नेता प्रतिपक्ष का बयान निशा भगत मामले में बड़ी साजिश की आशंका, पिठौरिया के दारोगा, अजय तिर्की की तत्काल गिरफ्तारी और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच हो
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुमला पहुंचकर दिवंगत आदिवासी नेत्री निशा भगत को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने निशा भगत की मौत को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला।
श्री मरांडी ने कहा कि आदिवासी समाज की बेटी निशा भगत की आत्महत्या के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जिम्मेदार हैं। झारखंड में आज भयावह स्थिति पैदा हो गई है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और राज्य में सरकार नहीं, बल्कि गुंडे, दलाल और माफिया अपना समानांतर तंत्र चला रहे हैं।
श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य के हर अंचल, ब्लॉक और थाने में दो-चार ऐसे गुंडे, दलाल और माफिया किस्म के लोग सक्रिय हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री का सीधा संरक्षण प्राप्त है। इन्हीं के इशारे और पैसों पर एसपी, डीसी, सीओ समेत पूरा प्रशासनिक तंत्र काम कर रहा है। आम जनता अपनी शिकायत लेकर सरकारी दफ्तरों और थानों का चक्कर काटती रहती है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं होती। वहीं, माफियाओं के एक फोन पर पूरा प्रशासनिक अमला सक्रिय हो जाता है। यह स्थिति बताती है कि झारखंड में शासन-प्रशासन किसके नियंत्रण में चल रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में भू-माफियाओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम लोगों और आदिवासियों की रैयती जमीन पर खुलेआम कब्जा किया जा रहा है। जमीन लूटी जा रही है और उसे बेचने-बेचवाने का खेल प्रशासनिक संरक्षण में चल रहा है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि आखिर आदिवासियों की जमीन और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? यदि हेमंत सोरेन से राज्य नहीं संभल रहा है तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
निशा भगत प्रकरण पर गंभीर सवाल उठाते हुए श्री मरांडी ने कहा कि इस पूरे मामले में बड़ी साजिश की आशंका है। इसकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना बेहद जरूरी है। आत्महत्या से पूर्व निशा भगत द्वारा जिस पिठौरिया थाना के दारोगा, अजय तिर्की का नाम लिया गया है, उनकी तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में गुंडागर्दी और अपराध चरम पर है। विशेषकर आदिवासी समाज की बेटियां और वे सामाजिक कार्यकर्ता, जो जल, जंगल और जमीन की लूट के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे लोगों को या तो अपनी जान गंवानी पड़ती है या फिर मुकदमों में फंसाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने रूपा तिर्की, सूर्या हांसदा, सोमा मुंडा और सुभाष मुंडा जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं से राज्य की कानून-व्यवस्था और आदिवासी समाज की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। आदिवासियों के नाम पर सत्ता में आने वाली सरकार के कार्यकाल में यदि उन्हीं की जमीन, सम्मान और जीवन सुरक्षित नहीं है तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?
