राजनीति

बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमन्त सोरेन को लिखा पत्र, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग में चल रही अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग में विगत 10 वर्षों के वित्तीय आवंटन, व्यय तथा खरीद संबंधी अनियमितताओं की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जाँच कराने एवं उत्तरदायित्व निर्धारण के संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM/NRHM) एवं स्वास्थ्य विभाग, झारखंड में सार्वजनिक धन के गबन और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित गंभीर मामले सामने आ रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी का कहना है कि जनस्वास्थ्य के लिए निर्धारित धन के दुरुपयोग पर किसी भी स्तर की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है। अतः इस विषय पर तत्काल निर्णय लेकर स्वतंत्र जाँच, अभिलेखों के संरक्षण और दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें एवं कृत कार्रवाई से उन्हें भी लिखित रूप में अवगत कराने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का पत्र इस प्रकार है…

माननीय मुख्यमंत्री जी,

विषय:- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग में विगत दस वर्षों के वित्तीय आवंटन, व्यय तथा खरीद संबंधी अनियमितताओं की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जाँच एवं उत्तरदायित्व निर्धारण के संबंध में।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM/NRHM) एवं स्वास्थ्य विभाग, झारखंड में सार्वजनिक धन के गबन और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। धनबाद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा वर्ष 2019 में दर्ज मामले की जाँच से संबंधित प्रकाशित समाचार ने स्वास्थ्य योजनाओं की वित्तीय निगरानी और विभागीय नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

समाचार के अनुसार, केंद्र से प्राप्त ₹11 करोड़ से अधिक की राशि में से लगभग ₹6.97 करोड़ के गबन का मामला सामने आया है। इसमें ₹4.16 करोड़ से अधिक की राशि आरोपी ब्लॉक अकाउंट मैनेजर तथा उसके परिजनों और परिचितों के खातों में हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख है। समाचार में यह भी बताया गया है कि संबंधित अवधि में आहरण एवं व्ययन अधिकारी का दायित्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास था। ऐसे में जाँच को केवल संबंधित संविदाकर्मी तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। भुगतान की स्वीकृति, खातों के संचालन, व्यय के सत्यापन और निगरानी के लिए उत्तरदायी अधिकारियों की भूमिका की भी जाँच आवश्यक है।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटित धन का इस प्रकार निजी खातों में पहुँचना वित्तीय नियंत्रण और पर्यवेक्षण की गंभीर विफलता दर्शाता है। यह राशि जनता के उपचार, दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए निर्धारित थी। इसके दुरुपयोग का प्रत्यक्ष प्रभाव उन गरीब एवं वंचित नागरिकों पर पड़ता है, जो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर हैं।

इस प्रकरण के साथ ही विगत दस वर्षों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत लगभग ₹6,000 करोड़ के आवंटन और उसके उपयोग में व्यापक अनियमितताओं के आरोपों की भी समग्र जाँच आवश्यक है। उक्त राशि का अभिलेखों से सत्यापन करते हुए राज्य के सभी 24 जिलों में आवंटन, आहरण, भुगतान, खरीद और वास्तविक आपूर्ति की जाँच कराई जानी चाहिए। विशेष रूप से निम्नलिखित विषयों को जाँच के दायरे में शामिल किया जाए:-

