गुंडों एवं असामाजिक तत्वों की गिरफ्त में रांची, भाजपा कार्यकर्ताओं ने CM रघुवर से इस्तीफा मांगा

असामाजिक तत्वों एवं गुंडों ने लगता है कि संकल्प ले लिया है कि राजधानी रांची को अशांत कर देना हैं, और इधर राजनीतिक दलों ने भी एक तरह से कमर कस लिया है कि इस पर राजनीतिक रोटी आराम से सेंकनी हैं ताकि इसका फायदा उठाने के साथ-साथ, अपना चेहरा भी चमकाया जा सके, जबकि सच्चाई यह है कि किसी भी राजनीतिक दल को रांची में अमन हो, इससे कोई मतलब नहीं,

असामाजिक तत्वों एवं गुंडों ने लगता है कि संकल्प ले लिया है कि राजधानी रांची को अशांत कर देना हैं, और इधर राजनीतिक दलों ने भी एक तरह से कमर कस लिया है कि इस पर राजनीतिक रोटी आराम से सेंकनी हैं ताकि इसका फायदा उठाने के साथ-साथ, अपना चेहरा भी चमकाया जा सके, जबकि सच्चाई यह है कि किसी भी राजनीतिक दल को रांची में अमन हो, इससे कोई मतलब नहीं, शायद वे जानते है कि अगर अमन हो गया तो फिर राजनीतिक रोटी सेंकने में नहीं बनेगी। दूसरी ओर 10 जून को रांची के डेली मार्केट के पास भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय पुलिसकर्मियों पर हुए जानलेवा हमले से दुखी कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री रघुवर दास से इस्तीफे की मांग कर दी हैं।

इधर 10 जून को डेली मार्केट के पास गुंडों और असामाजिक तत्वों ने भाजयुमो के कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, इन गुंडों और असामाजिक तत्वों ने पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा, उन पर भी जानलेवा हमले किये, जिसका वीडियो पूरे राज्य में वायरल हो रहा हैं, पर अब तक इन गुंडों और असामाजिक तत्वों को पुलिस पकड़ नहीं पाई हैं, जबकि रांची के डेली मार्केट में उधम मचाने के बाद,  इधर एक बार फिर नगड़ी को लहकाने की कोशिश आज की गई, गुंडों और असामाजिक तत्वों ने एक समुदाय विशेष के घरों पर पथराव किये, पुलिस को भी अपना निशाना बनाया, पर खुशी इस बात की है कि नगड़ी लहकने से बच गया।

इधर बुद्धिजीवियों ने कुछ सवाल भी उठाए हैं, जो लाजिमी है, इनका कहना है कि आखिर एक-दो सालों में भाजपा या हिन्दू संगठनों द्वारा निकाले जानेवाले जुलूसों पर डेली मार्केट से लेकर एकरा मस्जिद के बीच ही हमले क्यों होते हैं? अन्य स्थानों पर ये हमला देखने को क्यों नहीं मिलता? आखिर वे कौन लोग हैं? जो डेली मार्केट के पास हिन्दू समुदाय या सगंठनों के जुलूस को देखकर भड़क उठते हैं, आखिर ऐसे असामाजिक तत्वों एवं गुंडों पर पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं करती? ऐसे गुंडों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने से इन्हें कौन रोकता है?

पुलिस प्रशासन को यह नहीं भूलना चाहिए कि रांची अतिसंवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां से कई बार आंतकियों के समूह पकड़े गये हैं।  हाल ही में बोधगया मंदिर को उड़ाने की योजना की बात  हो या मोदी की पटना में सभा के दौरान सीरियल ब्लास्ट का मामला हो, रांची का कनेक्शन जगजाहिर हैं। इसलिए ऐसे गुंडों और असामाजिक तत्वों पर नरमी, आनेवाले समय के लिए खतरे का संकेत हैं, ये सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन सभी को समझना चाहिए। इसलिए 10 जून की घटना को नजरंदाज करना महंगा पड़ सकता हैं।

आज इन गुंडों और असामाजिक तत्वों का मनोबल इतना बढ़ गया कि अब ये पुलिस को भी नहीं छोड़ रहे, उन्हें भी निशाना बनाते है, तथा उन पर जानलेवा हमले करते हैं। 10 जून को हुए इस हादसे के बाद कई भाजपा कार्यकर्ता तो इतने क्षुब्ध है कि उन्होने राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास से इस्तीफे तक की मांग कर दी, जबकि भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष अमित कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल प्रोजेक्ट बिल्डिंग जाकर मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिला तथा डेली मार्केट एवं हिनू चौक के पास भाजपा कार्यकर्ताओं के उपर किये गये हमले की जानकारी दी तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में सख्त कार्रवाई करने का वादा किया है।

इधर भाकपा माले, समेत कई वामदलों के संगठनों ने रांची में नागरिक सद्भावना मार्च निकाला, तथा भाजपा के खिलाफ नारे लगाये। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल आज नगड़ी पहुंचकर सभी से शांति बनाये रखने की अपील की, जबकि न तो भाकपा माले और न ही कोई वामपंथी संगठन या कांग्रेस के लोग उस पुलिसकर्मी का हाल जानने के लिए, उस पुलिसकर्मी के घर या कार्यालय जाकर कुशल क्षेम पुछा, जिस पर 10 जून को जानलेवा हमला किया गया था।

Krishna Bihari Mishra

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