वह काम न कराकर भाजपा आइटी सेल का काम कराने का दोषी कौन है?

हम आपको बता दे कि विद्रोही 24.कॉम को जो सबूत मिले हैं, उससे यह भी पता चलता है कि वहा आज भी महिलाकर्मियों को टार्चर किया जा रहा है, जिस भय से कोई बोलता नहीं, आदेश का सिर्फ पालन करता है, यहीं नहीं पूर्व में जब मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय द्वारा मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र पर पूर्व में लगे घिनौने आरोपों पर तीन सदस्यीय समिति ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी थी, उस जांच रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र था कि जो कम्पनी मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चला रही हैं, वह इन महिलाकर्मियों से बाहर के काम भी लेती है, जो गलत है।

आज भाजपा आइटी सेल के लिए इन कर्मियों द्वारा काम लिया जाना, साफ बताता है कि यहां चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तिथियों की घोषणा के बावजूद किस प्रकार आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा हैं? क्या राज्य सरकार ऐसे लोगों पर कार्रवाई करेगी? क्या चुनाव आयोग इस बात का संज्ञान लेगा? क्या राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टियां, इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के पास जायेगी, तथा दोषियों पर कार्रवाई करने को कहेगी, या आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन इसी तरह चलता रहेगा और लोग लोकतंत्र का माखौल उड़ता देखते रहेंगे?

Krishna Bihari Mishra

Next Post

मोदी जी, झारखण्ड को लेकर जहां-तहां झूठ न बोलें, नहीं तो झारखण्ड में BJP को भारी नुकसान होगा

Sun Apr 7 , 2019
भाई कमाल है, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ये तो पता लगा लेते है कि किस सांसद की अपने इलाके में क्या स्थिति हैं? वह जीत पायेगा या नहीं, और उसके हिसाब से वे उसका टिकट भी कटवा देते हैं, और नये लोगों तथा दलबदलूओं को देखते ही देखते टिकट थमा देते हैं, पर जिस राज्य में उनकी सरकारें चल रही हैं, पता नहीं उसके लेखा-जोखा में धोखा कैसे खा जाते हैं? कुछ राजनीतिक पंडित तो कहते है कि...

You May Like

Breaking News