  1. वित्तीय अधिकार एवं भुगतान प्रक्रिया – ब्लॉक अकाउंट मैनेजर, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रदान किए गए वित्तीय अधिकारों का वैधानिक आधार, बैंक खातों के संचालन की व्यवस्था और भुगतान स्वीकृति की प्रक्रिया जाँची जाए। निर्धारित अधिकारों से बाहर किए गए आहरण एवं भुगतान तथा उनकी स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए।
  2. दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद – अमानक दवाओं, अनुपयोगी अथवा खराब उपकरणों, वास्तविक आपूर्ति के बिना भुगतान और प्रचलित बाजार दरों से अधिक कीमत पर खरीद के आरोपों की जाँच की जाए। निविदाओं, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्टों, आपूर्ति अभिलेखों, स्टॉक रजिस्टरों तथा उपकरणों की वास्तविक उपलब्धता एवं उपयोगिता का मिलान कराया जाए।
  3. सॉफ्टवेयर एवं सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाएँ – स्वास्थ्य प्रबंधन, ट्रैकिंग और भंडार प्रबंधन के लिए विकसित सॉफ्टवेयर एवं पोर्टलों पर हुए व्यय की जाँच की जाए। संबंधित कंपनियों के चयन, अनुबंध की शर्तों, कार्य की वास्तविक पूर्णता, उपयोगिता और रखरखाव के भुगतान का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय परीक्षण कराया जाए।
  4. लेखापरीक्षा आपत्तियों पर कार्रवाई – नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा महालेखाकार की रिपोर्टों में दर्ज असमायोजित अग्रिम, लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र, संदिग्ध भुगतान एवं वित्तीय नियमों के उल्लंघन संबंधी आपत्तियों की समीक्षा की जाए। इन आपत्तियों पर कार्रवाई न करने अथवा अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए।
  5. विधानसभा में प्रस्तुत सूचनाओं का सत्यापन – वित्तीय अनियमितताओं, दवा आपूर्ति और उपकरणों की अनुपयोगिता से संबंधित विधानसभा प्रश्नों पर दिए गए उत्तरों का मूल अभिलेखों से मिलान कराया जाए। यदि तथ्य छिपाने अथवा भ्रामक सूचना देने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए मैं आपसे निम्नलिखित कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूँ।

  1. राज्य के सभी 24 जिलों में विगत दस वर्षों के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग के वित्तीय आवंटन, व्यय और खरीद की जाँच सीबीआई अथवा स्वतंत्र विशेष जाँच दल से कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। जाँच की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने हेतु सक्षम न्यायालय की निगरानी का अनुरोध किया जाए।
  2. महालेखाकार के समक्ष विशेष लेखा परीक्षा का अनुरोध किया जाए तथा स्वतंत्र विशेषज्ञों से विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। इसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के बैंक खातों, निजी खातों में हुए हस्तांतरण, खरीद अनुबंधों और वास्तविक आपूर्ति का परीक्षण शामिल हो।
  3. सभी संबंधित बिल, वाउचर, बैंक विवरण, निविदा अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाणपत्र और डिजिटल लॉग तत्काल सुरक्षित किए जाएँ। डिजिटल अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियाँ तैयार कर उनके परिवर्तन अथवा नष्ट किए जाने की संभावना रोकी जाए।
  4. जाँच में संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित सिविल सर्जन, चिकित्सा पदाधिकारी, जिला एवं प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, लेखा प्रबंधक तथा वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य लागू विधिक प्रावधानों के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। गबन की राशि की वसूली तथा विभागीय कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
  5. जाँच एवं लेखापरीक्षा के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए और उसकी प्रगति तथा कार्रवाई प्रतिवेदन विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

धनबाद का प्रकरण सामने आने के बाद सरकार का दायित्व केवल एक आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकता। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इतनी बड़ी राशि के अनियमित हस्तांतरण को समय रहते क्यों नहीं रोका गया, विभागीय निगरानी कहां विफल हुई और क्या इसी प्रकार की अनियमितताएं अन्य जिलों में भी हुई हैं।

जनस्वास्थ्य के लिए निर्धारित धन के दुरुपयोग पर किसी भी स्तर की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है। अतः इस विषय पर तत्काल निर्णय लेकर स्वतंत्र जाँच, अभिलेखों के संरक्षण और दोषियों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें एवं कृत कार्रवाई से मुझे भी लिखित रूप में अवगत कराएँ। सधन्यवाद!

आपका

(बाबूलाल मरांडी)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *