राजनीति

दोनों हाथों से गरीब जनता की गाढ़ी कमाई लूटा रही हैं रघुवर सरकार

झारखण्ड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने रघुवर सरकार पर आरोप लगाया कि इस सरकार ने गरीब जनता की गाढ़ी कमाई को दोनों हाथों से लूटा दिया। उन्होने आज संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इसी साल फरवरी माह में हुए मोमेंटम झारखण्ड के दौरान केवल खिलाने-पिलाने में दो करोड़ रुपये लूटा दिये गये। अतिथियों के लिए ग्यारह सौ रुपये से लेकर 18 सौ रुपये प्रति प्लेट लंच एवं डिनर पर खर्च किये गये। टेन्टवाले (एनके कपूर कंपनी) को 9.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। 49 लाख की स्टेशनरी खरीदी गयी। मेहमानों के आवासन पर 12.42 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर दी गई।

उन्होंने कहा कि तीन करोड़ रुपये केवल प्रेस विज्ञप्ति बनाने पर खर्च कर दिये गये, वह भी बिना टेंडर के। एड फेक्टर नामक कंपनी को यह काम सौंपा गया। प्रेस विज्ञप्ति बनाने का काम पहले से सरकार की नॉलेज पार्टनर के रुप में कार्यरत कंपनी आरनेस्ट एंड यंग की ओर से किया जा रहा था, इसी काम के लिए सरकार का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग भी लगा हुआ है। टेंडर के स्थान पर आरएफपी (रिक्वेस्ट फोर प्रपोजल) के तहत तीन करोड़ रुपये का करार हुआ। भुगतान लेकर कंपनी फरार हो गई।

उन्होंने कहा कि मोमेंटम झारखण्ड में अतिथियों को ले आने- ले जाने में चार्टड विमान के उपयोग पर 1.40 करोड़ रुपये खर्च किये गये, जिनमें 79 यात्रियों के लिए 14 उड़ाने भरी गयी। जिनसे सिर्फ 3.17 लाख रुपये की वसूली ही किराये के रुप में की गयी, यात्रियों के लिए 180 सीटर चार्टड विमान किराया पर लिया गया था।

उन्होंने बताया कि मोमेंटम झारखण्ड के चंद दिनों पहले बनी कंपनी से सरकार ने 1900 करोड़ का एमओयू किया। जिसकी कुल पूंजी एक लाख रुपये की है। परसा एग्रो प्रा लिं. फरवरी 2017 में निबंधित कंपनी ने 400 लोगों को रोजगार देने का वायदा किया है, और तो और 6400 करोड़ रुपये का एमओयू खान एवं भूतत्व विभाग से करनेवाली कंपनी सीवीक्स हाउसिंग प्रा.लि., न तो मिनिस्टरी आफ कारपोरेट अफेयर्स से रजिस्टर्ड है, न ही इसका कोई अपना वेबसाइट है। सरकार के द्वारा जारी किये गये लेटर आफ इंटेट में अंकित पता सरबजीत सिंह डारेक्ट सीवीक्स हाउसिंग प्रा. लि., 10 पार्लियामेंट स्ट्रीट नई दिल्ली दर्शाया गया है। इस पते पर केन्द्र सरकार के फाइनांस डिपार्टमेंट का आफिस कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि एक लाख की पूंजी से चार महीने पहले बनी पंचकूला की कंपनी से भी करार किया गया। शहरी विकास एवं आवास विभाग ने 7000 करोड़ रुपये का एमओयू सोलिड वेस्ट मेनेजमेंट, ग्रिन हाउसिंग सोल्यूशन पर काम करने एवं 3500 लोगों को सीधा रोजगार देने का वादा किया।

उन्होंने कहा कि मोहम इंफोसोल्यूशन प्रां. लि. के साथ झारखण्ड सरकार के तीन विभाग ने 3800 करोड़ रुपये के तीन एमओयू किये, जबकि इस कंपनी की कुल जमा पूंजी एक करोड़ रुपये की है। पर्यटन, कला, संस्कृति, खेल एवं युवा मामले के विभाग ने होटल व अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेन्टर बनाने के लिए 1051 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग ने हास्पिटल प्रोजेक्ट के लिए 1000 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग ने हास्पिटल प्रोजेक्ट के लिए 1000 करोड़ रुपये के अलग-अलग एमओयू किये हैं।

