बोलिये राजनीतिक संत शिरोमणि, पत्रकार उद्धारक व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की जय…
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी बहुत अच्छे आदमी है। इतने अच्छे आदमी है कि हमारा वश चले तो इन्हें भारत रत्न दिलवा दें। लेकिन क्या करें, मेरा कोई वश ही नहीं चलता। यह भारत रत्न देने की बात, मैं इसलिए लिख रहा हूं कि बाबूलाल मरांडी जी का हृदय भी राजनीति के तराजू पर जाकर तुलता है, उस तराजू में तुलने के बाद उन्हें जब पता चलता है कि इसमें क्या बोलने से, किसके पक्ष में बोलने से या मुख्यमंत्री को पत्र लिखने से, उन्हें क्या राजनीति माइलेज मिलेगा, तब जाकर वे बोलते या लिखते हैं।
यह मैं इसलिए लिख रहा हूं कि नेता प्रतिपक्ष रांची के महान पत्रकार (बाबूलाल मरांडी की नजरों में) माने जानेवाले सैय्यद शरीफ इब्राहिम के साथ कुछ दिन पहले हुई घटना से पिघले जा रहे हैं। आज वे इतना पिघल गये कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन तक को चिट्ठी लिख डाली। लेकिन यही बाबूलाल मरांडी उस वक्त नहीं पिघले, जब इनका ही खोज धनबाद का दबंग भाजपा सांसद ढुलू महतो एक गरीब का जीना दूभर कर दिया था।
ठीक वैसे ही जैसे आज रेल डीआईजी आलोक प्रियदर्शी ने सैय्यद शरीफ इब्राहिम के घर के सामने वाहन लगाकर उसका जीना दूभर कर दिया है। ठीक उसी प्रकार आज से साढ़े चार साल पहले धनबाद का दबंग भाजपा सांसद ढुलू महतो अशोक महतो की पत्नी कुंती देवी के दुकान के सामने ईंट गिरवाकर और पानी की टैंकर लगवाकर उसकी दुकानें बंद करवाकर, उसका जीना दूभर कर दिया था। ढुलू महतो के इस अत्याचार से आतंकित कुंती देवी और उसका परिवार कहां नहीं गया, उपायुक्त से लेकर राष्ट्रपति तक गुहार लगाई, पर किसी ने नहीं सुनी।
अंत में कुंती देवी धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर महीनों अनशन पर बैठी, तब जाकर किसी पुलिस पदाधिकारी का दिल पसीजा, उसकी दुकान के सामने से ईंट और पानी का टैंकर हटवाया। तब कुंती देवी का दुकान खुला और उसके घर में चुल्हे जले। क्या बता सकते हैं बाबूलाल मरांडी कि जब उनका प्यारा, दुलारा, दबंग ढुलू महतो जब कुंती देवी पर अत्याचार कर रहा था तो उन्होंने उसे ढुलू के अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को कब और कौन सी चिट्ठी लिखी थी? उत्तर होगा – नहीं।

विद्रोही24, तो उस वक्त उक्त खबर को जोरदार ढंग से उठाता था। लेकिन किसी भाजपा नेता या अन्य किसी भी राजनीतिक दल ने अशोक महतो और उनकी पत्नी कुंती देवी पर हो रहे अत्याचार पर चूं तक नहीं बोला। जबकि ढुलू द्वारा बनाये गये चिटाही राम राज मंदिर में कुंती देवी ने अपनी रैयती जमीन भी दे दी थी और उसका खामियाजा कुंती देवी ने अपने उपर हो रहे अत्याचार को देखकर उठाया। वो रोती रही, बिलखती रही, लेकिन बाबूलाल मरांडी और उनके प्यारे-दुलारे ढुलू को दया नहीं आई।
भाजपा के ही एक शीर्षस्थ नेता के इशारे पर एक पत्रकार के खिलाफ झूठे केस दर्ज करवा दिये गये। वो पत्रकार हाई कोर्ट तक केस लड़ा। वो पत्रकार केस जीता। क्या बाबूलाल मरांडी बता सकते है कि उक्त पत्रकार के लिए उनके दिल में कौन सा तूफान खड़ा हुआ था? सच्चाई तो यही है कि रांची में पत्रकारों की बाढ़ है। उसके नाम पर कई संस्थाएं चल रही है। कई अखबारें हैं। यहां तक की रांची प्रेस क्लब है। आप बता सकते है कि किस अखबार में सैय्यद शरीफ इब्राहिम के लिए आंसू छलका है? उत्तर होगा – नहीं।
क्योंकि पत्रकार ही एक ऐसा समुदाय है, जो अपनों के लिए कभी नहीं लड़ता और जान लेता है कि कोई पत्रकार कष्ट में हैं, तो उसे बचाने के लिए उपाय नहीं करता, बल्कि उसे और गर्त में ले जाने के लिए हर प्रकार का षडयंत्र रचता है। यही उसका पत्रकार होने के प्रमाण भी है। लेकिन, जब वो बूम पकड़ता है या चैनल में काम करता है या अखबार में काम करता है, तो उसकी हेकड़ी देखिये।
जबकि वो भी जानता है कि जब वो संकट में आयेगा तो सबसे पहले यही लोग उसको खत्म करने के लिए नाना प्रकार के षडयंत्र रचेंगे। लेकिन फिर भी, आज बाबूलाल मरांडी की जय बोलिये, बेचारे ने एक पत्रकार, वो भी अल्पसंख्यक, जो समुदाय भाजपा को कभी वोट नहीं करता, उसके लिए बाबूलाल मरांडी ने आंसू बहाये हैं। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को पत्र लिखा है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पुलिस उपमहानिरीक्षक आलोक प्रियदर्शी द्वारा रांची के अशोक नगर इलाके में पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम व उनके परिवारों के साथ कथित उत्पीड़न, धमकी, रास्ता अवरूद्ध करने तथा पद एवं प्रभाव के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई करने के संबंध में पत्र लिखा है।
उन्होंने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को सारी स्थिति से अवगत कराते हुए इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और राज्य में कानून के शासन के प्रति आम जनता का विश्वास कायम रहे। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का पत्र इस प्रकार है…
मुख्यमंत्री जी,
