अपनी बात

विवेकानन्द विद्या मंदिरः उपायुक्त के आदेश नहीं मानेंगे, स्कूल फीस अपने एकाउंट में न लेकर विद्यालय कर्मी के एकाउंट में लेंगे, जब कोई अभिभावक इनके गलत कार्यों का विरोध करें, तो उसकी नौकरी से खेल जायेंगे

नाम विवेकानन्द विद्या मंदिर और काम रावणानन्द विद्या मंदिर का। उच्च न्यायालय ने प्रशासक नियुक्त किया और प्रशासक ही विद्यालय के विकास और विद्यालय के छात्र-छात्राओं के भविष्य में सबसे बड़े बाधक बन गये। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों में कुछ ही अभिभावक ऐसे हैं, जो इस विद्यालय में चल रहे घोर भ्रष्टाचार का विरोध करते हैं। बाकी तो सभी जो विद्यालय के प्रबंधन का आदेश होता है, सिर झुका कर स्वीकार कर लेते हैं।

क्योंकि वे जानते हैं कि अगर ऐसा नहीं करेंगे तो ये विद्यालय प्रबंधन उनके बच्चों के भविष्य के साथ खेल सकता है, उनके भविष्य पर डाका डाल सकता है, हो सकता है कि उनके नौकरी पर भी न धावा बोल दें। इसी डर से ज्यादातर अभिभावक चुप्पी साध लेते हैं। लेकिन इन्हीं अभिभावकों में से कुछ अभिभावक जैसे कमलेश सिंह हैं। जो विद्यालय में चल रहे कुप्रबंधन के खिलाफ लोहा लेते हैं, लड़ते हैं और ताल ठोककर कहते हैं कि वे इस कुप्रबंधन के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ेंगे।

चाहे उसके लिए उनकी नौकरी ही क्यों न दांव पर लग जाये। यह मैं इसलिए लिख रहा हूं कि हाल ही में विद्यालय प्रबंधन द्वारा झारखण्ड विधानसभा सचिवालय को एक पत्र संप्रेषित किया गया है कि जिसमें कमलेश सिंह के खिलाफ शिकायत की गई है। कमाल है, कमलेश सिंह की गलती क्या है? कमेलश सिंह तो सिर्फ यही कह रहे है कि जो रांची के उपायुक्त के आदेश पर जिला शिक्षा अधीक्षक, रांची द्वारा 15.05.2026 एवं 21.05.2026 को विद्यालय को शुल्क के संबंध में पुनरीक्षण, आवश्यक कार्रवाई/समायोजन हेतु स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उन निर्देशों का पालन हो।

अब तक तीन महीना बीत जाने के बाद भी अगर रांची के उपायुक्त के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, तो क्या इसके लिए भी कमलेश सिंह और उनकी बेटी सिद्धि सिंह दोषी है या विद्यालय प्रबंधन। आश्चर्य यह भी है कि जब कमलेश सिंह इसके बावजूद भी विद्यालय का फीस देने जा रहे हैं तो विद्यालय अपने एकाउंट में पैसे न लेकर किसी अन्य कर्मचारी के एकाउंट में पैसे देने को क्यों कह रहा है?

क्या कोई सम्मानित विद्यालय का प्रबंधन इस प्रकार की हरकतें कर सकता है। लेकिन यहां तो इसी प्रकार की हरकतें चल रही है। विद्यालय प्रबंधन हर प्रकार के कुकर्म कर रहा है। लेकिन स्थानीय प्रशासन ऐसे विद्यालय पर कार्रवाई न कर, पता नहीं क्या कर रहा है? भगवान जाने। होना तो यह चाहिए था कि जिला प्रशासन विद्यालय प्रबंधन को यह कहता कि जो उनके द्वारा आदेश दिया गया, उसका अनुपालन विद्यालय प्रबंधन क्यों नहीं कर रहा, जवाब दें।

होना तो यह चाहिए था कि जो विद्यालय, विद्यालय फीस अपने एकाउंट में न लेकर, विद्यालय के कर्मी के एकाउंट में मंगवा रहा है, उस पर कार्रवाई करता, लेकिन उस पर कार्रवाई न कर, उलटे अब कमलेश सिंह की नौकरी पर बन आई है। अब सवाल यह है कि क्या आनेवाले समय में सत्य पराजित होगा या असत्य? विद्रोही24 की नजर इसी ओर हैं और अब आइये देखते है कि सिद्धि सिंह के पिता विधानसभा कर्मी कमलेश सिंह की पीड़ा क्या है? और वे कह क्या रहे हैं। सभी को ध्यान पूर्वक पढ़ना चाहिए। जिला प्रशासन को और ध्यान से पढ़ना चाहिए। ताकि एक छात्रा और उसके पिता को समुचित न्याय मिल सकें…

