जैसे लोहे के टेढ़े-मेढ़े कीलों को भी चुम्बक अपनी ओर आकर्षित कर लेता है, ठीक उसी प्रकार सद्गुरु और ईश्वर भी अपने परमभक्तों को स्वयं में समेट लेता हैं, इसे भूले नहीः प्रह्लादानन्द
हमेशा याद रखें कि जैसे जमीन पर पड़े टेढ़े-मेढ़े लोहे के कीलों को भी चुम्बक अपनी ओर आकर्षित कर लेता
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