विषय:- रांची के अशोक नगर में कुछ परिवारों के साथ कथित उत्पीड़न, धमकी, रास्ता अवरूद्ध करने तथा पुलिस पदाधिकारी द्वारा पद एवं प्रभाव के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई के संबंध में।
झारखंड की राजधानी रांची के अशोक नगर, रोड नंबर-1 में निवास करने वाले पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम एवं उनके परिवार द्वारा पुलिस उपमहानिरीक्षक आलोक प्रियदर्शी पर लगाए गए गंभीर आरोपों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूँ। इस संबंध में पीड़ित परिवार द्वारा थाना प्रभारी, अरगोड़ा को लिखित शिकायत दी गई है तथा आपको भी अपनी पीड़ा से अवगत कराया गया है जिसकी प्रति आपके अवलोकनार्थ संलग्न है।
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, सैयद शरीफ इब्राहिम का परिवार लगभग पांच दशकों से अशोक नगर स्थित अपनी पैतृक भूमि पर निवास कर रहा है। परिवार का दावा है कि स्वीकृत भवन नक्शे एवं संबंधित दस्तावेजों में अशोक नगर सोसाइटी की ओर से लगभग 40 फीट चौड़ा रास्ता दर्शाया गया है, जिसका उपयोग परिवार लंबे समय से आवागमन के लिए करता रहा है। मेरे निजी संज्ञान में भी यह तथ्य है कि संबंधित रास्ता वर्ष 1964 से खुला और उपयोग में रहा है।
आरोप है कि हाल के दिनों में पुलिस उपमहानिरीक्षक आलोक प्रियदर्शी द्वारा उक्त रास्ते पर कथित रूप से अवरोध उत्पन्न किया गया। जिससे परिवार एवं आसपास के अन्य लोगों का सामान्य आवागमन बाधित हो गया है। शिकायत के अनुसार, दिनांक 28 सितंबर 2026 को शाम लगभग 6 बजे आलोक प्रियदर्शी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ वहां पहुंचे और परिवार के मुख्य द्वार के सामने वाहन खड़ा कर रास्ता अवरुद्ध कर दिया। इसके कारण परिवार के सदस्यों को अपने ही घर में बंद रहने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें तथा उनके परिवार के सदस्यों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, को झूठे मुकदमों में फँसाने, जेल भेजने और जान से मारने तक की धमकियाँ दी गईं। शिकायत में हथियार दिखाकर धमकाने तथा धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री जी, यह मामला केवल दो व्यक्तियों के बीच भूमि या रास्ते का सामान्य विवाद नहीं प्रतीत होता। इससे कई परिवारों की सुरक्षा, सम्मान, आवागमन के अधिकार और कानून के शासन से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। जब किसी वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी पर ही अपने पद, प्रभाव और सुरक्षा बल का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को डराने-धमकाने का आरोप लगे, तो ऐसे मामले की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच अत्यंत आवश्यक हो जाती है।
पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारियों से कानून के पालन, नागरिक अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष आचरण की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी अधिकारी पर ही नागरिकों के वैध अधिकारों में बाधा डालने, उन्हें भयभीत करने या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की धमकी देने के आरोप लगते हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। अतः आपसे आग्रह है कि –
- पुलिस उपमहानिरीक्षक आलोक प्रियदर्शी के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों की जाँच किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी अथवा उपयुक्त जाँच एजेंसी से कराई जाए।
- शिकायतकर्ता सैयद शरीफ इब्राहिम एवं उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव, उत्पीड़न या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया जाए।
- संबंधित भूमि, स्वामित्व, स्वीकृत भवन नक्शे, अभिलेखों तथा दशकों से उपयोग में रहे आवागमन मार्ग की विधिसम्मत जाँच कराई जाए।
- हथियार दिखाकर धमकाने, जबरन रास्ता अवरुद्ध करने, झूठे मुकदमों में फँसाने की धमकी देने तथा धार्मिक टिप्पणी जैसे आरोपों की साक्ष्य के आधार पर गंभीरता से जाँच कराई जाए।
- रास्ता अवरुद्ध होने से प्रभावित परिवारों के आवागमन एवं अन्य वैध अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
- संबंधित पुलिस पदाधिकारी के अंगरक्षकों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनका दायित्व सुरक्षा तक सीमित था या उनके माध्यम से नागरिकों को भयभीत करने का प्रयास किया गया।
मुख्यमंत्री जी, झारखंड में कानून का राज स्थापित करना और आम नागरिकों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना राज्य सरकार का दायित्व है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता। साथ ही, किसी अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर भी निष्पक्ष जाँच और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय होना चाहिए।
मुझे विश्वास है कि आप इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देंगे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और राज्य में कानून के शासन के प्रति आम जनता का विश्वास कायम रहे।
संलग्नक:- यथोक्त।
सधन्यवाद!
बाबूलाल मरांडी