मेरी पुत्री सिद्धि सिंह का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए, कक्षा XI में नामांकन उपायुक्त रांची और जिला शिक्षा अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद दिनांक 22/09/2026 को करा दिया गया। लेकिन अप्रैल 2026 से पढ़ाई शुरू होने के कारण माह 21 अगस्त तक पढ़ाई पूर्णतः बाधित किया गया और उसकी पढ़ाई बाधित होने के कारण अब आगामी परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो रही है। मेरे मुख्य महत्वपूर्ण बिंदु निम्न हैं—

  1. विद्यालय की शुल्क वृद्धि एवं अन्य शुल्क के संबंध में मैंने पहले ही 13.04.2026, 16.06.2026 और कई अन्य तिथियों को शिकायत की है।
  2. जिला शिक्षा अधीक्षक, रांची द्वारा 15.05.2026 एवं 21.05.2026 को विद्यालय को शुल्क के संबंध में पुनरीक्षण, आवश्यक कार्रवाई/समायोजन हेतु स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। जिस पर अब तक तीन महीना बीतने के बाद भी कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं दी गई है। जबकि पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि “विगत तीन शैक्षणिक सत्रों का (2023-24, 2024-25 एवं 2025-26) एवं शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुल्क विवरण की मांग की गयी थी। इस क्रम में आपके द्वारा संबंधित प्रतिवेदन कार्यालय को उपलब्ध कराई गयी, उक्त प्रतिवेदन के अवलोकन के क्रम में पाया गया कि आपके विद्यालय द्वारा झारखण्ड न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 की धारा 7 (अ) (1) (3) / धारा 7 (अ) (1) (छ) का उल्लंघन किया गया।” फिर भी मेरे द्वारा सत्र 2023-24 का पूर्ण फीस दोनों पुत्रियों का दिया गया है। जिसके पुनरीक्षण और समायोजन की जरूरत है।
  3. मेरी दोनों पुत्रियों ऋद्धि सिंह एवं सिद्धि सिंह की फीस नियमित रूप से जमा होती रही है। ऋद्धि सिंह की फीस मार्च 2026 तक पूर्ण जमा है।
  4. सिद्धि सिंह के संबंध में विद्यालय द्वारा बताया गया है कि ₹60,000/- बकाया विवादित राशि है, जो मेरे द्वारा जानबूझकर रोका गया है, क्योंकि विद्यालय के द्वारा नगद अथवा निजी खाते में फीस की मांग की जा रही है और मैं पूर्व की तरह विद्यालय के खाते में जमा लेने को बोल रहा हूं, साथ ही विद्यालय के द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ोतरी लगातार की गई है और मेरे कई बार मौखिक और लिखित अनुरोध के बाद भी कार्रवाई नहीं किया गया है, जिला शिक्षा अधीक्षक के दो पत्राचार के अनुसार नियमानुसार पुनरीक्षण और समायोजन हेतु वर्षवार एवं मदवार सत्यापन आवश्यक है।
  5. विद्यालय ने अपने 20.08.2026 के पत्र में स्वयं कहा है कि वह मेरी पुत्री को कक्षा XI में प्रवेश देने के लिए तैयार है। लेकिन अपने किसी भी पत्र में मेरे मूल शिकायत पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
  6. कक्षा XI की अर्द्ध मासिक परीक्षा 12.09.2026 से होने की जानकारी है। शिकायत को नज़र अंदाज करके और नामांकन में देरी से मेरी पुत्री का शैक्षणिक नुकसान एक षड्यंत्र के तहत कराया गया है। ताकि कोई भी अभिभावक गलत नीतियों का विरोध न कर सके।
  7. विकास एवं अन्य शुल्क विद्यालय के द्वारा नियमित रूप से लिया जाता रहा है, और विकास कार्य और जर्जर भवनों की मरम्मति कार्य वर्ष 2023 से अब तक पूर्णतः बंद है, लेकिन राशि नियमित सभी छात्रों से लिया जाता रहा है। जिसके पुनरीक्षण और समायोजन की जरूरत है।
  8. मेरे द्वारा शुल्क संबंधी शिकायत किए जाने का विपरीत प्रभाव मेरी पुत्री के नामांकन, पढ़ाई, उपस्थिति एवं परीक्षा पर पड़ा है। विद्यालय ने अपने दोनों पत्रों में मेरे किसी भी शिकायत पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराया है और न ही कोई शिकायत के निपटारे के लिए रुचि दिखाई है।
  9. ज्ञात सूत्रों से पता चला है कि एस.पी. सिंह, संयोजक द्वारा मेरे संबंध में झारखंड विधानसभा में लगाए गए मनगढ़ंत झूठे और बेबुनियाद कथित आरोपों से मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है और मान मर्दन हुआ है, जिसपर माननीय को लिखित रूप में झारखंड विधानसभा को भेजी गई बेबुनियाद सभी आरोपो का खंडन तुरंत करना चाहिए। ताकि मेरी प्रतिष्ठा धूमिल न हो। जबकि वर्ष 2014 से लेकर मार्च 2026 तक विद्यालय के बेहतरीन प्रदर्शन और विकास में भरपूर सहयोग किया हूं, इसके प्रचार प्रसार, नामांकन, सहित सभी कार्यों में आगे बढ़ कर हिस्सा लिया हूं। जिस कारण यहां हो रहे गलत नीतियों को बताना और विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक कदम उठाना मेरी जिम्मेदारी है।
