सावधान झारखण्डियों, IAS अधिकारियों के आगे अपना दुखड़ा सुनाना आपको महंगा पड़ सकता हैं

सावधान, झारखण्ड के आदिवासियों। किसी भी भारतीय प्रशासनिक अधिकारी के चैंबर में अपना दुखड़ा रोने न जाये, नहीं तो भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी आपको जेल की हवा खिला सकता हैं। ताजा मामला रांची नगर निगम से जुड़ा है। जहां मरी हुई मछलियों को लेकर जब लोग रांची नगर निगम के आयुक्त के चेंबर में पहुचें, तब नगर आयुक्त ने अपना दुखड़ा सुनाने आये आदिवासी बंधुओं को धमकी दे डाली, कहाः नेता बनते हो, जेल भिजवा दूंगा।

सावधान, झारखण्ड के आदिवासियों। किसी भी भारतीय प्रशासनिक अधिकारी के चैंबर में अपना दुखड़ा रोने न जाये, नहीं तो भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी आपको जेल की हवा खिला सकता हैं। ताजा मामला रांची नगर निगम से जुड़ा है। जहां मरी हुई मछलियों को लेकर जब लोग रांची नगर निगम के आयुक्त के चेंबर में पहुचें, तब नगर आयुक्त ने अपना दुखड़ा सुनाने आये आदिवासी बंधुओं को धमकी दे डाली, कहाः नेता बनते हो, जेल भिजवा दूंगा।

ये भाषा है, आज के भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारियों की। ये हैं नया झारखण्ड, नया भारत का सलोगन देनेवाले राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों का नया लुक। ये है बदलता झारखण्ड, जहां आदिवासियों को अपनी बात रखने का भी अधिकार अब नहीं मिल रहा। कुल मिलाकर अगर आपका नुकसान हो जाये, या आपके साथ कोई हादसा हो जाये, तो बोलिये मत, चुप्पी लगा जाइये, नहीं तो जहां मुंह खोलेंगे, आपके सामने का भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी, आपके उपर ऐसा धारा लगवा देगा कि आप की घिग्घी बंद हो जायेगी, आप मुंह ताकते रह जायेंगे।

जरा वाकया देखिये। रांची नगर निगम की लापरवाही से लाइन टैंक तालाब में मछलियां मर रही है। इस लाइन टैंक तालाब में मछली पालने का काम चडरी सरना समिति के लोग करते हैं। जैसे ही लाइन टैंक तालाब में मछलियों के मरने का समाचार चडरी सरना समिति के लोगों को मिला, ये मरी हुई मछलियों को लेकर रांची नगर निगम के नगर आयुक्त के चेंबर में अपना दुखड़ा सुनाने पहुंच गये। फिर क्या था?  जनाब भड़क गये। उलटे वे दुखड़ा सुनाने आये लोगों पर ही भड़क गये। पूछना शुरु किया मछलियां लेकर मेरे कार्यालय में घुसने की इजाजत आप लोगों को किसने दी? दो मिनट के अंदर कार्यालय से बाहर निकल जाइये, अन्यथा सरकारी काम-काज में बाधा डालने का केस दर्ज करवा दूंगा। इसी बीच नगर आयुक्त के बॉडीगार्ड आये और उसने इनलोगों को कार्यालय से बाहर निकाला। फिर नगर आयुक्त ने स्वास्थ्य अधिकारी को आदेश दिया कि वे चडरी सरना समिति के इन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराये।

इधर चडरी सरना समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष बबलू मुंडा की माने तो उनका कहना था कि वे तो अपनी समस्या रखने गये थे, न कि उनसे मुआवजा मांगने, पर समस्या सुना नहीं, उलटे भड़क गये और कह डाला कि  बहुत बड़ा नेता बनते हो, सरकारी काम में बाधा डालने का केस करवा कर जेल में सड़ा दुंगा। इधर भारतीय प्रशासनिक सेवा के उक्त अधिकारी के आदेश पर उसके बॉडीगार्ड ने कोतवाली थाने में सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में आवेदन दे दिया है, जबकि दूसरे पक्ष ने एससी/एसटी थाने में नगर आयुक्त के खिलाफ अभद्र व्यवहार करने और जाति संबोधन का आरोप लगाते हुए आवेदन दे दिया है।

Krishna Bihari Mishra

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एक पत्रकार की मौत पर रोनेवाला कोई नहीं, इससे बड़ा दु्र्भाग्य और क्या हो सकता है?

Sat Oct 14 , 2017
कमाल की बात है, यह पत्रकार दुनिया से संघर्ष करते हुए, अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते दम तोड़ दिया पर कोई उसका साथ देने नहीं आया। जो लोग पत्रकारों की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं, जो लाखों-करोड़ों में खेलते है, जो गौरी लंकेश के लिए आसमान हाथों में उठा लेते है, वे रवीन्द्र ठाकुर के इस संघर्ष पर आंखे मूंद लेते हैं, उसकी मौत पर आंसू तक नहीं बहाते, उनके लिए ऐसे लोगों के लिए शब्द नहीं है।

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