स्टेन स्वामी के पक्ष में CM हेमन्त के बयान से वामदल, जनसंगठन और इसाई समुदाय में हर्ष की लहर, भाजपा ने की हेमन्त के बयान की आलोचना

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रांची के नामकुम बगइचा से दो दिन पूर्व फादर स्टेन स्वामी की NIA द्वारा गिरफ्तारी और उसके बाद इस मुद्दे पर स्टेन के पक्ष में राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा आये बयान से राज्य के इसाई समुदाय, वामपंथी राजनीतिक दलों, वाम जनसंगठनों में हर्ष की लहर देखी जा रही है, ये लोग इतने प्रसन्न है कि केन्द्र सरकार से इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई में सड़कों पर उतरने के मूड में हैं।

स्थिति ऐसी हो गई कि फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी के खिलाफ रांची ही नहीं, अब पटना-जमशेदपुर के भी इसाई समुदाय, वामपंथी राजनीतिक दलों का समूह, वाम जनसंगठनों का समूह सड़कों पर उतर गया। यही नहीं, अगर फादर स्टेन स्वामी की जेल में रहने का समय बढ़ता है, तो इन सभी दलों-संगठनों ने एक निर्णायक लड़ाई लड़ने का संकल्प ले लिया है और इसके लिए सोशल साइट का जमकर सहारा भी लिया जा रहा है।

अब चूंकि इस मुद्दे पर सीएम हेमन्त सोरेन का साथ इन सभी को मिल गया है तो स्वाभाविक है, झारखण्ड में फादर स्टेन स्वामी के पक्ष में चल रहे इस आंदोलन को सरकार द्वारा हवा भी मिलती रहेगी, कांग्रेस पहले से ही फादर स्टेन स्वामी के बचाव को लेकर बयान देती रही है, इधर झामुमो के भी आ जाने से मामला राजनीतिक रुप धारण कर रहा है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता का आज अखबारों में बयान है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और झामुमो को फादर स्टेन स्वामी पर विधवा प्रलाप बंद करने को कहा है। भाजपा का कहना है कि महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव मामले में फादर स्टेन स्वामी की संलिप्तता उजागर हो चुकी है। फादर स्टेन स्वामी अर्बन नक्सलवाद के प्रमुख सूत्रधारों में से एक है।

राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पक्ष में आये बयान से वे लोग भी सड़कों पर आ रहे हैं, जो कल तक पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के शासनकाल में उन पर लगाये गये देशद्रोह के आरोप और कानूनी पचड़ें में पड़ने के झंझट से तिलमिला गये थे और बार-बार मुख्यमंत्री रघुवर दास से उनके लोग मिलकर इस केस को हटाने की मांग कर रहे थे, पर रघुवर दास कहा ऐसे लोगों की सुननेवाले, वे सुने ही नहीं, और जैसे ही हेमन्त की सरकार आई।

पहले कैबिनेट में ही हेमन्त ने घोषणा कर दी कि देशद्रोह का मुकदमा झेल रहे लोगों से केस उठा लिया जायेगा, पर सूत्र बताते है कि अभी भी सभी का केस नहीं उठाया गया है, कुछ अड़चने हैं, जिसके कारण पूर्णतः सभी से केस नहीं उठाया गया, जबकि वर्तमान के आंदोलन में वे लोग आज भी प्रमुखता से आगे हैं, जिन्होंने देशद्रोह के मुकदमें के बावजूद भी न तो वे रघुवर सरकार के आगे झूके और न ही माफी मांगी।

फादर स्टेन स्वामी का मामला अब  विशुद्ध रुप से भाजपा+अन्य बनाम झामुमो+कांग्रेस+वामपंथी पार्टियां+वाम जनसंगठन+इसाई समुदाय हो चुका है, और इसका झारखण्ड में दो सीटों दुमका और बेरमो में हो रहे विधानसभा उप चुनाव पर असर पड़ना भी तय है, इससे दोनों पक्षों का नफा-नुकसान तय है।

लेकिन सच्चाई यह भी है कि आम जनता की इस मुद्दे पर सहभागिता किसी के भी पक्ष में नहीं है। जो न्यूट्रल लोग है, उनका मानना है कि कानून अपना काम करेगा, अगर फादर स्टेन स्वामी सही हैं तो उनका कोई बाल बांका भी नहीं कर सकता और अगर भीमा कोरेगांव की घटना में संलिप्तता है तो कोई बचा भी नहीं सकता।

इधर सीएम हेमन्त सोरेन ने साफ कहा है कि फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी भाजपा का हिडेन एजेंडा है, जितनी भी देश में संवैधानिक संस्थाएं हैं, उसका किस प्रकार दुरुपयोग किया जा रहा है, वह किसी से छुपा नहीं है, जब –जब भाजपा को अपने उपर खतरा मंडराता हुआ दिखता है, तो वे आदिवासियों, दलितों और उनके समर्थकों का शोषण शुरु कर देते हैं। फादर स्टेन स्वामी चूंकि 83 वर्ष के हैं, वे यहां समाज सेवा करते रहे हैं, उनकी गिरफ्तारी से भाजपा क्या संदेश देना चाहती है, अपने विरोध की हर आवाज को दबाने की यह कैसी जिद है।

सूत्र बता रहे है कि सीएम हेमन्त सोरेन के इस बयान के बाद, कल पलामू के डालटनगंज में भी फादर स्टेन स्वामी के खिलाफ प्रदर्शन होनेवाले हैं। कल ही यानी 12 अक्टूबर को रांची के बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी के विरोध में सुबह दस बजे से भूख हड़ताल शुरु होगी तथा आगे की रणनीति को लेकर चार बजे एक बैठक भी होगी, जिसमें रणनीतिकार मौजूद रहेंगे।

एक साल पहले तक जो बाबू लाल मरांडी फादर स्टेन स्वामी के पक्ष में बोला करते थे, अब वे इस मुद्दे पर बोलने से चूक रहे हैं, क्योंकि अब वे भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम चुके हैं और बिहार में हो रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से स्टार प्रचारक भी है। इधर भाजपा के चर्चित सांसद निशिकांत दूबे ने फादर स्टेन स्वामी पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के दिये गये बयान पर ट्विट करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को दुमका उपचुनाव में धर्म-परिवर्तन करने व करानेवाले लोगों का वोट चाहिए, इसलिए अपराधियों को बचाने में भी शर्म नहीं आती। मुख्यमंत्री का यह बयान संविधान और कानून की अवहेलना है।

यानी कुछ भी कहिये, फादर स्टेन स्वामी का मामला अब झारखण्ड में राजनीतिक रंग ले रहा है, फिलहाल हेमन्त सरकार फादर स्टेन स्वामी के पक्ष में खुलकर आ गई है, भाजपा ने भी एक तरह से मोर्चा संभाल लिया है, और आम जनता इन दोनों के बीच चल रहे इस विवाद पर कड़ी नजर रखी हुई है, क्योंकि अंततः जनता को इन दोनों को भविष्य में जवाब देना है, ऐसे में जनता का पलड़ा किस ओर भारी पड़ता है, इसका जवाब भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन विद्रोही24 को पता है कि जनता वर्तमान में किस ओर हैं, लेकिन अभी फिलहाल हम इस पर चुप ही रहेंगे।

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