10 लाख का दावा करनेवाले राहुल गांधी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक लाख लोगों को भी नहीं जुटा सकें
याद करिये। कल तक यानी शनिवार तक कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी और उनके लोग क्या कहकर ताल ठोक रहे थे। दस लाख लोग रामलीला मैदान में जुटेंगे। सच्चाई यह है कि करीब दस से बारह एकड़ में फैला दिल्ली के रामलीला मैदान की क्षमता पचास हजार से ज्यादा नहीं हैं। लेकिन राहुल गांधी तो राहुल गांधी है। वो कुछ भी कर सकते हैं। वे पचास हजार की क्षमता वाली रामलीला मैदान में दस लाख लोगों को लाकर खड़ा कर सकते हैं!
शायद यही सोचकर पूरे देश की नजर राहुल गांधी की भाषण से ज्यादा इस बात पर ज्यादा थी कि दिल्ली के रामलीला मैदान में जहां 50 हजार से ज्यादा भीड़ नहीं जमा हो सकती है। वहां राहुल गांधी दस लाख लोग कैसे इक्ट्ठा करेंगे? आज रैली भी हो गई। सच्चाई यह भी है कि रामलीला मैदान का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली ही रह गया। कई इनके द्वारा लाई गई कुर्सियां इसी तरह पड़ी रही। उसे खोला तक नहीं गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे तो यहां आये कांग्रेसियों का अच्छा मनोरंजन किया। जब उन्होंने कहा कि अगर आप शांत नहीं बैठोगे को वे पांच मिनट की जगह एक घंटे भाषण देंगे। यानी रैली थी या रैली का मजाक बनाना था। मंच पर बैठे कांग्रेसी नेता को पता ही नहीं था। इन नेताओं से ज्यादा इस मंच के मजे तो वे लिये, जिनको कांग्रेस से कोई मतलब नहीं, अपना चेहरा दिखाना था।
जिसमें वे सारे 20 दलों के नेता मौजूद थे। जिन्हें कांग्रेस की ओर से आमंत्रित किया गया था। आज की दिल्ली का कांग्रेस की रैली ने सिद्ध कर दिया कि अभी कांग्रेस में उतनी दम नहीं हुई है कि वे मोदी को टक्कर दे सकें। सत्ता से उन्हें हटाना तो दूर की बात है। मंच पर कई ऐसे नेता महसूस कर रहे थे कि जितनी हाय-तौबा मचाई जा रही थी, इस रैली को लेकर, उतनी भीड़ जुटी नहीं।
आज की राहुल की रैली सचमुच भाजपा को बहुत बड़ी राहत दी होगी। जब उनके लोग रामलीला मैदान का चालीस प्रतिशत हिस्सा खाली देखे होंगे। भाजपाइयों को लगता है कि उन्हें इतनी मेहनत करने की जरुरत ही नहीं, कई मीडिया हाउस और कई यूट्यूबर खुब सोशल साइट पर राहुल की इस रैली की हवा निकाल रहे हैं। जबकि राहुल की रैली में भीड़ नहीं होने के बावजूद कई राहुल समर्थक राहुल मीडिया या पप्पू मीडिया रैली समाप्त होने के बावजूद भी खुब चिल्लम-पो कर अपनी भद्द पिटवा रहे हैं।
राजनीतिक पंडितों की मानें तो 20 दलों के बड़े-बड़े नेताओं के दिल्ली के रामलीला मैदान में पहुंचने के बावजूद, राहुल गांधी द्वारा बड़े-बड़े दावे के बावजूद भीड़ का नहीं आना, साफ बता रहा है कि विपक्षी दल कितना भी ज्ञानेश कुमार और मोदी के खिलाफ वोट चोरी का मुद्दा उछाल दें। इस मुद्दे पर आम जनता इनके साथ नहीं। बल्कि आज भी मोदी के साथ डटकर खड़ी है। कुछ लोग तो यह भी कहने लगे हैं कि जो व्यक्ति या नेता दिल्ली के रामलीला मैदान को भरने तक की ताकत नहीं रखता, वो क्या रैली करेगा? कुछ लोग तो यह भी कह रहे है कि ये तो 20 दलों की ताकत थी तो यह हाल हुआ। अगर केवल कांग्रेस की रैली होती तो इनकी रैली में पांच हजार भी लोग नहीं जुटते।
