शर्मनाकः आरा हेड पोस्ट ऑफिस की बदमाशी, एक कैंसर पीड़ित महिला के स्पीड पोस्ट डाक को एक महीने से भी अधिक दिनों तक दबाए रखा और प्रेषक जवान को बार-बार झूठ बोलता रहा कि डाक की डिलीवरी कर दी गई
बिहार के अतिमहत्वपूर्ण शहर भोजपुर डिवीजन के आरा हेड पोस्ट ऑफिस के डाक अधिकारियों- डाक कर्मियों की बदमाशी देखिये, एक महीने से भी अधिक दिनों तक स्पीड पोस्ट डाक को अपने पास दबाये रखा और इधर प्रेषक को झूठी सूचना दे दी कि उसकी डाक संबंधित व्यक्ति को डिलीवर कर दी गई।
आश्चर्य यह भी है कि जब प्रेषक ने प्राप्तकर्ता को स्पीड पोस्ट डाक नहीं मिलने पर इंडिया पोस्ट के माध्यम से इसकी शिकायत दर्ज कराई तो तीन दिन के अंदर ही डाक विभाग ने प्रेषक को यह सूचना दे दी कि उसका डाक संबंधित प्राप्तकर्ता को दे दिया गया। जबकि ऐसा हुआ ही नहीं था।
जब प्रेषक ने आज यानी 22 सितम्बर 2026 को पुनः आरा डाक विभाग से संपर्क किया और इसकी शिकायत दर्ज कराई तो आरा में कार्यरत डाक विभाग के अधिकारियों व कर्मियों ने प्रेषक को सूचना दी कि उसका डाक संबंधित व्यक्ति को कल यानी 23 सितम्बर को पहुंचा दिया जायेगा।
लेकिन जब प्रेषक ने डाक विभाग के अधिकारियों से यह कहा कि स्पीड पोस्ट डाक में राखी और एटीएम है, जो कैंसर पीड़ित महिला के लिए अतिआवश्यक है। एटीएम नहीं उपलब्ध होने के कारण उसे संकट का सामना करना पड़ रहा है। तब जाकर वहां के डाक विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में संबंधित व्यक्ति तक वो डाक आज ही बात करने के बाद दो घंटे के अंदर पहुंचा दिया।
दरअसल यह कहानी है, एक जवान की। जो झारखण्ड के हजारीबाग में कार्यरत है। उसने 18 अगस्त 2026 को बीएसएफ मेरु कैम्प के पोस्ट आफिस से 18 अगस्त 2026 को करीब 11.55 बजे दोपहर में आर्टिकल नं. EJ834216285IN बुक किया। इस आर्टिकल में एटीएम कार्ड और दो राखियां थी। जिसे डाक विभाग द्वारा स्पीड पोस्ट ट्रेकिंग में बताया गया कि 21 अगस्त 2026 को अपराह्न 3.31 बजे प्राप्तकर्ता को डिलीवर कर दिया गया।
यह सूचना मिलते ही जवान प्रसन्न हो गया। क्योंकि पहली बात तो उस डाक में राखी थी, जो रक्षाबंधन के पहले डिलीवर होने से काम में आ जाती और दूसरा एटीएम होने के कारण उसकी पत्नी को कैंसर से जूझने में आराम होता। लेकिन जब 28 अगस्त 2026 को जवान ने अपनी पत्नी से संपर्क किया, यह सोचकर कि उसके बच्चे के हाथ में राखी होगी। उसकी पत्नी ने बताया कि उसे डाक मिला ही नहीं तो राखी और एटीएम कहां से मिलेगा?
जवान को यह जानकर झटका लगा। उसने तुरन्त डाक विभाग से संपर्क किया और इसकी शिकायत की कि जो आर्टिकल 18 अगस्त को भेजी थी, वो संबंधित व्यक्ति को क्यों नहीं मिला। जिसका कम्पलेन नं./ रेफरेंस आईडी 2751878030 था। डाक विभाग ने जवान को भरोसा दिया कि इसकी जांच कर, उसे तीन दिन के अंदर बता दिया जायेगा कि इसकी सच्चाई क्या है? इधर तीन दिन के अंदर ही डाक विभाग ने जवान को सूचना दी कि आर्टिकल की डिलीवरी हो चुकी है और डिलीवरी प्राप्त करनेवाली उसकी पत्नी ही है, जो प्राप्तकर्ता है।
पर सच्चाई क्या था कि आरा पोस्ट ऑफिस के डाक अधिकारियों और डाककर्मियों द्वारा जवान से इस संबंध में बार-बार झूठ बोला जा रहा था और डिलीवरी नहीं की गई थी, जब जवान ने आज 22 सितम्बर को आरा के डाक विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और जो उनसे जानकारी मिली, इससे उसके होश ही उड़ गये। डाक की अब तक डिलीवरी ही नहीं हुई थी।
जवान के पिता और जवान ने डाक अधिकारियों को कहा कि वे इसे मजाक में न लें। सवाल एक कैंसर पीड़ित महिला से जुड़ा है। अगर आपने एक महीने से भी अधिक उक्त डाक को दबा कर रखा है, तो इसके लिए आप दोषी है और जितना जल्द हो सकें, उक्त डाक को डिलीवर करें।
तब जाकर डाक अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी महसूस हुई और आनन-फानन में स्पीड पोस्ट डाक, जवान की पत्नी को 22 सितम्बर 2026 को एक महीने से भी अधिक दिनों के बाद पहुंचा दिया गया। दुखी जवान ने इसकी शिकायत पीजी पोर्टल में कर दी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर डाली है।