  10. दिनांक 20/08/2026 को जिला शिक्षा अधीक्षक और अन्य के साथ वार्ता के दौरान उपर्युक्त सभी विषय को रखा गया था, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। छात्रा के नामांकन संबंधित ही विशेष ध्यान रहा।
  11. प्रभारी प्रधानाचार्य एवं संयोजक के द्वारा कथित बकाया शुल्क जमा कराने पर विशेष ध्यान रहा, जो वार्ता के पश्चात माह सितम्बर में अनिवार्य रूप से जमा करना बताया गया है। जिससे यह स्पष्ट है कि माह अक्टूबर 2026 में वर्ग 11th के रजिस्ट्रेशन बाधित हो सकता है। क्योंकि विद्यालय द्वारा मनमाने तरीके से बढ़ाई गई फीस के पुनरीक्षण और समायोजन की कोई चर्चा और उल्लेख वार्ता और पत्र में विद्यालय ने नहीं किया है, जिस कारण शिकायत यथावत है और विद्यालय की इसमें सुधार की कोई मंशा साफ़ नहीं है। और आज दिनांक 03/09/2026 तक सिद्धि सिंह को एडमिशन नम्बर तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
  12. आज 03 सितंबर को विद्यालय में PTM के पश्चात भी संयोजक एस पी सिंह जी को फीस जमा करने संबंधित बात को रखा जिसमें उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आप नगद राशि विद्यालय कर्मी “तिवारी जी” के मोबाइल पर भेज दीजिए जिसका हमने कड़ा विरोध किया और देने में असमर्थता जताई है। (वीडियो साक्ष्य उपलब्ध)
  13. माह अप्रैल से अनुमानित 4600 छात्रों के फीस को नगद अथवा विद्यालय कर्मी के निजी खाते के माध्यम से लिया जा रहा है जो सीबीएसई के नियमों का घोर उल्लंघन है। यह राशि करीब मासिक डेढ़ करोड़ रुपए सीधे नगद का खेल किया जा रहा है, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
  14. विगत माह मार्च से लेकर माह सितम्बर 2026 तक हमने कई दर्जनों बार बकाया फीस जमा लेने का अनुरोध विद्यालय को पत्र और मौखिक रुप से किया हूं, लेकिन प्रबंधन नगद लेने की जिद पर है, जिसे हमने वर्तमान विद्यालय की दुर्दशा को देखकर मना किया है।
  15. विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में है, नया भवन का कार्य बंद है, करोड़ों रुपए का नुकसान विद्यालय का हो रहा है।
  16. प्रशासक नरेंद्र नाथ तिवारी विगत चार साल छ महीने से मासिक डेढ़ लाख रुपए मानदेय पर है लेकिन ये विद्यालय में कभी आते ही नहीं। विद्यालय की सुधार में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिस कारण इन्हें दिया जाने वाला राशि विद्यालय का बर्बाद हो रहा है।
  17. एस पी सिंह, संयोजक विद्यालय के ही शिक्षक से सेवानिवृत्त हुए हैं और इन्हें अवैध कार्य करने की नीयत से प्रशासक ने एक लाख तीस हजार रुपए महीना मानदेय पर रखा है। प्रशासक और संयोजक के द्वारा विद्यालय का करीब 34 लाख रुपए सालाना व्यर्थ बर्बाद हो रहा है।
  18. प्रशासक, संयोजक और प्रभारी प्रधानाचार्य अमिताभ लाहा ये सभी मिलकर विवेकानंद विद्या मंदिर जैसे प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्र को बर्बाद व्यक्तिगत लाभ और स्वार्थ मे कर रहे हैं।
  19. विद्यालय के खेल मैदान में पानी भरा रहता है, छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पेयजल की व्यवस्था भी सुचारू रूप से चालू नहीं है।
  20. उच्च न्यायालय झारखंड द्वारा नियुक्त प्रशासक के द्वारा तीन वर्ष पूर्व ही न्यायालय के निर्देशानुसार विधिवत दंडाधिकारी नियुक्त करके श्रीराम कृष्ण सेवा संघ का चुनाव संपन्न कराया गया लेकिन इनके द्वारा मतदान की गिनती नहीं किया जाता है। जिस कारण विद्यालय के भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। इनके द्वारा नियम विरुद्ध एक अलग प्रबंधन कमिटी भी बना दिया गया है।
  21. उपायुक्त रांची के द्वारा रांची जिला के सभी निजी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि जिसने भी नियम विरुद्ध फीस बढ़ोतरी की है सभी स्कूल 15 दिनों के अंदर पुनरीक्षण और समायोजन कर ले। लेकिन अब तक जानकारी के अनुसार मात्र 15 स्कूलों ने ही समायोजन किया है बाकी किसी स्कूल ने आदेश नहीं माना, ऐसा प्रतिवर्ष होता रहता है। अभिभावक परेशान है।

