CM हेमन्त सोरेन ने खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा में शहरी श्रमिकों के लिए जगह चिह्नित कर दाल भात केंद्र करें स्थापित
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में आज खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विभाग द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं में निरंतर प्रगति, खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता और आगामी वित्तीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकता है। राज्य सरकार का ध्येय है कि राज्यवासियों के जीवन स्तर को किस प्रकार उन्नत बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि खाद्य वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और जनसुलभ बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आधुनिक तकनीकी एवं नवाचार को योजनाओं के संचालन में शामिल किए जाएं। राज्य सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा संचालित योजनाएं राज्यवासियों की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समानता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। बैठक में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ० इरफान अंसारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.), राशन कार्ड वितरण, खाद्यान्न आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण तथा विभाग की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, उपलब्धि, आगामी कार्ययोजना तथा निर्धारित लक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा के दौरान विभागीय योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवन रेखा के समान है। इसलिए इसमें किसी तरह की शिथिलता नहीं होनी चाहिए।
राज्य के पात्र लाभुकों तक खाद्यान्न की समयबद्ध, पारदर्शी एवं निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। राशन कार्ड संबंधित मामलों का शीघ्र निष्पादन, नए पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ने तथा अपात्र लाभुकों की पहचान कर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करते हुए खाद्यान वितरण प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री दाल भात योजना के अंतर्गत 370 केंद्र चलाए जा रहे हैं। लोगों से पांच रुपए की राशि लेकर भरपेट भोजन कराया जाता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि दाल भात केंद्रों की संख्या बढ़ाएं। राज्य के भीतर कार्यरत शहरी श्रमिकों के लिए जगह चिह्नित कर दाल भात केंद्र स्थापित करें। साथ ही मॉडल दाल-भात केन्द्र बनाएं, ताकि जरूरतमंद व्यक्तियों को भरपेट भोजन उपलब्ध हो सके।
विशिष्ट जनजाति खाद्यान्न सुरक्षा योजना (पीवीटीजी डाकिया योजना) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डोर स्टेप के तहत पीवीटीजी परिवारों मिलने वाले खाद्यान्न सभी को मिलता रहे, यह सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान पाया कि 60 लाख क्विंटल लक्ष्य के विरुद्ध झारखंड में 49 लाख 25 हजार क्विंटल धान अधिप्राप्ति हुई।
मुख्यमंत्री ने सरकार को धान बिक्री करने वाले कारीमाटी के किसान निगम प्रसाद उपाध्याय से ऑनलाइन बातचीत कर धान बिक्री एवं उसके एवज में हुए भुगतान की जानकारी ली। किसान ने बड़े उत्साह के साथ मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने 160 क्विंटल धान पैक्स के माध्यम से बिक्री की थी, जिसका भुगतान एक ही दिन में मिल गया है।
मुख्यमंत्री ने गोदाम मरम्मती एवं नए गोदाम निर्माण की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए गोदाम में अनाज के बेहतर रखरखाव का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने 2026-27 हेतु प्रस्तावित कार्य योजनाओं की समीक्षा के दौरान योजनाओं को ससमय पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने सोना- सोवरन धोती-साड़ी वितरण योजना, मुख्यमंत्री दाल भात वितरण योजना, मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना आदि की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
