बाबूलाल मरांडी ने महालया के दिन दिल्ली में आंदोलन की घोषणा और उसके राजनीतिक निहितार्थों पर उठाए गंभीर सवाल, इसे देश से सनातनियों और सनातन संस्कृति को समाप्त करने की सुनियोजित साजिश बताया
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने महालया और नवरात्र की शुरुआत के दिन दिल्ली में आंदोलन की घोषणा और उसके राजनीतिक निहितार्थों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इंडी गठबंधन, देश तोड़ने वाली ताकतों के राजनीतिक एजेंडे को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देशवासियों को इसके पीछे की बड़ी साजिश को समझना होगा। यह देश से सनातनियों और सनातन संस्कृति को समाप्त करने की सुनियोजित साजिश है। देशवासियों को ऐसी पार्टियों एवं ऐसे तत्वों के हिडेन एजेंडा से सावधान रहने की जरूरत है। श्री मरांडी ने इसे दिमागी नक्सल का पर्याय करार दिया है।
श्री मरांडी ने महालया और नवरात्र की लोगों को हार्दिक शुभकामना देते हुए कहा कि जहां एक तरफ देश महालया जैसे पवित्र और आध्यात्मिक दिन पर व्यस्त है, अब नवरात्र की शुरुआत हो रही है, ऐसे में राजनीतिक स्वार्थ के लिए दिल्ली में इंडी गठबंधन एवं देश तोड़क कुछ तत्वों द्वारा आंदोलन और अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पूरा देश इस त्योहार को धूमधाम से मनाता है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के लिए दूसरा समय भी तो चुना जा सकता था। इस समय को चुनने के पीछे इनकी मंशा साफ है कि देश में अस्थिरता और अराजकता का माहौल कायम हो जाए। यह भारत की संस्कृति को विद्रूप करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतों द्वारा देश को अस्थिर और टुकड़ों-टुकड़ों में विभक्त करने की साजिश कभी सफल नहीं होगी। क्योंकि लोकतंत्र हमारे जीवन में है, विचारों में है। भारत वर्ष विविधताओं से भरा हुआ देश है।
श्री मरांडी ने कहा कि देश में इंडी गठबंधन के लोग और कुछ देश विरोधी ताकतें हैं जो देश को तोड़ना चाहते हैं। यहां के संस्कृति को बर्बाद करना चाहते हैं। इसलिए जब से देश में राहुल गांधी और कांग्रेस चुनाव हारी है, तब से लोग अजीब तरह की हरकत कर रहे हैं। नया नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। पहले ईवीएम हैक की बात करते थे, फिर वोट चोरी की बात करने लगे, अब एसआईआर और ज्ञानेश कुमार की विरोध की बातें होने लगी। जबकि जनता सारी चीजों को अच्छी तरह समझ रही है।
श्री मरांडी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना किसी के लिए भी लोकतंत्र में मौलिक हक है। परंतु राहुल गांधी, कांग्रेस, इंडी गठबंधन या देश तोड़ने वाली जो भी ताकतें हैं उनको पता है कि देश की जनता का विश्वास वे पूरी तरह खो चुके हैं। वोट उन्हें मिलने वाला नहीं है। इसलिए अलग-अलग बातें करते रहते हैं। कांग्रेस को तो देश की जनता बहुत पहले ही अपने दिल से और सत्ता से बाहर कर चुकी है। कांग्रेस साउथ के सबसे बड़े राज्य तमिलनाडु में 1967 से, बंगाल में 1977 से, यूपी बिहार में 1990 से, गुजरात, उड़ीसा से भी कांग्रेस को जनता ने विदा कर ही दिया है। जबकि उस समय कांग्रेस का ही बोलबाला था। मुख्य निर्वाचन आयुक्त आदि की नियुक्ति भी कांग्रेस पार्टी ही करती थी। उस समय बैलेट से ही चुनाव होता था, तब भी कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर हो चुकी है।
