कोयला माफियाओं और स्वघोषित ‘होम मिनिस्टर’ के इशारे पर बोकारो के डीसी सत्ता के चाटुकार की तरह व्यवहार कर रहेः बाबूलाल मरांडी
राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा के क्रियाकलापों पर कल यानी रविवार को सोशल साइट के माध्यम से तीखी टिप्पणी की है। हालांकि उन्होंने जिस फोटो पर तीखी टिप्पणी की है। वो फोटो 26 दिन पुरानी है। जब कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष तथाकथित चंदा चोरी और MMDR संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ धरना दिया था। बाबूलाल मरांडी के इस टिप्पणी पर कई लोगों ने भी बोकारो उपायुक्त के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है कि विपक्षी दल के जनप्रतिनिधियों और आम जनता से कोसों दूर भागने वाले बोकारो डीसी कांग्रेस के धरना स्थल पर ज्ञापन लेने पहुंच गए। अधिकारियों को राजनीतिक पक्षपात से ऊपर उठकर निष्पक्षता के साथ सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कोयला माफियाओं और स्वघोषित ‘होम मिनिस्टर’ के इशारे पर डीसी सत्ता के चाटुकार की तरह व्यवहार कर रहे हैं। अगर प्रशासनिक अधिकारी किसी एक राजनीतिक दल के धरना-प्रदर्शन में जाकर ज्ञापन ले सकते हैं, तो उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि यही सुविधा सभी दलों के जन प्रतिनिधियों और आम जनता को भी मिलनी चाहिए।
बाबूलाल मरांडी के इस तीखी टिप्पणी पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। प्रतिक्रिया देनेवालों में सुरज नाथ शाहदेव लिखते है कि डीसी साहेब को बधाई कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करने हेतु। यह पहला कदम है खांग्रेसी बनने की दिशा में। आनन्द पाठक लिखते हैं कि पीआरओ के रूप में काम किये है डीसी साहब, जी हुजूरी तो करेंगे जिला के मालिक बने हैं। राज कुमार लिखते है कि साहेब चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।
संजीत कुमार पासवान लिखते है कि सत्ता का खौफ है। विवेक अग्निहोत्री लिखते है कि पोस्टिंग की बात है। बिभीषण सिंह चौधरी लिखते है कि बोकारो उपायुक्त एक पार्टी कार्यकर्ता की तरह कार्य करते हैं। प्रभु दयाल बड़ाइक लिखते हैं कि सत्ताधारी है ये सोचकर ज्ञापन लेने पहुंच गये और विपक्ष या आम जनता उनसे मिलना चाहे तो महोदय के पास समय नहीं होता।
