राजनीति

HC के आदेश पर खुले BSL के सभी गेट, टूटी नाकेबंदी, विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलन के बीच प्रशासन की कार्रवाई, औद्योगिक गतिविधियां सामान्य करने की पहल, टू-टैंक गार्डन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति

बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) में विस्थापित अप्रेंटिस संघ एवं अन्य संगठनों के आंदोलन के बीच रविवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के नौवें दिन जिला एवं पुलिस प्रशासन ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद संयंत्र के बंद पड़े सभी प्रवेश द्वार खुलवा दिए। इससे पहले रविवार सुबह प्रशासन ने मुख्य द्वार खुलवाया था, जिसके बाद संयंत्र में फंसे कर्मचारियों के बाहर निकलने और कर्मियों की आवाजाही शुरू हुई। शाम तक सभी गेट खुलवा दिए गए और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई।

चास के अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल ढांडा ने सभी गेट खुलवाए जाने की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, बीएसएल प्रबंधन ने शनिवार को झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। रविवार को मामले की सुनवाई के दौरान बोकारो के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संयंत्र के सभी प्रवेश द्वार खुलवाए, ताकि कर्मचारियों का आवागमन बहाल हो सके और औद्योगिक गतिविधियों को सामान्य बनाया जा सके।

गेट जाम होने से उत्पादन पर पड़ा व्यापक असर

विस्थापितों के आंदोलन के कारण संयंत्र के मुख्य द्वार समेत अन्य प्रवेश मार्गों पर आवागमन बाधित होने से कर्मचारियों, अधिकारियों, संविदा श्रमिकों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। संयंत्र के भीतर उत्पादन एवं परिचालन व्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई।

17 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध उत्पादन रिपोर्ट के अनुसार, ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट तथा स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस-I एवं एसएमएस-II) सहित प्रमुख उत्पादन इकाइयों और मिलों का परिचालन ठप हो गया था। इस व्यवधान से बीएसएल को प्रतिदिन लगभग 30 करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति होने का अनुमान जताया गया।

संयंत्र प्रबंधन के अनुसार, प्रवेश द्वार अवरुद्ध होने के कारण कई इस्पातकर्मी 18 घंटे से अधिक समय तक परिसर के भीतर फंसे रहे। इस दौरान उन्हें भोजन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद कर्मियों ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आवश्यक परिचालन संबंधी दायित्वों का निर्वहन किया।

औद्योगिक सुरक्षा को लेकर प्रबंधन चिंतित

बीएसएल प्रबंधन ने संयंत्र की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए लंबे समय तक परिचालन बाधित रहने पर चिंता जताई थी। संयंत्र में उच्च तापमान, लिक्विड स्टील और औद्योगिक गैसों से संबंधित प्रणालियों का संचालन अत्यंत सावधानी और निरंतर तकनीकी निगरानी की मांग करता है। औद्योगिक गैस पाइपलाइनों के विस्तृत नेटवर्क की चौबीसों घंटे निगरानी भी आवश्यक है।

प्रबंधन के मुताबिक, नाकेबंदी के कारण प्रमुख उत्पादन इकाइयों का संचालन बाधित होने से संवेदनशील गैस प्रणालियों की निगरानी और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का अनुपालन चुनौतीपूर्ण हो गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दौरान गैस रिसाव या किसी दुर्घटना की सूचना नहीं थी। इसके बावजूद संयंत्र की सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव को लेकर प्रबंधन ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की थी।

मुख्य द्वार के आसपास निषेधाज्ञा लागू

आंदोलन के दौरान औद्योगिक गतिविधियों और कर्मचारियों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए अनुमंडल दंडाधिकारी, चास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की। प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, बीएसएल के चिह्नित प्रवेश द्वारों के आसपास निर्धारित दायरे में भीड़ जुटाने, जुलूस, रैली, सभा, धरना-प्रदर्शन तथा हथियार लेकर चलने जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया।

आदेश का उद्देश्य संयंत्र के प्रवेश द्वारों पर आवागमन सामान्य बनाए रखना, औद्योगिक शांति कायम रखना और विधि-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करना है। प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा संयंत्र के प्रवेश द्वारों पर सामान्य आवागमन बनाए रखने के लिए आवश्यक विधिसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

टू-टैंक गार्डन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की छूट

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। प्रशासन इस अधिकार का सम्मान करता है। धरना-प्रदर्शन के लिए पूर्व निर्धारित स्थल टू-टैंक गार्डन है, जहां संबंधित प्राधिकार से अनुमति प्राप्त कर नियमानुसार आंदोलन किया जा सकता है। प्रशासन ने विस्थापित अप्रेंटिस संघ और अन्य संबंधित संगठनों से अपील की है कि वे संयंत्र के किसी भी प्रवेश द्वार को अवरुद्ध न करें और कर्मचारियों, आम नागरिकों तथा आवश्यक सेवाओं के निर्बाध आवागमन में सहयोग दें।

अब आंदोलन की अगली रणनीति पर निगाहें

बीएसएल के सभी गेट खुलवाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विस्थापित अप्रेंटिस संघ और अन्य आंदोलनकारी संगठन आगे क्या रणनीति अपनाते हैं। एक ओर संयंत्र प्रबंधन औद्योगिक गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर विस्थापितों की मांगों और आंदोलन के अगले चरण को लेकर स्थिति पर सबकी निगाहें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता संयंत्र में आवागमन निर्बाध बनाए रखने, औद्योगिक गतिविधियों को सुचारू रखने और विधि-व्यवस्था कायम करने की है। आने वाले दिनों में आंदोलनकारी संगठनों के रुख से ही इस विवाद की अगली दिशा स्पष्ट होगी। 

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