उन्होंने कहा कि एमएस ओरियेन्ट कराफ्ट फैशन पार्ट और एलएलपी नामक पार्टनरशिप फर्म के साथ 2900 करोड़ रुपये का एमओयू किया गया। फर्म को इरबा और खेलगांव में 28 एकड़ और 113 एकड़ की जमीन भी दे दी जाती है। चौंकानेवाली बात यह है कि एमओयू से ठीक 39 दिन पहले बने मिनिस्टरी ऑफ कारपोरेट अफेयर्स के द्वारा 3 फरवरी को लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट 2008 के तहत फर्म का निबंधन हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ एमओयू करने एवं जमीन लेने के लिए ही कंपनियां तो नहीं बनायी गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार के निकम्मे अधिकारियों के कारण ग्लोबल समिट के दौरान 7000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव करनेवाली कोरियाई ग्रुप आफ कम्पनिज ने झारखण्ड से अपना नाता तोड़ लिया, इधर स्मार्ट ग्रिड नामक कंपनी के ओएसडी सुनील मिश्रा ने आरोप लगाया कि सरकार निवेश को लेकर गंभीर नहीं है, इसलिए ऐसे में हम झारखण्ड में निवेश को लेकर आगे नहीं बढ़ सकते।

उन्होंने कहा कि रघुवर राज में राज्य की राजधानी रांची में अपराध का ग्राफ निरंतर बढ़ रहा है, अपराधी बेलगाम हो चुके है, चारों तरफ भय का वातावरण है। बीते दस माह में, अकेले राजधानी में 131 हत्याएं, 129 दुष्कर्म, 16 डकैती, 64 लूट, 234 गृहभेदन, 1974 चोरी, 124 सांप्रदायिक तनाव, 56 आर्म्स एक्ट, 30 नक्सल एवं जनवरी- अक्टूबर तक 6275 मामले सामने आये है, जो बताता है कि यहां अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ा हुआ हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 11.64 लाख परिवारों का राशन कार्ड रद्द कर दिया गया है, जिसके कारण अनेक खाद्य असुरक्षित परिवार अपने राशन के अधिकार से वंचित हो गये है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को बताना चाहिए कि उन्होंने 2014 में जो वायदे किये थे कि वह सभी वृद्ध, विधवा व विकलांग नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिला देंगे, आज भी यह मामला लंबित क्यों है?  आखिर राज्य के 14.6 लाख लोग जो पेंशन से अब तक वंचित हैं, इसका जिम्मेवार कौन है?

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने लोगों की लगभग 20.56 लाख एकड़ गैर मजरुआ जमीन को लैंड बैंक के नाम पर चिह्नित की है, सरकार ने मोमेंटम झारखण्ड में उद्योगपतियों को इसमें से 10.56 लाख एकड़ जमीने देने का वायदा भी कर दिया है। हाल में खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्राम सभा की जानकारी के बिना ज्यादातर जमीनों को लैंड बैंक में डाल दिया गया हैं।

उन्होंने कहा कि 2017-18 में झारखण्ड सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को 130 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, सरकार प्रचार-प्रसार में जितने पैसे खर्च कर रही हैं, उससे सभी वृद्ध पेंशनधारियों को कम से कम 1000 रुपये की मासिक पेंशन दी जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि 3 वर्ष पूरा होने के बावजूद भी अब तक मंत्रिमंडल संविधान के अनुरुप नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 164 में मंत्रियों के नियुक्ति के संबंध में व्याख्या की गई है। संविधान में कहा गया है कि राज्य कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या संबंधित विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, परन्तु मंत्रियों की कुल संख्या 12 से कम नहीं होगी। 23 सितम्बर 2016 को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने इस मामले को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था, उन्होंने तो अनुसूचित जनजाति विभाग के लिए भी अलग से मंत्री नियुक्त करने की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि झारखण्ड में स्वास्थ्य एवं प्राथमिक शिक्षा की स्थिति कितनी बदतर है, यह नीति आयोग ने भी स्पष्ट कर दिया है। नीति आयोग के अनुसार झारखण्ड के 24 जिलों में से 19 जिलों की स्थिति बदतर हैं।