मेरी मांग है:

– सिद्धि सिंह का तत्काल कक्षा XI में बिना शर्त नामांकन प्रक्रिया पूर्ण कराई जाए।

– उसे नियमित कक्षा एवं आगामी सभी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दिया जाए, जिसके लिए मात्र मासिक फीस प्रति माह भुगतान किया जाएगा।

– ₹60,000/- कथित बकाया का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए ।

– विद्यालय के सभी छात्रों का अतिरिक्त शुल्क वृद्धि के पुनरीक्षण और समायोजन के साथ पूर्व में दिए गए शिक्षा विभाग के निर्देशों का अनुपालन हेतु समय सीमा निर्धारित और सुनिश्चित कराया जाए।

– विकास शुल्क और अन्य शुल्क का भी समायोजन कराई जाए क्योंकि विगत 4 साल से कोई विकास और निर्माण कार्य नहीं किया गया है।

– विवादित शुल्क का नियमानुसार पुनरीक्षण और समायोजन किया जाए।

– मेरी पुत्री की अब तक हुई पढ़ाई के नुकसान की भरपाई हेतु आवश्यक सहयोग दिया जाए।

– विद्यालय को चारागाह बनाने में जो दोषी व्यक्ति हैं उनको चिन्हित करके दंडित किया जाए।

मैं स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों पर संचालित होने वाले विद्यालय की वैध एवं सत्यापित फीस का भुगतान मेरे द्वारा दिया गया समयावधि में करने के लिए तैयार हूं। मेरा उद्देश्य विवाद नहीं, बल्कि विवेकानंद विद्या मंदिर जैसे प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्र को सुरक्षित और व्यवस्थित करते हुए यहां अध्ययन कर रहे छात्रों के साथ न्याय, मेरी पुत्री की शिक्षा एवं शुल्क विवाद का निष्पक्ष समाधान है।

मैं उपायुक्त रांची, जिला शिक्षा अधीक्षक रांची का मान रखते हुए एवं उनके निर्देशों का पालन करते हुए अपनी पुत्री सिद्धि सिंह का नामांकन कराया हूं, इसके बावजूद मेरी पुत्री के साथ एक सोची समझी षड्यंत्र के तहत मानसिक प्रताड़ना होता प्रतीत हो रहा है। साथ ही समय सीमा निर्धारित कर उपायुक्त रांची एवं जिला शिक्षा अधीक्षक रांची के निर्देशानुसार बढ़ाई गई फीस का सभी छात्रों के पुनरीक्षण और समायोजन का पूर्ण कराया जाए। मै आश्वस्त करता हूं कि तत्पश्चात बकाया शुल्क CARD के माध्यम से जमा कर दिया जाएगा। पुनरीक्षण और समायोजन का निर्देश रांची जिले के सभी स्कूलों को प्राप्त है, तो अविलंब सभी स्कूलों में यह इसी सत्र में समायोजन किया जाना चाहिए।

कमलेश सिंह

अभिभावक – सिद्धि सिंह।

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