राजनीति

SIR को लेकर चुनाव आयोग ने की स्थिति स्पष्ट, कहा कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीतिगत विषय या IT विभाग से संबंधित नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था

चुनाव आयोग की शनिवार को हुई बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। आयोग ने तय किया कि SIR के दौरान अनमैप्ड या तार्किक विसंगतियों के कारण जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके घर बीएलओ जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) मामले पर निर्णय लेंगे।

आयोग के अनुसार, ऐसे लोगों को सामान्यतः ERO या AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में, ERO के निर्णय के अनुसार सुनवाई की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकेंगे। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत करने का भी निर्णय लिया है।

गरीब, श्रमिक और बेघर लोगों के लिए विशेष शिविर

जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया गया है कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीबों, बेघर लोगों तथा अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएं और आवश्यकता के अनुसार विशेष शिविर लगाए जाएं।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के लिए Form-6 के साथ संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं, गैर-SIR अवधि में निर्वाचन नियमों के अनुरूप लागू प्रपत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा।

ECINet की स्वतंत्र समीक्षा होगी

बैठक में ECINet प्रणाली की भी समीक्षा का निर्णय लिया गया। आयोग के मुताबिक, फील्ड अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों के अनुरूप भूमिका-आधारित पहुंच दी गई है। वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (DEC) की अध्यक्षता में एक समिति ECINet की समीक्षा करेगी। इसमें IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। समिति यह जांचेगी कि पोर्टल संबंधित अधिनियमों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

आयोग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई बदलाव किए जा चुके हैं। फील्ड अधिकारियों को आगे भी किसी अतिरिक्त सुविधा की जरूरत होने पर उसे लागू किया जाएगा। भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहल को आयोग की मंजूरी से पहले Committee of Officers (COO) में चर्चा के लिए रखा जाएगा।

दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समय सीमा बढ़ी

दिल्ली के CEO के अनुरोध पर आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी है। नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण की समय सीमा अब 30 नवंबर 2026 होगी। इसी तरह महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 तथा इनके निस्तारण की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।

20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा

आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है। SIR के दौरान या उसके बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से छूट गए हैं, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के समक्ष नाम शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी इस प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने सभी CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के नामांकन के लिए तत्काल विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

SIR को लेकर आयोग ने स्थिति स्पष्ट की

आयोग ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीतिगत विषय या IT विभाग से संबंधित नहीं था, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-वितरण आदेश दोनों आयुक्तों के निर्देश के बाद वास्तव में लागू नहीं किए गए और IT विभाग की निगरानी DEC से कभी वापस नहीं ली गई।

आयोग ने यह भी कहा कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR कराने का आदेश, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई और बाद में पश्चिम बंगाल तथा 30 अन्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्रक्रिया आगे बढ़ी, आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। आयोग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 के आदेश में इसे बरकरार रखा है।

गोवा में छूटे हुए मतदाताओं के लिए संबंधित BLO को घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। आयोग के मुताबिक, 97 में से 81 मतदाता अब तक नाम शामिल कराने के लिए Form-6 भर चुके हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) जारी की जाएगी। अधिकारियों की APAR हर वर्ष निर्धारित समयसीमा के भीतर, यानी 31 दिसंबर तक पूरी करने, अधिकारियों की विदेशी यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेने और आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया गया।

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