अभिनन्दन, रांची के मुस्लिमों का, जिन्होंने दुर्गापूजा को देखते हुए मुहर्रम के जुलूस की तिथि बढ़ा दी

रांची की मुहर्रम कमेटी और दुर्गापूजा समितियों ने करारा तमाचा मारा है, उन राजनीतिक दलों व विभेदाकारियों को जो धर्म के नाम पर विभेद करते हैं। मैं तो कहूंगा कि समस्त रांचीवासियों को अभिनन्दन करना चाहिए, इन सभी संस्थाओं का। जिन्होंने धर्म के मूल स्वरुप को अपनाते हुए, एक बेहतर संदेश पूरे देश को दिया हैं। हमें याद है कि ऐसा ही फैसला, इन संस्थाओं ने पिछले साल भी लिया था, जिसके कारण रांची में दोनों पर्व शांतिपूर्वक संपन्न हुए थे।

जहां एक ओर बंगाल में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर बवाल है। मामला कोर्ट तक पहुंच गया और सीएम ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। वहीं झारखण्ड के धनबाद में ही दुर्गा पूजा को लेकर वहां के एसएसपी ने एक हास्यास्पद आदेश दे डाला कि इस बार जिले में जितने भी लाइसेंसी पूजा कमेटी है, उसका लाइसेंस चेक किया जायेगा और वे ही इस बार सिर्फ पूजा कर सकेंगे, जिनके लाइसेंस है। नये पूजा कमेटियों को नया लाइसेंस भी निर्गत नहीं किया जायेगा।

चूंकि लोग बता रहे है कि इस बार मुहर्रम और विजयादशमी करीब-करीब एक ही दिन पड़ जा रहा है, जिसको लेकर पूरे देश की राज्य सरकारों और पुलिस पदाधिकारियों के हाथ-पांव फूल गये हैं। चूंकि भारत में धर्म के प्रति लोग ज्यादा संवेदनशील रहते है, इसलिए ये मामला सांप्रदायिक रुप न ले लें, इसलिए ये लोग ऐसे-ऐसे बचकाना निर्णय ले रहे हैं कि जिसे देख व सुनकर एक शांतिप्रिय-जिम्मेदार व्यक्ति व पूरा समाज अचरज में पड़ जा रहा हैं।

इस बार की दुर्गापूजा और मुहर्रम ने सभी दलों की नीतियों और सिद्धांतों की भी पोल खोल दी है। धनबाद की घटना, जिसमें एसएसपी का ये कहना कि नये पूजा कमेटियों को नया लाइसेंस नहीं दिया जायेगा, बताता है कि यहां भाजपा की सरकार कैसे दोहरे मापदंड अपना रही है? यहीं अगर यहां दूसरे दल की सरकार रहती तो देखते, ये हाय तौबा मचा देती, जैसा कि ये बंगाल में कर रही हैं।

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस जो स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताती है, उसका भी पोल खुल गया, जब उसने दुर्गापूजा मनानेवालों पर ही ज्यादतियां शुरु कर दी, वह भी सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक को लेकर, पर इससे अलग रांची को देखिये। अभिनन्दन करिये यहां की मुहर्रम कमेटी और दुर्गापूजा समितियों का, जिन्होंने किसी राजनीतिक दल की यहां चलने ही नहीं दी और स्वयं ही निर्णय लिया तथा उस निर्णय को ले जाकर यहां के गृह सचिव को सुना दिया।

रांची की मुहर्रम कमेटी और दुर्गापूजा समितियों ने करारा तमाचा मारा है, उन राजनीतिक दलों व विभेदकारियों को जो धर्म के नाम पर विभेद करते हैं। मैं तो कहूंगा कि समस्त रांचीवासियों को अभिनन्दन करना चाहिए, इन सभी संस्थाओं का। जिन्होंने धर्म के मूल स्वरुप को अपनाते हुए, एक बेहतर संदेश पूरे देश को दिया हैं। हमें याद है कि ऐसा ही फैसला, इन संस्थाओं ने पिछले साल भी लिया था, जिसके कारण रांची में दोनों पर्व शांतिपूर्वक संपन्न हुए थे।

रांची महानगर दुर्गा पूजा समिति और रांची महानगर सेंट्रल मुहर्रम कमेटी एवं अंजमुन जाफरिया के संयुक्त तत्वावधान में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य के गृह सचिव एस के रहाटे से मिला और स्वयं द्वारा लिये गये निर्णय की उन्हें जानकारी दी। सभी ने फैसला लिया कि दुर्गापूजा विसर्जन की तिथि एक अक्टूबर और मुहर्रम के जुलूस की तिथि तीन अक्टूबर निर्धारित की गयी है। साथ ही यह भी आश्वस्त कराया कि दोनों त्योहार शांति और सौहार्द के बीच मनाया जायेगा।

सचमुच ऐसा संकल्प लेकर इन तीनों संस्थानों ने रांचीवासियों ही नहीं बल्कि पूरे देश का दिल जीत लिया है। इस्लाम क्या है?  दूसरे की खुशी के लिए कुर्बान हो जाना ही तो इस्लाम है। हिन्दुत्व क्या है?   एक दूसरे के काम आना ही तो हिन्दुत्व है। रांची महानगर सेंट्रल मुहर्रम कमेटी व अंजुमन जाफरिया ने जो मुहर्रम के जुलूस की तिथि को बढ़ाने का निर्णय लिया, वह काबिले तारीफ है, इसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है। रांची के इस्लाम धर्मावलंबियों ने ऐसा कर सभी का दिल जीत लिया। हम चाहेंगे कि राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास और राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, इन सभी संस्थाओं को अपने आवास पर बुलाकर, पूरे राज्य की जनता की ओर से इनका अभिनन्दन करें, ताकि एक संदेश पूरे देश में जाए कि त्याग और कुर्बानी का ही दूसरा नाम भारत हें, हिन्दुस्तान है।

Krishna Bihari Mishra

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