फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जमशेदपुर में भी अतिक्रमण हटाने की उठी मांग
जमशेदपुर निवासी अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में सुनाए गए एक ऐतिहासिक फैसले ने देशभर में फुटपाथों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर नई बहस छेड़ दी है, और अब इसका असर उन्हें जमशेदपुर में भी दिखने लगा है, जहाँ शहरवासियों ने जिला प्रशासन और टाटा स्टील प्रबंधन से फुटपाथों को अतिक्रमण-मुक्त कराने की माँग उठाई है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने Maniyar Iliyaz @ Shaik Riyaz बनाम P. Ayyappan (2026 INSC 647) मामले में 19 जून 2026 को दिए फैसले में स्पष्ट किया कि सुरक्षित एवं निर्धारित फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के भाग-III के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है।
यह मामला एक ऐसी दुखद सड़क दुर्घटना से जुड़ा था जिसमें एक पिता अपने पाँच वर्षीय बेटे के साथ स्कूल जाते समय टैंकर की चपेट में आ गया था — घटनास्थल पर न तो फुटपाथ था और न ही पैदल पार पथ। न्यायालय ने कहा कि यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(d) के अंतर्गत आने वाले घूमने की स्वतंत्रता का हिस्सा है, तथा इसे अनुच्छेद 19(1)(a), (b), (c) एवं अनुच्छेद 21 से भी जोड़ा गया।
फैसले में यह भी कहा गया कि जहाँ सड़क मौजूद है, वहाँ नगर निकायों, शहरी विकास प्राधिकरणों, नगरपालिकाओं एवं पंचायतों का यह कर्तव्य है कि वे फुटपाथ का निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करें। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पैदल चलने वालों का अधिकार मोटर वाहनों की सुविधा से प्राथमिक माना जाना चाहिए, और इस अधिकार के उल्लंघन पर नागरिक मोटर वाहन अधिनियम से स्वतंत्र संवैधानिक उपचार एवं क्षतिपूर्ति की माँग कर सकते हैं।
इसी फैसले के आलोक में जमशेदपुर के नागरिकों का कहना है कि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथों पर दुकानों, ठेलों एवं अन्य अवैध निर्माणों का कब्जा है, जिसके चलते बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों समेत आम जनता को सड़क पर चलकर आवागमन करना पड़ता है। इससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। नागरिकों ने उपायुक्त, जिला प्रशासन एवं टाटा स्टील प्रबंधन से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए शहर के फुटपाथों को शीघ्र अतिक्रमण-मुक्त कराया जाए, ताकि जनता को उसका संवैधानिक अधिकार व्यवहारिक रूप से मिल सके।
