“सुनिए सरकार, मर रहे हैं पत्रकार” लिखनेवालों, आपने ये क्यों नहीं बताया कि दिवंगत 17 पत्रकार किस संस्थान में काम करते थे? आपने श्रद्धाजंलियों पर कैंची कैसे चला दी?
झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पता हैं, यहां के विपक्षी दलों के नेताओं को पता हैं, यहां तक की झारखण्ड विधानसभाध्यक्ष को भी मालूम है, विभिन्न प्रकार की एनजीओ चलानेवाले लोगों को भी पता है कि राज्य में किन-किन मीडिया संस्थानों में काम करनेवाले पत्रकार अब तक कोरोना काल में मर चुके हैं और कितने अभी विभिन्न अस्पतालों में जीवन और मौत से जूझ रहे हैं, पर दुर्भाग्य इन पत्रकारों का देखिये कि जिन संस्थानों के लिए काम करते हैं,
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